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जलेसर तहसील में अनियमितताओं का आरोप, पदों की अदला-बदली व फर्जी दस्तावेजों से नौकरी का मामला सामने, रिपोर्ट दयानंद

*जलेसर तहसील में अनियमितताओं का आरोप, पदों की अदला-बदली व फर्जी दस्तावेजों से नौकरी का मामला सामने*

 

एटा, 12 अप्रैल 2026। जनपद एटा की जलेसर तहसील में प्रशासनिक अनियमितताओं और भ्रष्टाचार से जुड़े गंभीर आरोप सामने आए हैं। प्राप्त जानकारी और सूत्रों के अनुसार, तहसील में पदों की कथित मनमानी अदला-बदली, उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना तथा फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कर्मचारियों के सेवा में बने रहने का मामला प्रकाश में आया है।

सूत्रों के मुताबिक, जिला मुख्यालय से स्थानांतरित एक लिपिक (सीआरए बाबू) को जलेसर तहसील में एलमद्द (एलडीएम) के पद पर तैनात किया गया था, किंतु आरोप है कि संबंधित अधिकारी के आदेशों की अनदेखी करते हुए उक्त कर्मचारी को उपजिलाधिकारी का स्टेनो बना दिया गया। वहीं, पूर्व में तैनात स्टेनो को एलमद्द के पद पर कार्यरत कर दिया गया। इस प्रकार की अदला-बदली को प्रशासनिक नियमों के विपरीत बताया जा रहा है।

इसके अतिरिक्त, एक बाबू पर उम्र संबंधी फर्जीवाड़े का आरोप भी सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, संबंधित कर्मचारी की वास्तविक आयु 65 वर्ष से अधिक बताई जा रही है, जबकि कथित रूप से दूसरे शैक्षिक प्रमाण-पत्र के आधार पर कम उम्र दर्शाकर वह अभी तक सेवा में बना हुआ है। इसी प्रकार, एक चपरासी के संबंध में भी शैक्षिक योग्यता और आयु से जुड़े दस्तावेजों में विसंगतियों की बात कही जा रही है।

बताया जाता है कि दोनों कर्मचारियों के ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) में उनकी आयु सेवानिवृत्ति की सीमा से अधिक दर्शाई गई है, इसके बावजूद वे वर्तमान में सेवा में कार्यरत हैं। इस पूरे प्रकरण ने तहसील प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। संबंधित अधिकारियों की ओर से इस मामले में कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है।

जांच की मांग तेज

स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित कर्मचारियों और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

प्रशासन की भूमिका पर नजर

अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है। यदि जांच बैठाई जाती है, तो इससे न केवल सच्चाई सामने आएगी, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित हो सकेगी।

 

 

( *नोट:* यह समाचार प्राप्त सूत्रों व दस्तावेजीय दावों पर आधारित है। अंतिम सत्यापन जांच के उपरांत ही संभव है।)

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