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देश को आवश्यकता है एक कठोर कानून की जो रोक किसी भी धर्म संप्रदाय के बारे में अभद्र टिप्पणियों को,BMF News

*देश को आवश्यकता है एक कठोर कानून की जो रोक किसी भी धर्म संप्रदाय के बारे में अभद्र टिप्पणियों को*

 

राजनीतिक पार्टियों के लोगों से लेकर कई सामाजिक संगठनों के लोग आए दिन किसी न किसी धर्म या महापुरुषों के प्रति अभद्र बातें और टिप्पणी करते रहते हैं जिससे विवाद बढ़ता है, लोग अपनी राजनीतिक रोटियां सकते हैं और चली जाते हैं और इसमें फंस जाती है भोली भाली जनता इन्हें कैसे रोका जाए ?

 

*कठोर कानून से ही मानेंगे असामाजिक तत्व*

 

 

किसी भी धर्म से जुड़े देवी देवता उसके संस्थापक या महापुरुषों के प्रति अवैध टिप्पणियां करने का चलन बढ़ गया है विशेषकर राजनीतिक लोगों द्वारा, इससे समाज में अशांति उत्पन्न होती है और सामान्य जनता आपस में लड़ जाती है l

 

इसे रोकने का सीधा सा उपाय है कठोर कानून और कठोर कानून भी इस स्तर का कि यदि कोई किसी भी धर्म के बारे में या महापुरुष के बारे में गलत बात करता है तो उसे कम से कम 10 वर्ष की सजा होनी चाहिए और वह भी फास्टट्रेक कोर्ट में मुकदमा चलाकर

 

*मजबूत करनी होगी न्याय व्यवस्था*

 

भारत की न्याय व्यवस्था को भी मजबूत करने की आवश्यकता है जिसमें पर्याप्त साक्ष्य होने पर One Year Justice (एक वर्ष के अंदर न्याय) की व्यवस्था होनी चाहिए जिसमें 1 वर्ष के अंदर न्याय मिल जाए l

 

सोचिए अगर कोई किसी धर्म पर या महापुरुष पर अवध टिप्पणी करता है और उसे पर मुकदमा दर्ज होने के बाद जब मामला न्यायालय पहुंचता है और 1 वर्ष के अंदर ही उसकी सजा हो जाती है तो विश्वास रखिए ऐसे असामाजिक तत्वों की संख्या सीमित होकर मात्र उंगलियों पर गिरने लायक रह जाएगी , क्योंकि अभी सभी को पता है कि हम कुछ भी कहें हमारे खिलाफ कोई प्रभावी व कठोर कार्रवाई नहीं होगी इसलिए कठोर कानून की आवश्यकता है, जो अभद्र टिप्पणी करने पर 10 वर्ष की सजा दे l

 

 

*अगर मैंने जो बात लिखी है यह सही है तो इसे स्वीकार्य और फिर स्वयं से पूछिए कि आप जिस राजनीतिक दल का समर्थन करते हैं क्या उसके नेता ने कभी इस तरह के कानून बनाने के लिए कोई पहली की ?*

 

वास्तविकता में इस पूरे ब्रह्मांड का सबसे हरामी जीव नेता है जो नहीं चाहता कि कभी शांति हो जिससे उसे राजनीति करने का मौका मिलता रहे क्योंकि…….

 

*#नेता किसी का न होता*

 

 

 

*पवन चतुर्वेदी*

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