WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.49 P
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.49 PM
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.48 PM
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.51 P
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.51 PM
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.50
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.50 PM

प्रभात किरन जी अपने मन के कवि थे. उनकी कविता किसी को भी खरी खरी सुनाने की सामर्थ्य रखती थी. आलेख बलराम सरस

कर रहा ऐलान भ्रष्टाचार, कोई रोक ले।

 

एटा,बस इतना पता है कि एटा के मूरधन्य, चर्चित एवं लोकप्रिय कवि स्मृति शेष प्रभात किरन जी का जन्म जुलाई माह में हुआ था. इस अवसर पर उन्हें शत शत नमन करता हूँ।

प्रभात किरन जी अपने मन के कवि थे. उनकी कविता किसी को भी खरी खरी सुनाने की सामर्थ्य रखती थी. कहीं भी कोई भी उनसे कविता सुन लेता था शर्त बस इतनी कि चाय पिलानी पड़ेगी.

बहुत देर में ही सही लेकिन उनका मुझे प्यार मिला. हर रविवार को साइकिल से मेरे घर आना नहीं भूलते थे चूँकि मेरी पत्नी उन्हें ससुर का दर्जा देतीं थीं और उनकी पसंद का नाश्ता बनाकर खिलाती थीं।

किरन जी की आदत में था जिस पर अपनी भड़ास निकालते बस कविता से निकालते. एटा नगर पर लिखी उनकी कविता बार बार आग्रह पूर्वक सुनी जाती.

एटा नगर हमारा, सारे जहाँ से न्यारा.

अक्सर यहाँ पै अफसर आता है डरते डरते

जाने का नाम लेकिन लेता नहीं बिचारा।

कवि महेश पंडित और किरन जी में रत्ती भर नहीं पटती थी लेकिन एक दूसरे का साथ भी नहीं छोड़ते थे. एक बार उनके घर पर काव्य गोष्ठी का आयोजन था. महेश पंडित मुझे भी लेकर गए. ये मेरी शुरुआत के दिन थे. किरन जी ने उस दिन मुझे पहलीबार सुना था. किरन जी ही गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे थे. अपने अध्यक्षीय काव्यपाठ में तीन कविताएँ सुनाईं. एक कविता का निशाना मैं दूसरे का महेश पंडित और तीसरे का निशाना भ्रष्टाचार –

मैं चूँकि उनकी दृष्टि में शूद्र था इसलिए पढा-

पद रज सर चढ जाइ तौ अचरज मत करियो।

महेश पंडित के लिए कहा-

क्या मजा आता है विष बीज बोने में तुझे।

औरों की लूटने में अपनी खोने में तुझे।

तीसरी कविता वो थी जो आज भी प्रासांगिक है-

कर रहा ऐलान भ्रष्टाचार कोई रोक ले।

तू या तेरी सरकार कोई रोक ले।

किरन जी की स्मृतियों पुनः नमन।

Leave a Comment