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अधूरे इश्क का डेथ एंड: बच्चों को ताले में बंद कर सिपाही से मिलने निकली थी महिला मित्र, हाईवे पर बिखर गए सपने

अधूरे इश्क का डेथ एंड: बच्चों को ताले में बंद कर सिपाही से मिलने निकली थी महिला मित्र, हाईवे पर बिखर गए सपने

 

​शाहजहांपुर। जिन्दगी की पटकथा कभी-कभी किसी फिल्मी ट्रेजेडी से भी ज्यादा दर्दनाक होती है। शाहजहाँपुर-पलिया हाईवे पर भूड़ा मैनारी ओवरब्रिज के पास शुक्रवार की रात जो हादसा हुआ, वह सिर्फ एक सिपाही की मौत नहीं, बल्कि दो जिंदगियों के बीच पनप रहे उस संघर्षपूर्ण इश्क का अंत है, जो समाज की बंदिशों और अपनों की बेरुखी से भागकर पनाह ढूंढ रहा था। महकमे के बेहद मिलनसार और नेक दिल सिपाही दिनेश चौधरी की जान चली गई, तो उनकी महिला मित्र अस्पताल में मौत से जूझ रही हैं। पीछे छूट गए हैं तो बस बिलखते मासूम और वो ताला जिसकी चाबी अब वक्त ने गुम कर दी है।

 

​महिला मित्र की कहानी किसी आम संघर्षशील महिला जैसी थी। वर्ष 2014-15 में वुधवाना निवासी एक व्यक्ति के साथ सात फेरे लिए, लेकिन ससुराल की कड़वाहट ने उसे मायके (नया गांव महसूलपुर) लौटने पर मजबूर कर दिया। बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए वह जलालाबाद में किराए का मकान लेकर रहने लगी। इसी दौरान उसकी मुलाकात जलालाबाद कोतवाली में तैनात सौम्य स्वभाव के सिपाही दिनेश चौधरी से हुई। दिनेश की मिलनसारिता ने महिला मित्र के जख्मों पर मरहम का काम किया और देखते ही देखते यह जान-पहचान एक गहरे आत्मीय लगाव में बदल गई।

​वक्त बदला और दिनेश का तबादला बंडा थाने हो गया, लेकिन दिलों की दूरियां कम न हुईं। इश्क का अनुशासन ऐसा था कि महिला मित्र रात में बच्चों को सुलाती, उनके कमरे के बाहर सुरक्षा का ताला जड़ती और ममता की मजबूरी को मोहब्बत की डगर पर छोड़कर दिनेश से मिलने निकल जाती। सुबह होने से पहले वापस लौटने का यह सिलसिला महीनों से जारी था। बीती रात भी नियति ने यही जाल बुना। महिला मित्र बच्चों को सोता छोड़कर निकली, दिनेश ने उसे रिसीव किया और दोनों बंडा की ओर बढ़ रहे थे, तभी काल बनकर आए डिवाइडर ने सब कुछ तहस-नहस कर दिया।

​इधर हाईवे पर खून से लथपथ सिपाही की पहचान हो रही थी, उधर जलालाबाद के उस किराए के मकान में मासूमों की नींद टूटी। घर के दरवाजे पर ताला जड़ा देख बच्चे सहम गए। शोर मचा तो मकान मालिक ने पुलिस बुलाई। जब ताला टूटा, तो पता चला कि ममता की छाँव रात के अंधेरे में कहीं हादसे का शिकार हो गई है। पुलिस ने महिला की माँ को बुलाकर बच्चों को उनके सुपुर्द किया। मासूमों की आँखों में सवाल था कि माँ सुबह होने से पहले क्यों नहीं आई?

​​आज पूरा महकमा गमगीन है। दिनेश की मिलनसारिता की मिसालें दी जा रही हैं, तो वहीं महिला के बच्चों की सिसकियाँ उस अधूरे इश्क की गवाह बन गई हैं, जिसका अंत एक दर्दनाक खबर बनकर अखबार के पन्नों पर सिमट गया है।

 

शाहजहाँपुर पुलिस

 

​#Shahjahanpur #JalalabadNews

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