*मेरठ को हाईकोर्ट बेंच कब? 80 साल का इंतजार अब और नहीं!

*-गादरे
*800 किलोमीटर की दूरी पर न्याय—मेरठ में हाईकोर्ट बेंच क्यों नहीं?*-गादरे
मेरठ। उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा प्रदेश है, लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनता आज भी हाईकोर्ट की बेंच के लिए दशकों से संघर्ष कर रही है। मेरठ और पश्चिमी यूपी के करोड़ों लोगों का सवाल सीधा है—जब न्याय जनता के दरवाजे तक पहुंचना चाहिए, तो न्याय के लिए सैकड़ों किलोमीटर दूर क्यों जाना पड़े?
इलाहाबाद हाईकोर्ट का प्रधान पीठ प्रयागराज में है और लखनऊ में स्थायी बेंच कार्यरत है। वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए आज तक हाईकोर्ट की बेंच नहीं बन सकी। विभिन्न रिपोर्टों में पश्चिमी यूपी के 22 जिलों से हाईकोर्ट में आने वाले मामलों का हिस्सा 50 प्रतिशत से अधिक बताया गया है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि दिल्ली हाईकोर्ट मेरठ के बेहद नजदीक है, उत्तराखंड का हाईकोर्ट नैनीताल में है और हरियाणा का हाईकोर्ट चंडीगढ़ में—लेकिन अपने ही प्रदेश का हाईकोर्ट प्रयागराज में इतना दूर क्यों?
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनता के लिए यह सिर्फ दूरी का सवाल नहीं, बल्कि न्याय तक समान और आसान पहुंच का सवाल है।
फरवरी 2026 में राज्यसभा में केंद्र सरकार से मेरठ में हाईकोर्ट बेंच को लेकर सवाल पूछा गया। सरकार ने जवाब दिया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच के लिए केंद्र सरकार के पास फिलहाल कोई पूर्ण प्रस्ताव लंबित नहीं है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि बेंच स्थापित करने के लिए राज्य सरकार का पूरा प्रस्ताव, आवश्यक आधारभूत ढांचा, हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की भूमिका और राज्यपाल की सहमति जैसी प्रक्रियाएं जरूरी हैं।
यानी सवाल अब और बड़ा हो गया है—अगर मांग पुरानी है, जरूरत स्पष्ट है और जनता वर्षों से आवाज उठा रही है, तो उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार ठोस प्रस्ताव कब भेजेंगी?
राजुद्दीन गादरे का ऐलान
“मेरठ की जनता को न्याय के लिए दूर-दराज भटकने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। पश्चिमी उत्तर प्रदेश को उसका हाईकोर्ट बेंच का अधिकार मिलना चाहिए। अब सिर्फ आश्वासन नहीं—ठोस फैसला चाहिए।”
राजुद्दीन गादरे
राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं प्रदेश प्रभारी, उत्तर प्रदेश एवं दिल्ली प्रदेश
बहुजन मुक्ति पार्टी
हमारी मांग स्पष्ट है—
मेरठ में हाईकोर्ट बेंच स्थापित करो!
पश्चिमी उत्तर प्रदेश को न्याय का अधिकार दो!
दशकों पुरानी मांग पर अब फैसला करो!
“न्याय दूर नहीं—जनता के पास होना चाहिए।”
राजुद्दीन गादरे का हुंकार:
“हाईकोर्ट बेंच लेकर रहेंगे!”













