*पार्ट- 1*
*व्यवस्था के विरुद्ध संघर्ष:* *न्याय और सत्य के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले नायकों के नाम से जिला का नामकरण एवं विद्यालय विश्वविद्यालय का संचालन करने की जोरदार मांग।*
एके बिंदुसार
संस्थापक भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी नई दिल्ली।
भारत के स्वतंत्रता-प्राप्ति के उपरांत कई ऐसे क्रांतिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता और निर्भीक पत्रकार हुए हैं जिन्होंने सरकारी भ्रष्ट सिस्टम, सामंती शोषण और प्रशासनिक लापरवाही के विरुद्ध आवाज़ बुलंद की और अंततः अपने प्राणों की आहुति दी।
1. वैचारिक, सामाजिक और राजनीतिक न्याय के प्रहरी
ये वे व्यक्तित्व थे जिन्होंने सामाजिक संरचना में व्याप्त भ्रष्टाचार और शोषण को जड़ से उखाड़ने के लिए जन-आंदोलनों का नेतृत्व किया:
*बाबू जगदेव प्रसाद कुशवाहा (‘बिहार के लेनिन’):* इन्होंने ‘शोषित समाज दल’ के माध्यम से सामंती व्यवस्था और सरकारी भ्रष्टाचार के विरुद्ध मोर्चा खोला था। 5 सितंबर 1974 को एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए, उन्हें पुलिस की गोलियों का शिकार बनाकर शहीद कर दिया गया।
*महान क्रांतिकारी भरत भूषण तिवारी ( बिहार):* सामाजिक न्याय और व्यवस्था-परिवर्तन के पुरोधा। उन्होंने छात्र जीवन से लेकर राष्ट्रीय राजनीति एवं, सत्ता के गलियारों में हो रहे भ्रष्टाचार और आम आदमी के शोषण के खिलाफ निडर होकर संघर्ष किया। उनका संकल्प दबे-कुचले लोगों के अधिकारों के लिए समर्पित रहा 2026 में उनकी भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ लड़ते-लड़ते पुलिस द्वारा फर्जी एनकाउंटर के माध्यम से बिहार में हत्या कर दी गई।
*नरेंद्र दाभोलकर:* महाराष्ट्र में अंधश्रद्धा और शोषणकारी सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध निरंतर कार्यरत रहे, जिनकी 2013 में हत्या कर दी गई।
*गोविंद पानसरे:* अनुभवी वकील और सामाजिक कार्यकर्ता, जिन्होंने टोल टैक्स भ्रष्टाचार और सामाजिक अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाई थी।
2. पत्रकारिता के धर्म के लिए शहीद हुए पत्रकार
इन पत्रकारों ने सत्ता के गलियारों और स्थानीय माफियाओं के भ्रष्टाचार को उजागर किया, जिसके बदले उन्हें अपने जीवन का बलिदान देना पड़ा:
*चंद्रिका सिंह (बिहार):* प्रशासनिक भ्रष्टाचार और अपराधी-नेता गठजोड़ को उजागर करने के कारण इनकी हत्या हुई।
*राजदेव रंजन (बिहार):* सीवान में माफियाओं और भ्रष्टाचार के खिलाफ साहसी रिपोर्टिंग करने के कारण इन्हें प्राण गंवाने पड़े।
*गौरी लंकेश (कर्नाटक):* सांप्रदायिकता और सत्ता के दुरुपयोग के खिलाफ मुखर रहने वाली पत्रकार, जिनकी 2017 में हत्या कर दी गई।
*सुदीप दत्ता भौमिक (त्रिपुरा):* पुलिस और अधिकारियों में व्याप्त भ्रष्टाचार की पोल खोलने के कारण शहीद हुए।
*जमीउद्दीन (बिहार):* सरकारी योजनाओं में हो रहे भ्रष्टाचार को जनता के सामने लाने के कारण इनकी हत्या कर दी गई।
*(उल्लेखनीय है कि देश के ग्रामीण अंचलों में ऐसे कई अन्य पत्रकार हैं, जिनकी हत्याओं को अक्सर दबा दिया जाता है, जबकि उनका एकमात्र दोष सत्ता से सवाल पूछना था।)*
3. प्रशासनिक और जन-सुरक्षा के व्हिसलब्लोअर्स (Whistleblowers)
ये वे अधिकारी और नागरिक थे जिन्होंने अपने पद और अपनी जान की परवाह किए बिना सरकारी सिस्टम की खामियों को सार्वजनिक किया:
*सत्येंद्र दुबे (भारतीय इंजीनियरिंग सेवा):* स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना में भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करने के कारण 2003 में इनकी हत्या कर दी गई।
*मंजूनाथ शनमुगम (इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन):* पेट्रोल पंपों पर मिलावट के रैकेट को रोकने का प्रयास करते हुए 2005 में इनकी जान ली गई।
*स्थानीय RTI कार्यकर्ता:* देश भर में ऐसे दर्जनों अज्ञात RTI कार्यकर्ता हैं जिन्होंने मनरेगा, अवैध खनन और स्थानीय प्रशासन के भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ाई लड़ते हुए शहादत दी।
मित्रों इनके अलावा भी कई ऐसे आजादी के बाद के क्रांतिकारी है जिन्होंने सिस्टम में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई उनकी हत्या कर दी गई या फिर उन्हें फर्जी मुकदमे में फंसा कर जेल भेज दिया गया।
इन हत्याओं के पीछे सिर्फ जनता का सहयोग और साथ न मिलने का मुख्य कारण रहा है।
जिसका नतीजा है कि आज भी देश की 80% आवाम अपने हक अधिकार सम्मान सुरक्षा के लिए दर-दर की ठोकरे खा रही है।
इसलिए हमें जाति एवं धर्म से ऊपर उठकर के एक सच्चा भारतीय राष्ट्रभक्त बनकर हमें आजादी के बाद के इन महान क्रांतिकारी का साथ देना होगा और शहीद हुए उन महान क्रांतिकारियों के विचारों को आगे बढ़ना होगा तभी भ्रष्टाचार मुक्त भारत का सपना साकार हो सकता है।
*आइए मित्रों हम एक बार फिर से बन जाए सच्चे भारती*









