*मध्यांचल का भ्रष्टाचार किस्सा: “प्रमोशन के नाम पर इनोवा दो, LED बोर्ड लगाओ” — मुख्य अभियंता की पोल खुल गई, अब बड़का बाबू क्या करेंगे?*
लखनऊ/बरेली, 1 नवंबर 2026
उत्तर प्रदेश के स्मार्ट मीटर प्रोजेक्ट में एक और “प्रमोशन” का खुलासा सामने आया है। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक के कार्यालय में 14 अक्टूबर 2026 को प्राप्त ह्विसलब्लोअर शिकायत में गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता के मुताबिक,.*इंनटलीस्मार्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड (अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस से जुड़ी कंपनी) के PR मैनेजर अनुराग सिंह ने अपने वकील अधिवक्ता अरविंद शुक्ला के जरिए बरेली के पूर्व मुख्य अभियंता ज्ञान प्रकाश (जो अब लखनऊ मुख्यालय में तैनात हैं) पर “प्रमोशन के नाम पर” व्यक्तिगत लाभ लेने का आरोप लगाया है।*
*शिकायत के अनुसार, 18 जून 2025 को मुख्य अभियंता ज्ञान प्रकाश ने स्मार्ट मीटर इंस्टॉलेशन का वर्क फ्रंट खोलने के बदले अपने नाम पर एक इनोवा कार और तनख्वाह पर ड्राइवर की मांग की। मौखिक अनुमति दी गई, बाकी शहर का काम रोका गया। जब इतना काफी नहीं पड़ा, तो 19 जून को कंपनी के COO सूर्य प्रताप सिंह और स्टेट हेड रजत गुप्ता ने मुख्य अभियंता को लगभग 3 लाख रुपये का बड़ा 3D LED बोर्ड लगवाने का “प्रमोशनल” लालच दिया। बोर्ड इतना बड़ा था कि उस समय के जिलाधिकारी के बोर्ड से भी बड़ा हो।*
कंपनी ने गुरुग्राम/लखनऊ के वेंडर से लग्जरी बोर्ड तैयार करवाया। *कंटेंट की अप्रूवल और एडिटिंग खुद मुख्य अभियंता ने की*। *19 जुलाई 2025 को यह बोर्ड उनके सरकारी बंगले (हैदर ऑफिसर्स कॉलोनी, काटजू मार्ग, बरेली) और कार्यालय दोनों जगहों पर “प्रमोशन” के नाम पर लगा दिया गया।*
शिकायतकर्ता का दावा है कि इन सभी बातचीत के कॉल रिकॉर्डिंग और वीडियो क्लिप मौजूद हैं। उन्होंने लिखा है कि जब उन्होंने इस सौदेबाजी का विरोध किया तो कंपनी ने उन्हें परेशान करना शुरू कर दिया। शिकायत में साफ लिखा है कि बरेली सिर्फ एक उदाहरण है, ऐसे मामले अन्य जिलों में भी हो रहे हैं।
मुख्य अभियंता का “निर्दोष” पक्ष
*जब इस संबंध में मुख्य अभियंता ज्ञान प्रकाश से मोबाइल फोन पर संपर्क किया गया, तो उन्होंने पहले कहा कि वे बीमार हैं और उन्हें बुखार आया हुआ है। इसके बाद बिना कोई सवाल पूछे ही अपनी सफाई देते हुए बोले, “तीन लाख का कौन सा बोर्ड? क्या इतना महंगा कोई बोर्ड हो सकता है?” फिर वही रटा-रटाया जवाब, “मैं बेकसूर हूं, मुझे फंसाया जा रहा है। सारे आरोप झूठे और बेबुनियाद हैं।”*
*जब उनसे वॉइस रिकॉर्ड और वीडियो फुटेज की बात की गई, तो उन्होंने कहा, “ये AI जेनरेटेड हैं। मैं ईमानदार हूं, इसीलिए मेरे खिलाफ एक सोची-समझी साजिश रची जा रही है।”*
