आगरा के सुभाष बाजार नाले में दोमंजिला दुकान के साथ समाई गंगा देवी का शव छठवें दिन बरामद, रिपोर्ट शंकर देव तिवारी

*आगरा के सुभाष बाजार नाले में दोमंजिला दुकान के साथ समाई गंगा देवी का शव छठवें दिन बरामद*

 

*बिजलीघर चौराहे के पास स्लैब तोड़कर चलाए गए सर्च ऑपरेशन के बाद मिली महिला की लाश*

 

आगरा । सुभाष बाजार में छह दिन पहले हुए इस दर्दनाक हादसे ने पूरे शहर को झकझोर दिया था। बाजार क्षेत्र में नाले के ऊपर बनी कपड़ों की दो मंजिला दुकान अचानक भरभराकर नीचे भूमिगत नाले में समा गई थी। हादसे के समय दुकान के अंदर दुकानदार, कर्मचारी और खरीदारी कर रहे ग्राहक मौजूद थे। देखते ही देखते सभी लोग मलबे और नाले में जा गिरे। घटना के तुरंत बाद पुलिस, फायर ब्रिगेड, एसडीआरएफ, पीएसी और नगर निगम की टीमें मौके पर पहुंचीं और युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। शुरुआती रेस्क्यू के दौरान चार लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, लेकिन 60 वर्षीय गंगा देवी का कोई पता नहीं चल सका। इसके बाद प्रशासन ने लगातार तलाशी अभियान जारी रखा। गंगा देवी की तलाश के लिए पहले दिन से ही नाले के भीतर और आसपास व्यापक स्तर पर खोजबीन की गई। करीब 40 गोताखोरों को भी नाले में उतारा गया। इस आशंका को देखते हुए कि कहीं तेज बहाव के कारण शव यमुना नदी तक न पहुंच गया हो, तलाशी अभियान का दायरा बढ़ाते हुए बटेश्वर तक सर्च ऑपरेशन चलाया गया, लेकिन कई दिनों तक कोई सफलता नहीं मिली। जब लगातार प्रयासों के बावजूद महिला का पता नहीं चला तो प्रशासन ने रणनीति बदलते हुए बिजलीघर चौराहा स्थित आंबेडकर पार्क के पास भूमिगत नाले की स्लैब तोड़ने का निर्णय लिया। शनिवार को स्लैब तोड़ी गई और रविवार को पूरे दिन विशेष तलाशी अभियान चलाया गया। सोमवार दोपहर इसी स्थान के पास नाले में जमा कीचड़ के भीतर से गंगा देवी का शव बरामद कर लिया गया। शव मिलने की सूचना मिलते ही मौके पर मौजूद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। पिछले छह दिनों से परिवार के सदस्य हर रोज नाले के किनारे और तलाशी अभियान वाले स्थानों पर मौजूद रहे। उन्हें उम्मीद थी कि शायद गंगा देवी जीवित मिल जाएं, लेकिन अंततः उनका शव मिलने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। हादसे के बाद स्थानीय लोगों और व्यापारियों में नगर निगम के खिलाफ भारी आक्रोश भी देखने को मिला था। व्यापारियों का आरोप था कि भूमिगत नाले और जर्जर संरचनाओं की स्थिति को लेकर पहले भी कई बार शिकायत की गई थी, लेकिन समय रहते कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। उनका कहना था कि यदि नाले और पुरानी दुकानों की समय पर जांच और मरम्मत कराई जाती तो इतना बड़ा हादसा टाला जा सकता था। गंगा देवी के लापता रहने के दौरान बाजार क्षेत्र में तनाव की स्थिति भी बनी रही। महिला के परिजनों और स्थानीय महिलाओं ने बाजार खोलने का विरोध करते हुए प्रदर्शन किया था। उन्होंने प्रशासन और नगर निगम के खिलाफ नारेबाजी की और मांग की थी कि जब तक गंगा देवी का पता नहीं चल जाता, तब तक बाजार नहीं खोला जाए। इसके बाद तीन दिन तक बाजार बंद रहा था। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को अतिरिक्त बल तैनात करना पड़ा था।

अब गंगा देवी का शव मिलने के साथ छह दिनों से चल रहा राहत एवं बचाव अभियान समाप्त हो गया है। हालांकि यह हादसा शहर में भूमिगत नालों, जर्जर भवनों और बाजार क्षेत्रों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल छोड़ गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जिम्मेदार विभागों को ठोस और स्थायी कदम उठाने होंगे।

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