WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.49 P
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.49 PM
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.48 PM
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.51 P
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.51 PM
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.50
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.50 PM

यह टाइपिंग के मास्टर, और समय के पाबंद एक कर्मयोगी है, टाइपिंग से इनकी दोस्ती बड़ी गहरी है, रिपोर्ट शंकर देव तिवारी

प्रेम शंकर पांडेय, सिविल कोर्ट, आगरा के गेट नंबर 2 के सामने, जहाँ रोज़ाना सैकड़ों कदम उम्मीद और न्याय की तलाश में आते-जाते हैं, वहाँ एक कुर्सी पर मुस्कुराते हुए बैठे सज्जन को देखकर आप सहज ही आगे बढ़ जाएंगे। पर ठहरिए! सामने की बोर्ड और लैपटॉप सजाए बैठा यह व्यक्तित्व कोई सामान्य व्यक्तित्व नहीं है।

— यह टाइपिंग के मास्टर, और समय के पाबंद एक कर्मयोगी है, टाइपिंग से इनकी दोस्ती बड़ी गहरी है।

उनकी उंगलियाँ जब की-बोर्ड पर थिरकती हैं, तो लगता है जैसे कोई संगीतकार पियानो पर राग छेड़ रहा हो। जिस रफ्तार और लय के साथ उनकी उंगलियाँ चलती हैं, वह देखने लायक ही नहीं, काबिले-तारीफ है। बिना देखे, बिना रुके, एक अद्भुत गति से अक्षर स्क्रीन पर उभरते हैं और देखते ही देखते एक प्रार्थना पत्र, एक शपथ पत्र, एक वाद-विवाद की पूरी पत्रावली तैयार हो जाती है।

तीस वर्षों से अधिक समय से इस अनवरत सफर में वे लाखों प्रार्थना पत्रों और हजारों वाद पत्रावलियों को अपनी उंगलियों के हुनर से अंजाम तक पहुँचा चुके हैं। कितने ही मुकदमों की पहली इबारत उनकी ही टाइपिंग से शुरू हुई है। वे केवल टाइपिस्ट नहीं, बल्कि न्याय-प्रक्रिया के एक मौन, अनिवार्य सह-यात्री हैं।

तीस साल — एक ही जगह, एक ही लगन

पिछले तीस वर्षों से सिविल कोर्ट, आगरा में गेट नं. 2 के सामने बैठकर वे अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। आँधी हो, बरसात हो या कड़कड़ाती ठंड — प्रेम शंकर जी अपनी वही जानी-पहचानी मुस्कान के साथ अपने स्थान पर मौजूद मिलते हैं।

जिंदगी के तीस सबसे बेहतरीन, ऊर्जावान साल उन्होंने इस की-बोर्ड को समर्पित कर दिए हैं। यह समर्पण ही नहीं, साधना है। ऐसे जांबाज को सलाम तो बनता है।

उनके पास आने वाला हर व्यक्ति वक्त का टोटा लेकर आता है। हर किसी को जल्दी है, हर किसी की अपेक्षा है कि उसका काम न केवल समय पर, बल्कि त्रुटि-रहित हो। और यहीं पर प्रेम शंकर जी की असली कार्यकुशलता सामने आती है।

वे केवल टाइप नहीं करते, वे भरोसा टाइप करते हैं। आने वाले का विश्वास कायम रखना और उसकी कसौटी पर खरा उतरना ही उनकी सबसे बड़ी पूँजी है। इसी विश्वास और कार्यकुशलता से उनकी आजीविका की गाड़ी ही नहीं, बल्कि कई लोगों की न्याय की उम्मीद भी चलती रहती है।

उनकी मुस्कान, उनकी रफ्तार और उनका समर्पण — तीनों ही काबिले-तारीफ हैं। ऐसे कर्मयोगी की हौसला-अफजाई लाजिमी बनती है। सिविल कोर्ट आगरा की टाइपिंग की शान, श्री प्रेम शंकर पांडेय जी का हृदय से अभिनंदन

Leave a Comment