वैसे तो आजकल हर बात पर बोल दिया जाता है कि “AI जेनरेटेड है” और “हम निर्दोष हैं।” अब तो ये वक्त ही बताएगा कि मुख्य अभियंता कितने दोषी हैं और कितने निर्दोष। क्योंकि हर भ्रष्टाचारी अपने आप को ईमानदार और निर्दोष बताने की कोशिश करता है।
निगम के “अधिकारियों” की प्रतिक्रिया
*मुख्य अभियंता का पक्ष जानने के बाद निदेशक टेक्निकल से फोन पर इस विषय में जानना चाहा तो जनाब का कहना था कि गलती से यह प्रकरण मेरे पास आ गया है, मुझे इस संबंध में कुछ नहीं मालूम। साक्ष्य देखने पर तो ऐसा प्रतीत नहीं होता कि गलती से यह प्रकरण उनके पास आ गया होगा।* *उसमें तो प्रबंध निदेशक के हस्ताक्षर हैं, साथ में निदेशक मानव संसाधन व कार्य प्रशासन को जिम्मेदारी प्रदान की गई थी। खैर, गुमराह करने के उद्देश्य से बताया गया कि आप निदेशक वाणिज्य से बात कर लें। लेकिन मामला तो इन दोनों निदेशकों को जांच के लिए दिया गया था।*
फिर *निदेशक कार्य प्रशासन को फोन किया गया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। *जब उनके कार्यालय जाकर भेंट की, तब उन्होंने बताया कि मामले की जांच हो रही है। लेकिन जांच किस अधिकारी को दी गई है*, यह निदेशक नहीं बता पाए।
तत्पश्चात बारी आती* *इस वितरण निगम के सर्वेसर्वा प्रबंध निदेशक यानी “बड़का बाबू” की*। *उन्होंने तो सरकारी फोन उठाने के लिए भी एक आदमी रख छोड़ा है। उस व्यक्ति ने फोन उठाया और कहा, “साहब मीटिंग में हैं।” जब परिचय जानना चाहा तो उसने यह कहते हुए फोन काट दिया कि “साहब के खाली होने पर मैं आपकी बात कराएंगे।”*
*खबर लिखते समय तक महोदय का फोन नहीं आया और फोन करने पर कोई भी फोन भी नहीं उठा रहा है। लेकिन आज 1 नवंबर हो जाने पर भी जांच किसे दी गई है, यह किसी को नहीं पता*।
*अब देखना ये है कि मध्यांचल के प्रबंध निदेशक यानी बड़का बाबू इस पर क्या कार्रवाई करते हैं? क्या वे ज्ञान प्रकाश को निलंबित कर जांच करवाते हैं* या *फिर उनको कोई क्रीम पोस्टिंग देकर हेडक्वार्टर से महीमा-मंडित करते हैं और भ्रष्टाचारी होने का इनाम देते हैं? या फिर इसमें फिर वही दलित एंगल वाला चाल चली जाएगी?* या *फिर एक तथाकथित एसोसिएशन खड़ी होकर मांग करेगी कि “हमारे दलित अभियंता को सताया जा रहा है”?*
शिकायत में इंटेलीस्मार्ट को ब्लैक लिस्ट करने, कंपनी को मिलने वाले सभी सरकारी भुगतान रोकने और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत FIR दर्ज करने की मांग की गई है। शिकायत REC, विद्युत मंत्रालय, UPPCL, मध्यांचल विद्युत वितरण निगम, पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के साथ-साथ CBI और अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस को भी भेजी गई है। मध्यांचल के कार्यालय में 14 अक्टूबर को यह शिकायत आधिकारिक रूप से प्राप्त हो चुकी है।
खैर…
*युद्ध अभी शेष है*
*अविजित आनन्द*
*संपादक, समय का उपभोक्ता (राष्ट्रीय हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र, लखनऊ)*
*और व्हिस्पर्स ऑफ अन्टोल्ड (हिन्दी-अंग्रेजी मासिक पत्रिका)*
















