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स्मार्ट मीटरों से अत्यधिक बिल आने, उपभोक्ताओं के शोषण एवं राहत हेतु त्वरित हस्तक्षेप  को लेकर आंदोलन 5 को

 स्मार्ट मीटरों से अत्यधिक बिल आने, उपभोक्ताओं के शोषण एवं राहत हेतु त्वरित हस्तक्षेप

 

जनपद एटा सहित समस्त उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बाद विद्युत उपभोक्ता गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। स्मार्ट मीटरों से जहां उपभोक्ताओं को सुविधा मिलनी चाहिए थी, वहां यह मीटर क्षमता से अधिक बिल देकर आमजन के लिए अभिशाप बनते जा रहे हैं।

 

इस जनपद के अंतर्गत सैकड़ों उपभोक्ता प्रतिदिन इस तथ्य से अवगत करा रहे हैं कि नए स्मार्ट मीटर लगने के बाद उनका विद्युत बिल पहले की तुलना में कई गुना बढ़ गया है, जबकि उनकी विद्युत खपत (यूनिट) में कोई वृद्धि नहीं हुई है। गरीब, मजदूर एवं निम्न मध्यम वर्ग के परिवार, जिनकी दैनिक आय 400-500 रुपये है और जिन्हें महीने में केवल 15-20 दिन ही काम मिल पाता है, इतने अधिक बिलों को चुकाने में असमर्थ हैं।

 

विशेष रूप से निम्नलिखित समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं:

 

1. अत्यधिक बिलिंग: स्मार्ट मीटर लगने के बाद प्रथम कुछ माह में बिल सामान्यता से 2-4 गुना अधिक आ रहा है, जिसे उपभोक्ता आर्थिक रूप से वहन नहीं कर पा रहे हैं।

2. पुराने बिलों का दबाव: पुराने मीटर में कुछ यूनिट शेष (बकाया) होने पर उपभोक्ताओं को बिना सुनवाई के भारी ब्याज सहित राशि जमा करने को कहा जाता है, जिससे परिवार कर्ज में डूबता जा रहा है।

3. शिकायत निस्तारण में विफलता: जब उपभोक्ता संबंधित अधिकारियों के पास जाते हैं, तब उनकी समस्या को गंभीरता से नहीं लिया जाता और केवल डर (ब्याज बढ़ने का) देकर भुगतान हेतु विवश किया जाता है।

4. निजी कम्पनियों का मनमाना व्यवहार: सरकार के संरक्षण में निजी कम्पनियां उपभोक्ताओं को लूट रही हैं, जिससे जनता में भारी आक्रोश है।

 

यद्यपि सरकार ने कुछ मामलों में नए स्मार्ट मीटर लगाने पर रोक लगा दी है, तथापि नए विद्युत कनेक्शनों पर स्मार्ट मीटर अभी भी लगाए जा रहे हैं। जिन उपभोक्ताओं के यहां पहले से स्मार्ट मीटर लग चुके हैं, उनकी समस्या का अब तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है।

 

अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि:

 

1. स्मार्ट मीटरों की कार्यप्रणाली की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए जाएं।

2. जब तक स्पष्ट दिशा-निर्देश एवं गलत बिलिंग का समाधान नहीं हो जाता, तब तक समस्त स्मार्ट मीटरों पर बिलिंग रोकने तथा पुराने मीटर के औसत (average) के आधार पर बिल जारी करने का निर्देश दिया जाए।

3. अत्यधिक बिल आने पर उपभोक्ताओं को मूलभूत राहत प्रदान की जाए तथा ब्याज एवं अतिरिक्त राशि पर तत्काल स्थगन किया जाए।

4. गरीब एवं मजदूर वर्ग के लिए किस्त योजना या सब्सिडी की घोषणा की जाए तथा निजी कम्पनियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

 

 

भवदीय,

ठाकुर अनिल सोलंकी

जिला अध्यक्ष

भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल एटा

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