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हर युग की साधना, हर युग की आयु सीमा अलग-अलग थी। सतयुग में मानव की आयु सीमा एक लाख वर्ष की थी

रिपोर्ट: एके बिन्दुसार (प्रधान संपादक)

कोतवाली/सिटी (मीरजापुर) 28 अक्टू.। ‘‘धर्म जल्दी से लो अब धार, जमाना बदलेगा।’’ कहैं जयगुरुदेव पुकार जमाना बदलेगा।’’ युग महापुरुश परम सन्त बाबा जयगुरुदेव जी महाराज की सन् 1970 के दषक में कही हुई भविश्यवाणियों को तथा आने वाले खराब समय से बचने-बचाने की युक्ति बताते हुये जयगुरुदेव धर्म प्रचारक संस्था, मथुरा के राश्ट्रीय अध्यक्ष संत पंकज जी महाराज अपने काफिले के साथ सत्संग भ्रमण करते हुये कल 69वें पड़ाव ग्राम खजुरी पधारे। स्थानीय भाई-बहनों ने काफिले का अति उत्साहपूर्ण स्वागत किया। अपने सत्संग सम्बोधन में महाराज जी ने कहा कि पे्रमी भाई-बहनों! हर युग की साधना, हर युग की आयु सीमा अलग-अलग थी। सतयुग में मानव की आयु सीमा एक लाख वर्ष की थी और प्रत्येक मानव विज्ञानी, योगी, साधक हुआ करते थे। ‘‘सतयुग योगी सब विज्ञानी करि हरि ध्यान तरहिं भव प्रानी।’’ त्रेता युग आया, आयु सीमा घटकर 10,000 वर्ष हो गई और साधना ‘‘त्रेता विविध यज्ञ नर करहीं, हरिहिं समर्पि सकल भवतरहीं।’’ यानि यज्ञ का विधान आ गया। द्वापर आया, आयु सीमा घटकर 1,000 वर्ष हो गई। द्वापर करि रघुपति पदपूजा, नर भवतरहिं उपाय न दूजा। मूर्ति पूजा का आधार द्वापर युग में था, लेकिन यह कलयुग है। कलयुग में सन्तों महात्माओं ने पूर्व के विधान को निशेध कर दिया और बताया कि ‘‘कलयुग योग यज्ञ न ज्ञाना, एक अधार नाम गुन गाना।’’ क्योंकि कलयुग में मानव की आयु घट कर मात्र 100 वर्ष की हो गई और प्राण अन्न पर निर्भर हो गया। पूर्व की साधनाओं को करने की क्षमता अब मानव तन में नहीं रह गई, तो उन्होंने सरल साधना (शब्द योग मार्ग) को जारी किया। ‘‘सतयुग, त्रेता, द्वापर बीता, काहू न जानी शब्द की रीता। कलयुग में स्वामी दया विचारी प्रगट करके शब्द पुकारी।’’ सृश्टि की सारी रचना शब्द पर निर्भर है। हर घट में 24 घण्टे शब्द की धुनकार आती रहती है। जिसकी युक्ति जागृत गुरु यानि सन्त महात्मा ही बताते हैं। कलयुग केवल नाम अधारा, सुमिरि-सुमिरि नर उतरहिं पारा। इसलिये आप लोग जीवन के बचे हुये समय में नाम की कमाई कर लो और अपनी आत्मा को नर्कों-दोजखों में जाने से बचा लें। हमारा लक्ष्य यही है। महाराज जी ने नामदान देकर सुमिरन, ध्यान, भजन की विधि को विस्तार से समझाया और इसे नित्य करने की अपील की।
महाराज जी ने कहा ‘‘षाकाहार है सुखद आहार, शुद्ध खून करता संचार। आप किसी जीव को मार कर उसका मुर्दा मांस पेट में डालकर पेट को कब्रिस्तान न बनायें नही ंतो कुदरत सख्त सजा देगी। हमारे गुरु महाराज ने 1970 में ही कह रखा है कि खोटे-बुरे कर्मों के कारण ‘‘परजा बहुत मरेगी जग में, लाषें पड़ी सड़ेंगी घर-घर में। उठाने वाले मिलेंगे न कोई जमाना बदलेगा।’’ अब भी वक्त है, खानपान सुधार लें। शराब जैसे नषीले पदार्थों के सेवन से दूर रहें। तभी संभाल सम्भव है।
इस अवसर पर जिलाध्यक्ष घूरन प्रसाद, संगठन मंत्री व प्रवक्ता मोती लाल सिंह, जयेन्द्र प्रताप सिंह, संतोश सिंह, मनीश सोनी, महँगू, संतोश प्रजापति, अलगू बिन्द, नन्दलाल, जगदीष बिन्द एवं सहयोगी संगत गोरखपुर के जयराम, रामदवन, षंखधारी, विक्रमादित्य, जयराम पटेल आदि मौजूद रहे। आयोजन में ग्राम प्रधान खजुरी जितेन्द्र प्रजापति एवं धनन्जय तिवारी (बबलू) का विषेश सहयोग रहा।
सत्संग कार्यक्रम के बाद जनजागरण यात्रा अपने 70वें पड़ाव सिविल लाइन पोखरा के पास का मैदान ग्राम विशुंदरपुर ब्लाक सिटी के लिये प्रस्थान कर गई। यहां (आज)29अक्टूबर प्रातः 11 बजे से सत्संग कार्यक्रम आयोजित है।

Shakeer Akhtar
Author: Shakeer Akhtar

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