रिपोर्ट: (पत्रकार) सत्यदेव पांडे ( ब्यूरो चीफ- सोनभद्र)
बभनी। सरकारी व्यवस्था से उम्मीद लगाए बैठे ग्रामीणों का सब्र आखिरकार जवाब दे गया। वर्षों से बदहाल घघरी-बभनी मार्ग की समस्या को लेकर बार-बार अधिकारियों के दरवाजे खटखटाने के बावजूद जब कोई ठोस समाधान नहीं हुआ तो ग्रामीणों ने अब सरकारी मशीनरी का इंतजार छोड़कर अपनी समस्या का समाधान खुद करने की ठान ली।
घघरी ग्राम पंचायत के इस महत्वपूर्ण मार्ग पर ग्रामीणों ने जनसहयोग से सड़क सुधार का काम शुरू करा दिया है। सड़क की बदहाली इतनी गंभीर है कि बरसात के दिनों में मार्ग पर आवागमन करना ग्रामीणों के लिए चुनौती बन जाता है। जगह-जगह गड्ढे, कीचड़, जलभराव और सड़क किनारे फैली झाड़ियां आवागमन में बाधा बन रही हैं। तस्वीरें इस स्थिति की हकीकत खुद बयां कर रही हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या एक-दो साल पुरानी नहीं बल्कि ग्राम सभा के गठन के समय से चली आ रही है। सड़क की बदहाली को लेकर जिलाधिकारी और लोक निर्माण विभाग समेत संबंधित अधिकारियों को करीब आधा दर्जन से अधिक लिखित शिकायतें दी जा चुकी हैं। बावजूद इसके समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।
ग्रामीणों ने केवल शिकायत तक खुद को सीमित नहीं रखा। जून माह में धरना-प्रदर्शन किया गया, अगस्त में श्रमदान किया गया और सोशल मीडिया समेत विभिन्न माध्यमों से भी प्रशासन तक सड़क की बदहाली की आवाज पहुंचाई गई। इसके बावजूद जब स्थिति जस की तस रही तो ग्रामीणों ने आपस में चर्चा कर खुद सड़क को तत्काल आवागमन योग्य बनाने का निर्णय लिया।
स्थानीय लोगों के अनुसार, सड़क की समस्या को लेकर उमंग गुप्ता ने ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों के बीच जनसहयोग से तत्काल समाधान निकालने का प्रस्ताव रखा। प्रस्ताव पर सहमति बनने के बाद शोमारु प्रसाद और ओमप्रकाश ने इस पहल की जिम्मेदारी संभाली तथा ग्रामीणों से सहयोग की अपील की।
इसके बाद ग्रामीणों के सहयोग से सड़क पर जेसीबी उतारी गई। मार्ग को समतल करने, बड़े गड्ढों को भरने, जलनिकासी की व्यवस्था करने, सोलिंग गिराने और सड़क किनारे उगी झाड़ियों की सफाई समेत अन्य जरूरी कार्य शुरू किए गए।
ग्रामीणों का कहना है कि जनसहयोग से किया जा रहा यह काम सरकारी सड़क निर्माण का विकल्प नहीं है, बल्कि मजबूरी में उठाया गया कदम है। जब सरकारी स्तर से वर्षों से समस्या का समाधान नहीं हुआ तो गांव के लोगों ने अपनी जेब और अपने श्रम से रास्ता चलने लायक बनाने की कोशिश शुरू की है।
ग्रामीणों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि सड़क जैसी मूलभूत सुविधा के लिए उन्हें बार-बार शिकायत करनी पड़ रही है। उनका कहना है कि बरसात में मार्ग की स्थिति और खराब होने पर बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों, मरीजों और रोजमर्रा के काम से आने-जाने वाले लोगों को सबसे अधिक परेशानी होती है।
ग्रामीणों का सवाल है कि यदि वर्षों से शिकायतें देने, धरना देने, श्रमदान करने और लगातार समस्या उठाने के बाद भी प्रशासनिक स्तर पर स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है, तो ग्रामीण आखिर किससे उम्मीद करें?
ग्रामीणों ने कहा कि वे प्रशासन से किसी विशेष सुविधा की मांग नहीं कर रहे, बल्कि अपने गांव के लोगों के लिए चलने योग्य और सुरक्षित सड़क चाहते हैं। उनका कहना है कि जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए मौके का निरीक्षण कर स्थायी समाधान की दिशा में कार्रवाई करनी चाहिए।
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि जनसहयोग से किया जा रहा यह प्रयास उनकी मजबूरी का परिणाम है। यदि इसके बाद भी प्रशासन ने सड़क की समस्या को गंभीरता से नहीं लिया और समयबद्ध कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीण व्यापक आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
ग्रामीणों ने आगामी विधानसभा चुनाव के बहिष्कार तक की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि वर्षों से सड़क की समस्या झेल रहे ग्रामीण अब केवल आश्वासन के भरोसे नहीं बैठेंगे। जरूरत पड़ी तो सड़क के लिए गांव से लेकर प्रशासनिक स्तर तक अपनी आवाज और मजबूती से उठाई जाएगी।















