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चुनार में गंगा-जमुनी तहजीब की अनूठी मिसाल: दरगाह शरीफ पर कांवरियों का भव्य स्वागत, अध्यक्ष मंसूर अहमद ने किया माल्यार्पण, BMFNEWS

*चुनार में गंगा-जमुनी तहजीब की अनूठी मिसाल: दरगाह शरीफ पर कांवरियों का भव्य स्वागत, अध्यक्ष मंसूर अहमद ने किया माल्यार्पण*

 

*चुनार, मिर्जापुर | 9 अगस्त 2026, रविवार*

सावन के पवित्र महीने में आज चुनार नगर में आस्था, प्रेम और भाईचारे का ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारत की गंगा-जमुनी तहजीब आज भी जीवित है। बहरामगंज से गंगा जल लेकर काशी विश्वनाथ धाम में जलाभिषेक के लिए निकले कांवरियों का चुनार स्थित ऐतिहासिक दरगाह शरीफ के पास भव्य स्वागत किया गया।

 

*दरगाह पर फूल-माला और प्रसाद से हुआ स्वागत*

दरगाह शरीफ के अध्यक्ष हाजी मंसूर अहमद के नेतृत्व में दरगाह कमेटी के सदस्यों ने अपने निवास पर पहुंचे कांवरियों का गाजे-बाजे और “बोल बम” के जयकारों के बीच स्वागत किया। अध्यक्ष मंसूर अहमद ने सभी कांवरियों को फूल-माला पहनाकर सम्मानित किया। इसके बाद सभी श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया और उनकी सुरक्षित व मंगलमय यात्रा की कामना की गई।

 

इस दौरान पूरा क्षेत्र “हर हर महादेव” और “बोल बम” के नारों से गूंज उठा।

 

*”कांवड़ यात्रा आस्था का प्रतीक है” – मंसूर अहमद*

स्वागत के बाद मीडिया से बात करते हुए दरगाह शरीफ के अध्यक्ष मंसूर अहमद ने कहा:

_”कांवड़ यात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं है, यह आस्था, समर्पण और एकता का प्रतीक है। हम सभी की दिल से दुआ है कि बाबा विश्वनाथ आपकी यात्रा सफल करें और देश के हर नागरिक के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाएं। धर्म हमें बांटता नहीं, जोड़ता है।”_

 

*कांवरियों ने जताया आभार, बोले- “यही है असली भारत”*

दरगाह कमेटी द्वारा किए गए इस स्नेहपूर्ण स्वागत से कांवरी बेहद भावुक हो गए। कई कांवरियों ने कहा कि चुनार में हर साल उन्हें इस तरह का सम्मान मिलता है।

एक कांवरी ने कहा, _”यहां आकर लगता है कि धर्म से ऊपर इंसानियत है। चुनार में जो गंगा-जमुनी तहजीब देखने को मिलती है वो पूरे देश के लिए मिसाल है।”_

 

*गणमान्य नागरिकों ने दी उपस्थिति, दिया एकता का संदेश*

इस पुनीत अवसर पर क्षेत्र के कई गणमान्य नागरिक और युवा भी मौजूद रहे। इनमें राजकुमार सोनकर, अमरनाथ निषाद, मदन लाल, सभासद संजय गुप्ता, अख्तर अली, वकील अहमद सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल थे। सभी ने मिलकर कांवरियों की सेवा की और सामाजिक समरसता का संदेश दिया।

 

स्थानीय लोगों ने की सराहना

स्थानीय नागरिकों ने दरगाह शरीफ कमेटी के इस सराहनीय कदम की खुलकर प्रशंसा की। लोगों का कहना था कि ऐसे आयोजन नफरत की दीवारों को गिराकर मोहब्बत का पुल बनाते हैं। चुनार हमेशा से सांप्रदायिक सौहार्द के लिए जाना जाता रहा है और आज का यह आयोजन उसी परंपरा की कड़ी है।

 

धर्म से ऊपर इंसानियत।

आज चुनार में जो हुआ वो सिर्फ स्वागत नहीं था, बल्कि यह संदेश था कि जब आस्था और मोहब्बत एक साथ चलें तो कोई दीवार बाकी नहीं रहती। दरगाह शरीफ पर कांवरियों का स्वागत यह बताता है कि भारत की असली ताकत उसकी विविधता में एकता है।

 

जय बाबा विश्वनाथ। बोल बम।

Ronda Faulk
Author: Ronda Faulk

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