WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.49 P
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.49 PM
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.48 PM
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.51 P
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.51 PM
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.50
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.50 PM

बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि उसने 3-वर्षीय और 5-वर्षीय लॉ प्रोग्राम में दाखिले के लिए अधिकतम आयु सीमा को हटा दिया, रिपोर्ट निशा कांत शर्मा एडवोकेट

बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि उसने 3-वर्षीय और 5-वर्षीय लॉ प्रोग्राम में दाखिले के लिए अधिकतम आयु सीमा को हटा दिया।

Oplus_131072

 

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच को BCI की ओर से वकील राधिका गौतम ने इस बदलाव के बारे में जानकारी दी। यह जानकारी ऋषभ दुग्गल की याचिका पर सुनवाई के दौरान दी गई।

 

ऋषभ ने 2016 के उस सर्कुलर को रद्द करने की मांग की, जिसके जरिए BCI ने ‘लीगल एजुकेशन रूल्स, 2008’ के नियम 11 की अनुसूची III में ‘क्लॉज 28’ को फिर से लागू किया था (जिसे 2013 में हटा दिया गया था)। इस क्लॉज के तहत इंटीग्रेटेड बैचलर ऑफ लॉ डिग्री प्रोग्राम में दाखिले के लिए अधिकतम आयु सीमा 20 वर्ष तय की गई।

 

इस बदलाव को देखते हुए मामले को निष्फल (Infructuous) मानकर समाप्त कर दिया गया।

 

याचिकाकर्ता की ओर से वकील जोहेब हुसैन ने कोर्ट से अनुरोध किया कि BCI के प्रस्ताव की आखिरी कुछ पंक्तियों को आदेश में दर्ज किया जाए (जिसमें कहा गया कि BCI जनरल काउंसिल का यह फैसला “सोचा-समझा और अंतिम” है)। उन्होंने याद दिलाया कि पहले भी BCI ने इस प्रावधान को हटाया और फिर से लागू कर दिया। इसके जवाब में वकील राधिका गौतम ने बताया कि BCI का यह प्रस्ताव (जो कोर्ट में सौंपा गया है) कल ही पारित हुआ है, वरना वह इसे पहले ही दाखिल कर देतीं।

 

अंततः, BCI के प्रस्ताव को देखते हुए बेंच ने मामले को बंद कर दिया।

 

गौरतलब है कि BCI के प्रस्ताव के अनुसार, दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस राजेंद्र मेनन (जो लीगल एजुकेशन कमिटी के सह-अध्यक्ष हैं) के तर्कपूर्ण आदेश और लीगल एजुकेशन की स्थायी समिति (Standing Committee) के प्रस्ताव के बाद इस आयु सीमा को हटाया गया। जनरल काउंसिल ने सुप्रीम कोर्ट के अगस्त 2026 के उस आदेश पर भी ध्यान दिया, जिसमें BCI के वकील से इस विवादित सर्कुलर को हटाने के संबंध में निर्देश लेने को कहा गया।

 

स्वतंत्र रूप से विचार करने के बाद जनरल काउंसिल इस बात पर सहमत हुई कि अधिकतम आयु सीमा तय करने का कोई ठोस शैक्षणिक आधार नहीं है।

 

आगे कहा गया,

 

“काउंसिल का मानना है कि शैक्षिक योग्यता, उपस्थिति, शिक्षण के घंटे, परीक्षाओं और व्यावसायिक प्रशिक्षण से जुड़ी मौजूदा शर्तें कानूनी शिक्षा के मानकों को पूरी तरह सुरक्षित रखती हैं। साथ ही, ये शर्तें किसी योग्य उम्मीदवार को केवल उसकी उम्र के आधार पर बाहर नहीं करती हैं।”

 

संक्षेप में कहें तो, याचिकाकर्ता का तर्क था कि यह प्रावधान कानून की पढ़ाई करने के इच्छुक छात्रों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है, जो संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(g) और 21 के तहत दिए गए।

 

याचिका में बताया गया कि 1993 में भी BCI ने कुछ ऐसा ही कदम उठाया था। तब उन्होंने BCI नियमों के भाग VI के अध्याय III में ‘नियम 9’ जोड़ा था, जिसके तहत 45 साल से अधिक उम्र के लोगों को ‘एडवोकेट्स एक्ट, 1961’ के अंतर्गत वकील के रूप में पंजीकरण कराने से रोक दिया गया। इस ‘नियम 9’ को ‘इंडियन काउंसिल ऑफ लीगल एड एंड एडवाइस बनाम BCI’ मामले में सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी, जिसके बाद कोर्ट ने इसे रद्द कर दिया।

 

याचिका में यह तर्क दिया गया,

 

“लॉ कोर्स में एडमिशन को अनुचित तरीके से सीमित करने वाला यह नया नियम, छात्रों के अधिकारों पर एक बहुत ही कठोर और अनुचित पाबंदी है। यह उस सिद्धांत और फैसले के खिलाफ है, जो इस माननीय न्यायालय ने ‘इंडियन काउंसिल ऑफ लीगल एड एंड एडवाइस’ मामले में तय किया था।”

 

इसके अलावा, यह भी बताया गया कि इस प्रावधान की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अलग-अलग हाई कोर्टों के अलग-अलग फैसले आए। ऐसे में छात्रों के भविष्य में स्पष्टता लाने और BCI के कामकाज में एकरूपता बनाए रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दखल देना बहुत जरूरी हो गया। [पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट और बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस प्रावधान को ‘एडवोकेट्स एक्ट’ के नियमों के खिलाफ (अल्ट्रा वायर्स) माना था, जबकि मद्रास हाईकोर्ट ने उम्र सीमा को सही ठहराया था।]

 

Case Title : Rishabh Duggal v. Bar Council of India through its Chairman

Leave a Comment