बैनामा (रजिस्ट्री) निरस्तीकरण का अर्थ है कानूनी प्रक्रिया द्वारा पहले से पंजीकृत विक्रय पत्र को अमान्य घोषित करना। यह विशिष्ट राहत अधिनियम, 1963 की धारा 31 के तहत सिविल कोर्ट में मुकदमा दायर करके किया जाता है, जिसके लिए मुख्यतः धोखाधड़ी, दबाव, या अनैतिक तरीके से रजिस्ट्री कराने जैसे कारण मान्य हैं।
बैनामा निरस्तीकरण के मुख्य नियम और आधार:मुख्य आधार: रजिस्ट्री कपटपूर्वक (fraud), बालिग न होने पर, बिना सहमति, गलत जानकारी, या बिना प्रतिफल (पैसा दिए) के कराई गई हो।समय सीमा (Limitation): बैनामा निरस्तीकरण का वाद जानकारी होने के 3 वर्ष के भीतर दायर किया जाना चाहिए।
पक्षकार: केवल वही व्यक्ति दावा कर सकता है जिसका नाम खतौनी में हो या जिसे बेनामे से प्रत्यक्ष चोट (हानि) पहुंची हो।प्रक्रिया: एक सिविल सूट (Diwani Suit) के माध्यम से, साक्ष्यों के साथ अदालत में साबित करना होता है कि बैनामा फर्जी है।
आपसी सहमति: यदि दोनों पक्ष सहमत हों, तो आपसी सहमति से भी रजिस्ट्री रद्द करवाई जा सकती है।अदालती फीस: निरस्तीकरण के मामले में, अक्सर बैनामा के मूल्य के बराबर अदालती फीस (court fee) देनी पड़ती है।
नोट: यह जानकारी सामान्य कानूनी नियमों पर आधारित है। भूमि विवाद के मामलों में स्थानीय वकील से परामर्श करना उचित है।








