एटा, 11अप्रैल।विश्व हिन्दू परिषद ब्रज प्रान्त के प्रान्त सह विशेष सम्पर्क प्रमुख अरविन्द सिंह चौहान ने कहाँ कि निराश्रित गोवंशो को लेकर उ.प्र. सरकार काफी सक्रिय रहती है वही सरकार मे बैठे कुछ जिम्मेदार अधिकारी सरकार की छवि खराब करने में जुटे हुए इस और न तो माननीय मुख्यमंत्री जी का ध्यान जा रहा हैं और न ही जनपदों में निवास कर रहे जनप्रतिनिधियो का इसलिए निराश्रित गोवंशो की दुर्दशा हो रही है

ऐसे निराश्रित गोवंश जो चलने-फिरने में असमर्थ एवं अत्यंत वृद्ध गौवंश को जंगली शिकारी पक्षियों, आवारा कुत्तों तथा अन्य पशुओं से सुरक्षा प्रदान करने हेतु आश्रय स्थल परिसर में पृथक जालीदार एवं सुरक्षित विश्राम कक्ष/शेड का निर्माण कराया जाना आवश्यक है। जिससे दुर्बल गौवंश को अनावश्यक पीड़ा, संक्रमण एवं चोट से बचाया जा सकेगा।
श्री चौहान ने कहाँ कि गौवंश क्षमता अनुसार संसाधनों में वृद्धि भी की जाये किसी गोशाला की क्षमत 100 गौवंश की है, जबकि वर्तमान में उससे अधिक संख्या 200 गौवंश संरक्षित किए जा रहे हैं, तो यह भी आवश्यक है कि उस गोशाला मे केयर टेकर सेवाकर्मियों की संख्या में वृद्धि की जाए ताकि गोवंशो देखभाल अच्छे से हो सके तथा चारा, पानी, एवं स्वच्छता प्रबंधन की व्यवस्था क्षमता के अनुपात में सुदृढ़ की जाए क्षमता से अधिक गौवंश की देखभाल हेतु पर्याप्त मानव संसाधन और व्यवस्थागत सहयोग अनिवार्य है, ताकि सेवा का उद्देश्य प्रभावी रूप से पूर्ण हो सके।
श्री चौहान ने कहाँ कि “जैसे युवा स्वस्थ छात्र ‘छात्रावास’ में रहते हैं और वृद्धजनों की सेवा के लिए ‘वृद्धाश्रम’ की व्यवस्था होती है,उसी प्रकार जब पशुपालकों द्वारा उपयोगिता समाप्त होने पर गौवंश को बेसहारा सड़को पर छोड़ दिया जाता है, तो उनके लिए भी आश्रय की आवश्यकता होती है
संवेदनशील सरकार ने ऐसी व्यवस्था तो बनाई, लेकिन नीति निर्धारको द्वारा “छात्रावास ” और “वृद्धाश्रम” के मध्य के अंतर का ध्यान नहीं रखा गया, और उसका नाम ‘गौशाला’ रख दिया, जिससे एक प्रकार का भ्रम उत्पन्न होता है वास्तव में ये स्थान उन निराश्रित और वृद्ध गौवंश के लिए आश्रय स्थल हैं, परंतु नाम के कारण इन्हें सामान्य ‘गौशाला’ समझ लिया जाता है।इस भ्रम का लाभ उठाकर कुछ लोग विद्वेष की भावना से, सरकार को बदनाम करने के एजेंडे के साथ भ्रामक वीडिओ आदि के माध्यम से अनावश्यक विवाद और सनसनी फैलाते हैं, विशेषकर चुनावी माहौल में,ऐसी स्थिति में अधिक पारदर्शिता और स्पष्टता के लिए इन आश्रय स्थलों को ‘गायों का वृद्धाश्रम’ कहा जाना अधिक उपयुक्त होगा, ताकि समाज में सही संदेश पहुँचे और किसी प्रकार की गलतफहमी न फैले”
श्री चौहान ने कहाँ कि मेरा माननीय मुख्यमंत्री जी से आग्रह है कि निराश्रित गोवंशो को लेकर शासन स्तर से कडी मानीटरिंग करवाई जाये तथा जनपदों मे भी अधिकारीयो की जिम्मेदारी फिक्स की जाये क्योंकि सूत्रों द्रारा पता चला है कि ब्रज प्रान्त में कुछ जगह पर जिम्मेदारी अधिकारीयो से पदाधिकारी व कार्यकर्ता निराश्रित गोवंशो को लेकर चर्चा करते है तो वह उन्हीं को हडकाना शुरु कर देते हैं ताकि वह आवाज न उठाये तथा संगठन को छोड़कर भाग जाये ऐसे अधिकारीयो को चिन्हित करके माननीय मुख्यमंत्री जी को अवगत कराया जायेगा।अगर यही स्थिति रही तो आगामी विधानसभा चुनावों में इसका असर दिखाई देगा।







