*दीपावली पर उजड़ गया गरीब विधवा गंगा देवी का संसार, आग ने छीन लिया सिर छिपाने का आखिरी सहारा*
*पति की मौत के बाद मजदूरी कर पाल रही थीं पेट, त्योहार से एक दिन पहले झोपड़ी समेत पूरी गृहस्थी जलकर राख; अब दो वक्त की रोटी और सिर छिपाने का संकट*
मिरहची (एटा)।किसी के घर दीपावली पर दीप जल रहे हैं, तो किसी की जिंदगी में अंधेरा छा गया है। थाना मिरहची क्षेत्र के गांव पिथनपुर में गरीब विधवा गंगा देवी के लिए दीपावली खुशियों का नहीं, बल्कि जिंदगी का सबसे दर्दनाक दिन बन गई। त्योहार से ठीक एक दिन पहले आग ने उनका आशियाना उजाड़ दिया। देखते ही देखते उनकी झोपड़ी जलकर राख हो गई। उसमें रखा अनाज, खाने-पीने का सामान और पूरी गृहस्थी आग की भेंट चढ़ गई।
गंगा देवी के पति राजू की पहले ही मृत्यु हो चुकी है। पति के जाने के बाद जिंदगी का बोझ अकेले उठाते हुए वह मजदूरी करके किसी तरह अपना पेट पाल रही थीं। गरीबी इतनी कि मुश्किल से दो वक्त की रोटी का इंतजाम हो पाता था। इसी झोपड़ी में उनकी छोटी-सी दुनिया बसती थी, लेकिन आग ने वह दुनिया भी छीन ली।
जिस घर में दीपावली पर दीप जलाने की तैयारी होनी चाहिए थी, वहां अब राख का ढेर और बेबसी का मंजर है। न सिर छिपाने के लिए छत बची, न खाने के लिए अनाज और न ही गृहस्थी का सामान। त्योहार की खुशियां उनके लिए आंसुओं और लाचारी में बदल गईं। दूसरों के घर रोशन होते देख गंगा देवी के सामने अपना उजड़ा आशियाना और भविष्य का अंधेरा खड़ा है।
*प्रशासन से मदद की आस, कब पहुंचेगा राहत का हाथ?*
बेबस गंगा देवी ने प्रशासन से मार्मिक गुहार लगाई है कि उनकी दयनीय आर्थिक स्थिति को देखते हुए तत्काल आर्थिक सहायता दिलाई जाए, ताकि वह दोबारा अपने पैरों पर खड़ी हो सकें और रहने-खाने का इंतजाम कर सकें। अब सवाल यह है कि दीपावली पर रोशनी फैलाने वाले प्रशासन की नजर इस गरीब विधवा के अंधेरे जीवन तक कब पहुंचेगी? क्या गंगा देवी को सरकारी मदद का सहारा मिल पाएगा?
















