व्यंग्यात्मक कहानी: “अवागढ़ का महान जाम महोत्सव” (रिपोर्टर: सरोज कुमार दुबे)

हमारा इस कहानी के माध्यम से किसी की भावनाओं को आहत करने का उद्देश्य नहीं है। फिर भी अगर किसी को जाने अनजाने में कष्ट हो तो उसके लिए क्षमा प्रार्थना। मेरा उद्देश्य इस कहानी के माध्यम से अपना कोई व्यक्तिगत स्वारथ साधना नहीं है बल्कि समाज की पीड़ा को उजागर करना है।

 

📰 व्यंग्यात्मक कहानी: “अवागढ़ का महान जाम महोत्सव”

(रिपोर्टर: सरोज कुमार दुबे)

अवागढ़ नगर में आपका स्वागत है—जहां गलियां छोटी हैं, लेकिन अतिक्रमण का साम्राज्य बहुत बड़ा! यहां फुटपाथ नाम की चीज़ इतिहास की किताबों में मिलती है, और सड़कें… वो तो बस गाड़ियों को खड़ा करने के लिए बनी हैं।

सुबह होते ही नगर में “जाम महोत्सव” की तैयारी शुरू हो जाती है। ई-रिक्शा अपनी मर्जी से कहीं भी अड्डा जमा लेते हैं, दबंगों की गाड़ियां बीच सड़क पर ऐसे खड़ी होती हैं जैसे वही सड़क के मालिक हों। दुकानदार अपना सामान फुटपाथ से आगे बढ़ाकर सड़क तक ले आते हैं—और फिर शुरू होती है रोज की किच-किच!

यात्री बेचारे इधर-उधर निकलने की कोशिश करते हैं, अतिक्रमणकारी अपनी “हक की जमीन” छोड़ने को तैयार नहीं। नतीजा—बहस, झगड़ा और कभी-कभी तो हाथापाई तक की नौबत।

अब आते हैं इस कहानी के “महान किरदार”—प्रशासन!

नगर पंचायत, पुलिस, डीएम, एसडीएम… सबको सब कुछ दिखता है, लेकिन कार्रवाई ऐसे गायब है जैसे गर्मी में बिजली।

और इन सबके बीच खड़ा है एक “बेचारा रिपोर्टर”—सरोज कुमार दुबे।

कैमरा उठाकर रोज निकल पड़ता है—कभी फोटो, कभी वीडियो, कभी खबर… बार-बार प्रशासन और समाज को आईना दिखाने की कोशिश।

लेकिन असर?

उतना ही जितना दीवार से टकराकर आवाज का होता है—वापस वही!

 

एक तरफ सड़क पर खड़ी गाड़ियां, बीच में फंसा आम आदमी पसीना पोंछता हुआ…

ऊपर पेड़ पर बैठा “प्रशासन” दूरबीन से देख रहा है—और नीचे रिपोर्टर माइक लेकर चिल्ला रहा है, “जागो!”

🔍 समस्या साफ है:

अनियंत्रित अतिक्रमण

अव्यवस्थित पार्किंग

प्रशासन की लापरवाही

और समाज की भी चुप्पी

✅ समाधान भी मुश्किल नहीं:

नियमित अतिक्रमण हटाओ अभियान

तय पार्किंग व्यवस्था

ई-रिक्शा के लिए स्टैंड निर्धारित

और सबसे जरूरी—जनता की जागरूकता और सहयोग

📢 संदेश:

अगर सड़क सबकी है, तो जिम्मेदारी भी सबकी है।

प्रशासन जागे, समाज साथ दे—तभी अवागढ़ “जाम महोत्सव” से “सुव्यवस्थित नगर” बन सकता है।

वरना…

रिपोर्टर खबर बनाता रहेगा,

और जाम—इतिहास! 😄

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