रिपोर्ट: अमित अग्रवाल
ग्रामीणों ने सरकारी जमीन पर कब्जे की कोशिश का लगाया आरोप, विशाल मंडल बोले- कागजात जमा हैं, प्रशासन के आदेश के बाद ही होगा आगे का काम।
सदर प्रखंड के पचंबा क्षेत्र अंतर्गत मौजा अन्दुडीह में खाता संख्या 163, प्लॉट संख्या 179 की करीब 1.65 एकड़ जमीन को लेकर विवाद सामने आया है। जमीन को सरकारी गैर-मजरूआ बताते हुए स्थानीय ग्रामीणों ने कब्जे की कोशिश का आरोप लगाया है। वहीं, विशाल मंडल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनके पास जमीन से संबंधित रैयत से हासिल आवश्यक दस्तावेज मौजूद हैं और वे जांच के लिए अंचल में दिया गया है।
ग्रामीणों ने पचम्बा थाना में आवेदन देकर आरोप लगाया है कि उक्त जमीन पर चारदीवारी कराने की कोशिश की गई। ग्रामीणों के अनुसार, राजस्व अभिलेखों में जमीन सरकारी गैर-मजरूआ एवं दौड़-परती दर्ज है। उनका कहना है कि इस भूमि का इस्तेमाल लंबे समय से खेल मैदान, हाट मैदान, सामुदायिक गतिविधियों और आवागमन के लिए होता रहा है। ग्रामीणों ने मामले की जांच कराने और जमीन की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। विरोध के दौरान धमकी दिए जाने का आरोप भी लगाया गया है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
विशाल मंडल ने आरोपों को बताया बेबुनियाद।
दूसरी ओर आज प्रेस कॉन्फ्रेंस में विशाल मंडल ने ग्रामीणों के आरोपों को बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि जमीन पर जबरन कोई काम नहीं किया जा रहा है और पूरी प्रक्रिया कागजात के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है। उन्होंने दावा किया कि इस मामले के पीछे चार लोग हैं, जो उनकी छवि धूमिल करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
विशाल मंडल ने पार्क के शिलान्यास से जुड़े मामले का जिक्र करते हुए कहा कि माननीय हाईकोर्ट ने शिलान्यास को रद्द कर दिया था। उन्होंने बताया कि फिलहाल अंचल अधिकारी के निर्देश पर जमीन पर काम रोक दिया गया है। उनके अनुसार, जमीन से संबंधित दस्तावेज जमा कर दिए गए हैं और प्रशासन का आदेश आने के बाद ही आगे का काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जांच में जो भी निर्णय आएगा, उसे स्वीकार करेंगे।
प्रशासनिक जांच से स्पष्ट होगी स्थिति।
ग्रामीणों ने उपायुक्त और संबंधित अधिकारियों से खतियान, रजिस्टर-II, जमाबंदी तथा जमीन से जुड़े अन्य राजस्व अभिलेखों की जांच कराने की मांग की है। दूसरी ओर, विशाल मंडल ने अपने पास जमीन से संबंधित दस्तावेज होने की बात कही है।
फिलहाल, जमीन के स्वामित्व और उसके राजस्व स्वरूप को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं। ऐसे में संबंधित दस्तावेजों, राजस्व अभिलेखों और हाईकोर्ट के आदेश की जांच महत्वपूर्ण है। प्रशासनिक जांच के बाद ही जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
















