*स्वामीबाग मुद्दे पर प्रेस वार्ता: पशु क्रूरता, अवैध कटान और भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग*
आगरा।कमला नगर स्थित होटल टैम्पटेशन में पशु एवं पर्यावरण प्रेमियों द्वारा आयोजित एक प्रेस वार्ता में स्वामीबाग एवं नगर पंचायत स्वामीबाग से जुड़े कथित भ्रष्टाचार, पशु क्रूरता, अवैध पेड़ कटान और कूड़ा निस्तारण में अनियमितताओं के मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए। वक्ताओं ने इन मामलों में निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए।
प्रेस वार्ता में डॉ. अँगशूला सरकार (सेवानिवृत्त डिप्टी रजिस्ट्रार, डॉ. भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी), विशाल सैनी (आरटीआई एक्टिविस्ट), विनीता अरोड़ा (मेंबर एसपीसीए एवं पशु प्रेमी) और किरन सेठिया (पशु प्रेमी) ने अपनी-अपनी बात रखी। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि यदि समय रहते इन मुद्दों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो यह पर्यावरण, पशु संरक्षण और जनहित के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
*पशु क्रूरता का मामला बना केंद्र बिंदु*
प्रेस वार्ता के दौरान हजूरी बाग क्षेत्र में पशु क्रूरता के मामले को विस्तार से उठाया गया। वक्ताओं ने बताया कि इस संबंध में गीता भाटिया, पशु अधिकार संगठन PETA और अन्य पशु प्रेमियों द्वारा पिछले लगभग आठ महीनों से लगातार शिकायतें की जा रही थीं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। आरोप लगाया गया कि जब शिकायत न्यू आगरा थाने तक पहुंची, तब कुत्तों को तो मुक्त करा दिया गया, लेकिन प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई, जिससे प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल खड़े होते हैं।
*अवैध पेड़ कटान और पर्यावरणीय क्षति के आरोप*
वक्ताओं ने स्वामीबाग क्षेत्र में हरे पेड़ों की कथित अवैध कटाई को लेकर भी चिंता जताई। आरोप है कि एक अनरजिस्टर्ड ट्रस्ट और नगर पंचायत द्वारा उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के विपरीत प्रस्ताव पारित किए गए। इस संबंध में शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद वन विभाग की चुप्पी को गंभीर लापरवाही बताया गया।
*कूड़ा निस्तारण परियोजना पर उठे सवालों*
नगर पंचायत द्वारा संचालित कूड़ा निस्तारण केंद्र को लेकर भी अनियमितताओं के आरोप लगाए गए। वक्ताओं का कहना था कि यह केंद्र केवल कागजों में निस्तारण केंद्र के रूप में दर्शाया गया है, जबकि वास्तविकता में यह केवल कूड़ा संग्रहण केंद्र के रूप में कार्य कर रहा है। इससे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका जताई गई।
*फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल का आरोपी*
प्रेस वार्ता में यह भी आरोप लगाया गया कि विभिन्न परियोजनाओं और कार्यों के लिए कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और उनका उपयोग किया गया। वक्ताओं ने इस पूरे मामले की फोरेंसिक जांच कराने की मांग की।
*शिकायतकर्ता ने उत्पीड़न का आरोप लगाया*
विशाल सैनी ने कहा कि जनहित के मुद्दे उठाने के कारण उन्हें मानसिक, सामाजिक और कानूनी प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि यदि कोई नागरिक सच्चाई सामने लाने के लिए आवाज उठाता है और उसे ही प्रताड़ित किया जाता है, तो यह लोकतंत्र के लिए चिंताजनक स्थिति है। प्रेस वार्ता में पंकज पाठक, विष्णु चौहान, मनोज जुरेल, अरुण सहित कई स्थानीय नागरिक और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे, जिन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग का समर्थन किया। प्रेस वार्ता के अंत में वक्ताओं ने सरकार और प्रशासन से मांग की कि पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए, सभी दस्तावेजों और साक्ष्यों की जांच हो, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और शिकायतकर्ताओं व गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
वक्ताओं ने स्पष्ट कहा कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि कानून, पर्यावरण संरक्षण और समाज के हित में लड़ी जा रही है। अब इस पूरे मामले में प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।









