*देश-प्रदेश में स्वतंत्र पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं पर बढ़ता उत्पीड़न चिंताजनक:*
*भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले खोजी पत्रकारों को बनाया जा रहा निशाना;*
नई दिल्ली।
एकजुट होने का आह्वान
देश और विभिन्न राज्यों में निष्पक्ष, स्वतंत्र और खोजी पत्रकारिता करने वाले पत्रकारों तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न का मामला गहराता जा रहा है। भारतीय मीडिया फाउंडेशन (National Core Committee) के संस्थापक एके बिंदुसार ने एक प्रेस वक्तव्य में कहा कि देश में निष्पक्ष पत्रकारिता और सामाजिक सजगता पर सीधा हमला हो रहा है। विशेष रूप से उन खोजी पत्रकारों को टारगेट किया जा रहा है, जो भ्रष्टाचार के खिलाफ नए-नए साक्ष्य और तथ्य उजागर कर रहे हैं।
एके बिंदुसार ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जब भी कोई पत्रकार या सामाजिक कार्यकर्ता शासकीय कार्यप्रणाली या प्रशासन में व्याप्त भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करता है, तो उसे दबाने के प्रयास शुरू हो जाते हैं। जो स्वतंत्र पत्रकार खोजी पत्रकारिता (Investigative Journalism) के माध्यम से भ्रष्ट तंत्र की परतों को उघाड़ रहे हैं, उनका उत्पीड़न अब चरम सीमा पर पहुंच चुका है।
पुलिस, शासन-प्रशासन और फर्जीवाड़ा का खेल
बयान में आरोप लगाया गया कि पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के इस उत्पीड़न में केवल भ्रष्ट तत्व ही शामिल नहीं हैं, बल्कि:
पुलिस और सरकारी विभागों के अधिकारी भी शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि निष्पक्ष आवाज उठाने वालों पर दबाव बनाने और फर्जी मामलों में उलझाने का काम कर रहे हैं।
तथाकथित मीडिया संस्थानों की भूमिका:
कुछ कथित न्यूज चैनलों और समाचार पत्रों से जुड़े लोग भी भ्रष्टाचार में लिप्त तंत्र का सहयोग कर रहे हैं।
‘फर्जी’ करार देकर दबाने की कोशिश:
निष्पक्ष पत्रकारों को ‘फर्जी’ कहकर उनकी साख पर सवाल उठाए जाते हैं, ताकि भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी लड़ाई को कमजोर किया जा सके।
. इन प्रमुख राज्यों में मामले सबसे ज्यादा
एके बिंदुसार ने बताया कि विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड और उत्तराखंड जैसे राज्यों में पत्रकारों तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न, मानसिक दबाव और फर्जी मुकदमों के मामले सबसे अधिक सामने आ रहे हैं।
एक मंच पर संगठित होने की जरूरत
बी एम एफ नेशनल के संस्थापक एके बिंदुसार ने सभी स्वतंत्र पत्रकारों, खोजी पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे अब एकजुट हों। उन्होंने कहा:
संगठित लड़ाई:
भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे इस दमन चक्र को रोकने के लिए सभी का एक मंच पर आना आवश्यक है।
सहयोगियों पर कार्रवाई की मांग:
जो अधिकारी और तथाकथित पत्रकार भ्रष्टाचार को छिपाने और खोजी पत्रकारों को प्रताड़ित करने में सहयोग कर रहे हैं, उन पर भी कड़ी से कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने अपील करते हुए कहा कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की स्वतंत्रता बनाए रखने और भ्रष्टाचार मुक्त समाज के निर्माण के लिए निष्पक्ष पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।















