*सिंचाई विभाग की लापरवाही पर डीएम सख्त, डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट 2005 के तहत चेतावनी जारी*
*सिंचाई विभाग द्वारा अलीगढ़-हाथरस में सफाई की हुई कार्यवाही* *जनपद एटा के साथ सौतेले व्यवहार पर जताई कड़ी नाराजगी*

*नदी की सफाई, तटबंधों की सुरक्षा एवं सुरक्षात्मक कार्य तत्काल कराने के निर्देश*
एटा,
जिलाधिकारी अरविन्द सिंह ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों द्वारा जनपद एटा में संभावित बाढ़ एवं जलभराव की रोकथाम के लिए अपेक्षित कार्यवाही न किए जाने पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुएअधीक्षण अभियंता एवं अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग को कड़ी चेतावनी जारी की है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि जनपद एटा के साथ किसी प्रकार का सौतेला व्यवहार या भेदभाव स्वीकार नहीं किया जाएगा तथा आपदा प्रबंधन से जुड़े मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
जिलाधिकारी ने कहा है कि सिंचाई विभाग द्वारा अलीगढ़ एवं हाथरस जनपदों में होकर आने वाली अरिंद नदी के ड्रेनेज, नदी की सफाई, खुदाई तथा सुरक्षात्मक कार्य पूर्व में कराए जा चुके हैं, जबकि उसी नदी के जनपद एटा में प्रवेश करने वाले हिस्से में आज तक आवश्यक कार्य नहीं कराया गया। इसके कारण विकास खंड निधौली कला के ग्राम दस्तमपुर लहरा,चित्तरपुर,सो रखा,बीचपुरी इत्यादि सहित आसपास के क्षेत्रों में प्रत्येक वर्ष जलभराव एवं फसलों की क्षति की स्थिति उत्पन्न होती है। यह स्थिति विभागीय उदासीनता को दर्शाती है।
जिलाधिकारी ने कहा कि जल निकासी, नदी की वैज्ञानिक ड्रेनेज व्यवस्था, तटबंधों की सुरक्षा तथा नदी की टेल-टू-टेल सफाई जैसे कार्य तकनीकी विषय हैं, जिन्हें सिंचाई विभाग द्वारा समयबद्ध रूप से कराया जाना चाहिए था। यदि समय रहते आवश्यक सुरक्षात्मक उपाय किए जाते तो किसानों को फसलों के नुकसान तथा ग्रामीण क्षेत्रों को जलभराव की समस्या का सामना नहीं करना पड़ता।
उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन अधिनियम-2005 की धाराओं 54, 55 एवं 56 के अंतर्गत सरकारी विभागों एवं अधिकारियों की जिम्मेदारी निर्धारित है। यदि किसी अधिकारी द्वारा अपने वैधानिक दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही बरती जाती है अथवा आपदा से बचाव हेतु आवश्यक कार्रवाई नहीं की जाती है, तो उसके विरुद्ध अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार दायित्व एवं दंडात्मक कार्यवाही सुनिश्चित की जा सकती है।
जिलाधिकारी ने अधीक्षण अभियंता एवं अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग को निर्देशित किया है कि जनपद एटा में अरिंद नदी के प्रभावित हिस्से का तत्काल स्थलीय निरीक्षण कराते हुए नदी की सफाई, ड्रेनेज सुधार, तटबंधों की सुरक्षा, कटानरोधी एवं अन्य आवश्यक सुरक्षात्मक कार्य युद्धस्तर पर प्रारंभ कराए जाएं। साथ ही की गई कार्रवाई से जिला प्रशासन को अवगत कराना भी सुनिश्चित करें।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि भविष्य में जनपद एटा में नदी के जलप्रवाह अथवा जल निकासी संबंधी समस्या के कारण जन-धन अथवा फसलों की क्षति होती है और यह पाया जाता है कि सिंचाई विभाग द्वारा समय पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई, तो इसके लिए संबंधित अधिकारी एवं उनके वरिष्ठ अधिकारी व्यक्तिगत रूप से उत्तर दायी होंगे तथा उनके विरुद्ध डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट 2005 के नियमानुसार कठोर दंडात्मक कार्यवाही की जाएगी।जिला सूचना कार्यालय एटा 👆









