रीति-रिवाज से तेरहवीं की और इसके अगले दिन ही बेटे को आंखों के सामने खड़ा पाया, रिपोर्ट सुनील गुप्ता

गाजियाबाद जेल से रिहा होने के बाद जिस जिगर के टुकड़े बेटे गिरधर की तलाश में मां तड़पती रही। कई दिनों की तलाश में बेटे का सड़ी-गली अवस्था में नहर से शव बरामद हुआ तो करुणा दहाड़े मारकर रोने लगी।

 

मां ने बेटे का अंतिम संस्कार किया और एक-एक दिन बेटे की आत्मा की शांति के लिए सभी कर्मकांड किए। शव मिलने के ठीक 13 दिन बाद मां ने बेटे की मोक्ष के लिए रीति-रिवाज से तेरहवीं की और इसके अगले दिन ही बेटे को आंखों के सामने खड़ा पाया तो गम के आंसु खुशी में बदल गए। यह कोई फिल्मी स्टोरी नहीं बल्कि हकीकत है।

 

दरअसल, जिसकी मौत हुई थी और जिसकी शिनाख्त मां व बहनों ने की थी वह गिरधर था ही नहीं। वह कोई और था। मां ने बेटे की हत्या का आरोप लगाते हुए शव को दो बार पाेस्टमार्टम भी कराया, पड़ोस में रहने वाले सात लोगों पर एफआइआर भी दर्ज करा दी। गिरधर के वापस लौटने के बाद पुलिस भी हैरान है।

 

दरअसल, जिसकी मौत हुई थी और जिसकी शिनाख्त मां व बहनों ने की थी वह गिरधर था ही नहीं। वह कोई और था। मां ने बेटे की हत्या का आरोप लगाते हुए शव को दो बार पाेस्टमार्टम भी कराया, पड़ोस में रहने वाले सात लोगों पर एफआइआर भी दर्ज करा दी। गिरधर के वापस लौटने के बाद पुलिस भी हैरान है।

 

बता दें कि वैशाली सेक्टर-5 की कल्पना सोसायटी में देवकी देवी अपने 40 साल के बेटे गिरधर सिंह बिष्ट के साथ रहती हैं। गिरधर को मानसिक रूप से कमजोर बताया जाता है। 16 मई को गिरधर का पड़ोस में रहने वाले आटोमोबाइल कारोबारी तीन भाइयों शैलेश, धर्मेंद्र व सुनील से विवाद हो गया था। इस दौरान गिरधर ने शैलेश के सिर पर हथौड़े से वारकर घायल कर दिया था।

 

इसके बाद तीनों भाइयों ने गिरधर की पिटाई कर दी थी। 17 मई को कौशांबी पुलिस ने गिरधर को शांतिभंग की धाराओं में गिरफ्तार किया था और एसीपी शालीमार गार्डन की कोर्ट ने उन्हें 151 में जेल भेज दिया था।

 

परिजनों ने पुलिस पर बिना जानकारी दिए और मानसिक रूप से बीमार होने का हवाला देते हुए पुलिस पर जेल भेजने का आरोप लगाया था। एसीपी कोर्ट ने 21 मई को गिरधर को निजी मुचलके पर जेल से रिहा कर दिया लेकिन, वह घर नहीं पहुंचा।

 

इसके बाद मां बेटे से जेल में मिलने पहुंची तो रिहाई का पता चला। इसके बाद मां ने गुमशुदगी दर्ज कराई थी। इस बीच 12 जून को मसूरी क्षेत्र में नाहल झाल में एक लावारिस युवक का शव मिला। शव पुराना होने के कारण बुरी तरह से गल चुका था।

 

परिजनों ने उसकी पहचान गिरधर के रूप में करते हुए उसकी हत्या का आरोप लगाया। मां का आरोप था कि गिरधर की मौत पिटाई के कारण हुई है लेकिन, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डूबने से मौत की पुष्टि हुई। पिटाई के निशान शरीर पर नहीं पाए गए।

 

परिजनों के हंगामा और मां की मांग पर पुलिस ने शव को पैनल के जरिये दोबारा पोस्टमार्टम कराया। इस बार विसरा सुरक्षित रख लिया गया। परिजन व लोगों ने पुलिस और जेल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन भी किया।

 

इसके बाद परिजन की तहरीर पर पुलिस ने मसूरी थाने में सात लोगों के खिलाफ हत्या की धाराओं में रिपोर्ट भी दर्ज की। अब गिरधर बिष्ट के अचानक वापस लौटने पर अचानक मामले में नाटकीय मोड़ आ गया है।

 

पुलिस ने गिरधर से पूछताछ की तो उसने बताया कि वह जेल से छूटकर अपने किसी जानकार से पैसे उधार लेकर पंजाब में डेरा सच्चा सौदा आश्रम चला गया था और तब से वहां रह रहा था।

 

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