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एक आम का पेड़ 236 तरह के देता है फल,दशहरी,लंगड़ा, चौसा,सफेदा,बैगनपल्ली आदि किस्में मिलेंगी एक साथ, रिपोर्ट दयानन्द यादव

*एक आम का पेड़ 236 तरह के देता है फल,दशहरी,लंगड़ा, चौसा,सफेदा,बैगनपल्ली आदि किस्में मिलेंगी एक साथ*

 

लखनऊ।आम के एक पेड़ में 236 किस्म के फल आते हैं। यह बड़ा अचंभित करता है,लेकिन ये सच है।प्रयोग सफल होने के बाद अब इसे बाग तक पहुंचाने की तैयारी है। उत्तर प्रदेश में आम की बागवानी बढ़ाने का लगातार प्रयास किया जा रहा है। पर्यावरण में हो रहे बदलाव से कई बार एक किस्म में फल आता है तो दूसरी में नहीं आता है। इसी को ध्यान में रखकर केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान ने प्रयोग शुरू किया। आम के एक पेड़ की टहनियों में हर साल नई किस्मों की ग्राफ्टिंग (कलम विधि) की गई। दशहरी के पेड़ में लंगड़ा,सफेदा, आम्रपाली,चौसा,बैगनपल्ली आदि किस्में को प्रत्यारोपित किया गया। लगभग चार साल में एक के बाद 236 किस्मों की कलम बांधी गई।अब उनमें फल आने लगे हैं,इससे उत्साहित वैज्ञानिक अब इस विधि के बारे में बागवानों को प्रशिक्षण दे रहे हैं।

 

*बागवानों को करेंगे प्रेरित*

 

उद्यान विभाग के संयुक्त निदेशक डाॅक्टर राजीव वर्मा बताते हैं कि एक ही पेड़ में अलग- अलग किस्में लेने के बारे में बागवानों को विभाग की ओर से भी प्रेरित किया जा रहा है,जहां भी बैठकें हो रही हैं,वहां इस विधि के बारे में जानकारी दी जा रही है,जिन किसानों की रुचि है,उन्हें केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान भेजकर पेड़ को दिखाया भी जा रही है।

 

*क्या होगा फायदा*

 

केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान के निदेशक डॉक्टर टी दामोदरन बताते हैं कि पर्यावरण में कई तरह के बदलाव हो रहे हैं,जिस वक्त धूप होनी चाहिए, उस वक्त बारिश हो जा रही है। ऐसे में बागवानी प्रबंधन पर ध्यान देने की जरूरत है। यहां प्रयोग के तौर पर मल्टी क्लोनल आर्चड के जरिए 236 किस्में एक ही पेड़ में तैयार की गई है। इतना अधिक किस्में न सही, लेकिन एक ही पेड़ में तीन से चार किस्में प्रत्यारोपित कर देने से किसानों को फायदा मिलेगा। दामोदरन उदाहरण देते हैं कि दशहरी के लिए मौसम अनुकूल नहीं हुआ और फल नहीं लगे तो संभव है कि लगड़ा का फल आ जाए। ऐसे में पूरी बाग बिना फल की नहीं रहेगी। एक टहनी में फल नहीं है तो दूसरी टहनी में फल मिलेगा। इससे किसानों की मेहनत बेकार नहीं जाएगी।

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