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मानव जीवन का हर क्षण इंसानियत और भक्ति में समर्पित हो- सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज, रिपोर्ट डॉ कृपाल सिंह मानव

*हर हृदय के देव बाबा हरदेव सिंह जी को अर्पित श्रद्धा सुमन*

 

*मानव जीवन का हर क्षण इंसानियत और भक्ति में समर्पित हो*

*- सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज*

 

 

*एटा,14 मई 2026:-* सद्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राज पिता रमित जी के पावन आशीर्वाद से श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक चेतना से परिपूर्ण दिव्य वातावरण में संत निरंकारी मिशन द्वारा युगदृष्टा बाबा हरदेव सिंह जी की स्मृति में समर्पण दिवस सत्संग का आयोजन एटा के बली मोहम्मद चौराहे स्थित हीरा पैलेस गेस्ट हाउस में हुआ। इस आयोजन में आगरा से पधारे निरंकारी संत प्रमोद यादव ने सतगुरु सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के पावन एवं अमृतमयी प्रवचनों को सुनाकर आत्मिक शांति, आनंद एवं दिव्य प्रेरणा का अनुभव प्राप्त कराया।

 

समर्पण दिवस के अवसर पर निरंकारी संत ने सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के आशीर्वचनों को फरमाते हुए कहा कि बाबा जी का सम्पूर्ण जीवन मानवता, सेवा और प्रेमा भक्ति का दिव्य उदाहरण रहा। उन्होंने प्रेरित किया कि मानव जीवन का प्रत्येक क्षण सार्थक बने और हर पल इंसानियत, करुणा एवं मानवीय मूल्यों का प्रमाण प्रस्तुत करे। बाबा जी ने सदैव यही शिक्षा दी कि प्रत्येक व्यक्ति अपने भीतर मानवीय गुण विकसित कर निराकार का आसरा लेते हुए सार्थक एवं उद्देश्यपूर्ण जीवन जीयें।

 

सतगुरु माता जी के वचनों को फरमाया कि यदि किसी के जीवन में दुख, पीड़ा या संघर्ष है, तो हमारा कर्तव्य उसे बढ़ाना नहीं, बल्कि प्रेम, संवेदनशीलता और सहयोग से उसे शांत करना है। जीवन ऐसा हो जो रिश्तों में प्रेम एवं समर्पण की भावना को सुदृढ़ करे। यही बाबा जी की शिक्षाओं का सार और सच्ची मानवता का स्वरूप है।

 

निरंकारी संत ने बताया कि समर्पण दिवस के अवसर पर आध्यात्मिक स्थल समालखा हरियाणा में भी विशाल रूप में समर्पण दिवस समागम का आयोजन हुआ जिसमें सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने समझाया कि ब्रह्मज्ञान प्राप्त होने के पश्चात जीवन केवल व्यक्तिगत सीमाओं तक नहीं रहता, बल्कि समस्त मानवता की सेवा, कल्याण और उत्थान का माध्यम बन जाता है। सच्ची सेवा दिखावे से परे प्रेम, विनम्रता और निस्वार्थता से परिपूर्ण होती है, जबकि वास्तविक भक्ति शब्दों से आगे बढ़कर व्यवहार, विचार और कर्मों में झलकती है।

 

अमर संत अवनीत जी के समर्पित जीवन का उल्लेख करते हुए सतगुरु माता जी ने फरमाया कि सच्चा समर्पण वही है जिसमें सेवा का भाव केवल विचारों में नहीं, बल्कि व्यवहार और प्राथमिकताओं में स्पष्ट दिखाई दे। उन्होंने गृहस्थ जीवन की जिम्मेदारियों के साथ संगत, सेवा और भक्ति को सर्वोपरि रखकर यह प्रेरणा दी कि पारिवारिक एवं सामाजिक जीवन में रहते हुए भी पूर्ण निष्ठा से समर्पित जीवन जिया जा सकता है।

 

अंत में सतगुरु माता जी ने आशीर्वाद दिया कि प्रत्येक जीवन सेवा, सुमिरण और सत्संग को अपनी प्राथमिकता बनाए तथा हर हृदय निराकार में समर्पित होकर प्रेम, शांति और मानवता बाँटने का सशक्त माध्यम बने।

 

आयोजन के मध्य गीतकारों, कवियों और विचारकों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से हृदय की गहन अनुभूतियों को अभिव्यक्त किया। जहाँ हर शब्द, हर स्वर दिल की गहराईयों से होते हुए आत्मा को छू गया। किसी ने बाबा जी की दिव्य शिक्षाओं का प्रेरक संदेश सुनाया, तो किसी ने उनके सौम्य व्यक्तित्व, सेवा-समर्पण और मानवता के कल्याण हेतु किए गए कार्यों के प्रति श्रद्धा सुमन अर्पित किए। वक्ताओं की रचनाओं व शब्दों में बाबा जी के हृदय स्पर्शी प्रेम का प्रतिबिम्ब परिलक्षित होता दिख रहा था।

 

 

बाबा हरदेव सिंह जी की प्रेरणा आज भी श्रद्धालुओं के हृदय में जीवित है। वर्तमान में सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज उनके संदेशों को आगे बढ़ाते हुए सेवा, समर्पण और सद्भाव का प्रकाश फैला रही हैं। उनके मार्गदर्शन से विश्व में मानवता, एकता और भाईचारे का संदेश निरंतर प्रसारित हो रहा है। समर्पण दिवस के अवसर पर जिला एटा के अबागढ़, जैथरा, धुमरी, अलीगंज, निधौली कला, कल्यानपुर आदि अनेक क्षेत्रों से निरंकारी श्रद्धालु उपस्थित हुए।

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