पुण्य तिथि पर विशेष
तेरी जय हो मेरे देश’ के अमर गायकःडॉ. महावीर द्विवेदी।
बलवीर सिंह रंग और आत्म प्रकाश शुक्ला के बाद डॉ. महावीर द्विवेदी ने हिंदी काव्य मंचों पर एटा को पहचान दिलायी। शरीर से दुबले पतले किन्तु ओजस्वी स्वर के धनी डॉ.महावीर द्विवेदी का लेखन किसी परधि में बंँधकर नहीं रहा। उन्होंने जहांँ राष्ट्रीय चेतना को गाया वहीं ब्रज लोक गीतों को भी रचा। उनकी गजलें जहांँ मन को हिला देने की क्षमता रखती हैं वहीं उनका ओज रोमांच पैदा करने की सामर्थ्य रखता है।
19 जुलाई 1946 को जान्हेरा अलीगढ़ में जन्मे डॉ. महावीर द्विवेदी एटा में अविनाशी सहाय आर्य इण्टर कालेज से हिन्दी प्रवक्ता के पद से सेवानिवृत्त होकर अलीगढ़ शहर में बस गये। एटा में रहते हुए उनकी दो काव्य कृतियां तेरी जय हो मेरे देश तथा बिखरे आँसू प्रकाशित हुई। एटा को 630 पृष्ठ का मंगलम् जैसा अदभुत सुन्दर्भ ग्रंथ देकर गये। अलीगढ़ में बसने के बाद उनका गजल संग्रह सोख्ता गम का प्रकाशित हुआ। उनकी दो कृतियां संभवतः अभी भी प्रकाशन की प्रतीक्षा में है- गीतों की चुनरी बुने (गीत संग्रह) तथा स्याह कभी लाल कभी (गजल संग्रह)। वह प्रायः इन अप्रकाशित पुस्तकों का जिक्र किया करते थे।
डॉ. महावीर द्विवेदी की रचनाएंँ मूलरूप से राष्ट्रीय व सामाजिक चेतना से अनुप्राणित हैं। उन्होंने देश के गौरव की गाथा और उसकी समृद्ध परम्पराओं से प्रेरणा ली। उन्होंने गीतों को लिखा ही नहीं अपितु मंचों से गाया भी। जिन्होंने देश की बलि बेदी पर
बलिदान किया उनके यश को महावीर द्विवेदी ने गाकर अपनी कलम के दायित्व का निर्वाह किया। इस सन्दर्भ में उनकी लोकप्रिय रचना “तेरी जय हो मेरे देश” को अपार ख्याति मिली। उनकी राष्ट्रीय चेतना की रचनाओं का काव्य संग्रह भी इसी नाम से प्रकाशित हुआ। आज हम उनके प्रथम काव्य संग्रह “तेरी जय हो मेरे देश” की रचनाओं पर दृष्टि डालते हैं तो पाते हैं कि कवि अपने गीतों को भावों के अनुरूप शब्द चयन, ध्वनि विन्यास, उत्कृष्ट अभिव्यंजना आदि गुणों से अलंकृत करने में सफल हुआ है।
तेरी जय हो मेरे देश का प्रकाशन 1990 में हुआ। 112 पृष्ठ की इस काव्य कृति में 81 कविताओं का संकलन है। ये रचनाएं देश प्रेम, राष्ट्रीयता, मानवता और जीवन मूल्यों के धरातल पर बुनी गयी हैं। छन्द विधान की परिपक्वता लिए इस काव्य संग्रह में अधिकांशतः गीत हैं। द्विवेदी की रचनाओं में भावानुकूल भाषा और गेयता विद्यमान है। कुछ लम्बी रचनाएँ हैं तो मुक्तक भी हैं। उनकी रचनाओं में काव्य सौष्ठव और कथ्य की उत्कृष्टता है।
एक मुक्तक देखिए-
अब आमों की डाल-डाल पर कोयल कूक भरेगी।
तरुणाई आने वाले बैरी के गाल छरेगी।
वह जिनके सुहाग बलि होकर स्वतंत्रता ले आए,
उनकी अमर कथा धरती से अंबर तक बिचरेगी।
उनके गीतों में देश प्रेम देश का स्वाभिमान कूट – कूटकर भरा है। संकट के समय गीतों में भारत की जवानी का आह्वान करते हैं-
जागो देश की जवानी माँ का मान न घटे।
छेडो पौरुष की कहानी अपनी शान न घटे।
श्रमिकों और किसानों पर भी द्विवेदी की कलम खूब चली है।
श्रमिक तू मानव की आशा,
रही जीवन की अभिलाषा।
दर्द में डूबे तेरे गीत,
सभी परती पर तेरे मीत।
किया करता तू जब निर्माण।
प्रगति लेता तू देकर प्राण।
उनका देश के यश वैभव पर लिखा हुआ गीत बहुत चर्चित व लोकप्रिय हुआ –
जय हो मेरे देश तेरी….,
षड़ऋतुओं से सजा हुआ माँ तेरा परिवेश।
सामाजिक विसंगतियों को प्रतीकों के माध्यम से डॉ. महावीर द्विवेदी अपनी कविता में यूँ व्यक्त करते हैं-
अपराधिन कह बोल रहे, उजले आंचल मैली चूनर को।
अंधकार ने ध्वस्त कर दिया, बेचारी पूनम के घर को।
कवि ने युगीन यथार्थ को बहुत बारीकी से देखा है।एक गीत में इसकी बानगी दृष्टव्य है। वह कहते हैं-
जो हैं ऐसे लोग न कहकर कोई बात निभायें,
प्राण बने रह जाएं, भले ही वचन भाड़ में जाएँ।
जिन के चारों ओर बहा करती है गर्म हवाएंँ,
नई उमर की नई फसल पर अंगारे बरसाएंँ।
भावों अनुरूप शब्द चयन, ध्वनि काव्य गुणों से अलंकृत काव्यकृति तेरी जय हो मेरे देश। वर्तमान समय की तीव्र आवश्यकता की पूर्ति करता है। गीतकार डॉ. द्विवेदी की पुण्य स्मृति को उनके गीत अमरता प्रदान करते हैं। हमें गर्व है ऐसे रचनकार पर जिसने एटा को अपनी कर्म भूमि बनाया और साहित्य जगत में एटा का नाम रौशन किया। उनकी पुण्य स्मृतियों को कोटिशः नमन।









