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बाबासाहेब अंबेडकर: आधुनिक भारत के शिल्पकार और संवैधानिक चेतना के प्रतीक हैं

रिपोर्ट: सत्यदेव पांडे ( ब्यूरो चीफ- सोनभद्र)

  • माजवादी पार्टी के नगर कार्यकर्ताओं के द्वारा चोपन नगर में 135 जयंती धूमधाम से बनाया गया

चोपन/ सोनभद्र। पूरा देश ‘संविधान निर्माता’ बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती मना रहा है। 14 अप्रैल का दिन न केवल एक महापुरुष के स्मरण का दिन है, बल्कि उस संकल्प को दोहराने का भी है, जिसके आधार पर आधुनिक भारत की नींव रखी गई।
युगपुरुष बाबासाहेब: एक प्रेरणा
बाबासाहेब डॉ. अंबेडकर का जीवन संघर्ष और सफलता की एक अद्भुत गाथा है। वे न केवल दलितों और शोषितों के मसीहा थे, बल्कि एक प्रखर अर्थशास्त्री, कानूनविद और समाज सुधारक भी थे। शिक्षा को सबसे बड़ा शस्त्र मानने वाले बाबासाहेब ने यह सिद्ध किया कि ज्ञान की शक्ति से बड़े से बड़े सामाजिक ढांचे को बदला जा सकता है। उन्होंने समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व के मूल्यों को भारतीय समाज के केंद्र में स्थापित किया, जो आज भी उन्हें संपूर्ण मानवता के लिए पूजनीय बनाता है।
संविधान: देश निर्माण का प्राण-तत्व,
भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश को एक सूत्र में पिरोने का काम हमारे संविधान ने किया है। यह केवल नियमों की एक किताब नहीं, बल्कि देश की ‘सामाजिक आकांक्षाओं का दस्तावेज’ है। संविधान ने लोकतंत्र को मजबूत किया, ‘कानून का शासन’ सुनिश्चित किया और हर नागरिक को गरिमा के साथ जीने का अधिकार दिया। देश का विकास इसी संवैधानिक ढांचे की मजबूती पर निर्भर है।
नागरिकों के लिए संविधान सर्वोपरि क्यों?
एक नागरिक के लिए संविधान उसका सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है। यह राज्य की निरंकुशता को रोकता है और व्यक्ति को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है। जब हम संविधान को सर्वोपरि मानते हैं, तो हम वास्तव में कानून की सर्वोच्चता को स्वीकार करते हैं। यह संविधान ही है जो एक गरीब और एक रसूखदार व्यक्ति को न्याय के तराजू में समान खड़ा करता है। यही कारण है कि लोकतंत्र की असली शक्ति नागरिकों के इसी विश्वास में निहित है कि उनका हर अधिकार सुरक्षित है।
लोकतंत्र के चार स्तंभ: सशक्त भारत की राह,
एक समृद्ध और शक्तिशाली राष्ट्र के निर्माण में कार्यपालिका, विधायिका, न्यायपालिका और मीडिया—ये चारों स्तंभ एक-दूसरे के पूरक हैं।
विधायिका नीतियां बनाती है, कार्यपालिका उन्हें क्रियान्वित करती है, और न्यायपालिका संविधान के रक्षक के रूप में यह देखती है कि कहीं कोई लक्ष्मण रेखा तो नहीं लांघ रहा।
इन सबके बीच मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। लोकतंत्र के ‘चौथे स्तंभ’ के रूप में मीडिया को निष्पक्ष रहकर जनता की आवाज को शासन तक पहुँचाना और सत्ता को जवाबदेह बनाना होता है।
सशक्त भारत का निर्माण किसी एक विभाग या संस्था से नहीं, बल्कि इन चारों स्तंभों के आपसी सामंजस्य और संविधान के प्रति अटूट निष्ठा से ही संभव है।
जयंती का संकल्प,
बाबासाहेब की जयंती पर यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी कि हम उनके द्वारा दिए गए संवैधानिक मूल्यों को अपने दैनिक जीवन में उतारें। आइए, एक ऐसे भारत का निर्माण करें जहाँ सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय प्रगति एक-दूसरे के पर्याय हों।
इस अवसर पर‌ सपा नगर अध्यक्ष रमेश सोनी अल्पसंख्यक सभा के प्रदेश सचिव नजमुद्दीन‌ इदरीसी ‌ जिला उपाध्यक्ष जाकिर हुसैन ओबरा विधानसभा के सचिव सत्यदेव पांडे उपेंद्र सेन जिला सचिव महेंद्र निषाद सपा नगर कोषाध्यक्ष सुमित गुप्ता सुल्तान कुरेशी सलीम कुरैशी पूर्व नगर अध्यक्ष दिन सेठ वार्ड नंबर 13 की सभासद नरेश यादव सभासद दिनेश जाटों आदि लोग उपस्थित थे

Shakeer Akhtar
Author: Shakeer Akhtar

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