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पुलिस औऱ सट्टे बाजों ने मिलकर फर्जी गुडवर्क की खातिर निर्दोष धरा

आगरा. पिछले दिनों आगरा में क्रिकेट के सट्टे बाजों की सक्रियता से ध्यान भटकाने के लिए एक गुड वर्क की कहानी की सफल शूटिंग हुई मगर जो निर्दोष इसके चपेट में आया वह एक पत्रकार निकला तो फिर पुलिस औऱ सट्टेबाजों की सहायता में लगी कहानी कार की टीम को लेना देना पड़ गया.
पीड़ित ने अपनी पीड़ा लगातार डी जी पी उत्तर प्रदेश, मुख्यमंत्री, पत्रकार संघो औऱ केन्द्रोय ग्रह मंत्री के साथ प्रेस कॉन्सिल ऑफ इण्डिया को भी लिखकर अवगत कराया जाता रहा है. अपने पत्र में कथित गुड वर्क का हवाला देते हुए स्पष्ट किया गया कि जहां बुकिंग स्थल था वहाँ से पीड़ित को न उठा अन्य की गिरफ्तारी के बाद रिश्ते नाते पता कर उनके सम्पन्न रिस्तेदारों का पता कर उन्हें घर से कहानी कार पुलिस अधिकारी जो ये धंधा करवाते थे ने घर से उठा सम्पूर्ण मामला का हीरो उन्हें बना जेल ऐसी धारा में भेजा जो नियम से नोटिस देकर ही करवाई हो सकती थी. उक्त पुलिस अधिकारी की स्थानीय क्षेत्र के अराजक लोगों की संगत की वीडियो भी शिकायत में प्रेषित की गई है.
पीड़ित पत्रकार स्थानीय प्रेस क्लब का सचिव के साथ एन यू जे आई का भी प्रदेश कार्रकारिणी में सचिव है. उसकी स्थानीय पुलिस महकमें को जानकारी होने से पहले ही गुडवर्क का पैकअप कर दिया गया. मामला हालांकि साफ़ है फसाने का मगर सामाजिक दोष का है जिससे बदनामी हुई है इस कारण पीड़ित पत्रकार ने फिर से सभी दरवारों में अपनी शिकायत भेज़ उच्च स्तर से जाँच की मांग की है.
पीड़ित के आसपास के सूत्र जल्द ही आगरा में बड़ी बैठक कर शासन प्रशासन को अवगत करने की तैयरी में हैँ अग़र फिर भी न्याय नहीं मिला तो वो मानव आयोग औऱ राष्ट्रपति से गुहार करने को मजबूर होगा.
















