*पुलिस को वैमानिस्ता का शिकार हर हाल में होना*
*पुलिस अधिकारियों के आदेश का पालन न करें तो लोन ओडर का पालन न करना और अनुशासनहीनता का चार्ज*
मेरठ-पुलिस व्यवस्था मुझे समझ नहीं आई है, पुलिसिंग क्या क्या नहीं कराती है, पुलिस अधिकारियों के आदेश का पालन न करें तो अनुशासनात्मक कार्यवाही होगी, पुलिस वाइलोज चीख चीख कर सुतह इस बात की गवाही देता है, जांचकर्ताओं को जिम्मेदारियां मिली है, पुलिस का जाति पाति में विवाहजन पुलिसिंग बर्बाद कर के रख देगा, उत्तर प्रदेश में पंडित को राजनीति के जानकार गलत आंकड़े का शिकार बना रहे हैं, श्री पाण्डेय मेरठ एसएसपी पद से हटा कर बता दिया पंडित की औकात भाजपा में जूते की नोक जितनी है, जिसका जमीर जिन्दा बचा है वहीं तो पंडित है, पुलिस इंस्पेक्टर पर हुई कार्यवाही की हम आलोचना करते हैं, अधिकारियों की पोलिसी छोटे कर्मचारियों की बलि का बकरा बनाना इस लिए चल रहा है, क्योंकि सभी सरकारी महकमों में यूनियन खड़ी है, लेकिन पुलिस की यूनियन नहीं खड़ी होनी दी थी, जिसका नुकसान मेरठ के तेजतर्रार पुलिस इंस्पेक्टर गोड़ को झेलना पड़ा है, साथ ही सात पुलिसकर्मियों को भी लाइन हाजिर कर दिया था,
किसान नेता श्री दिग्विजय भाटी जी एवं दलित नेता श्री मोहित जाटव जी के साथ हुए गंभीर कृत्य के मामले में जांच में दोषी पाए जाने पर संबंधित इंस्पेक्टर को मेरठ पुलिस द्वारा निलंबित किया गया है। सभी अधिकारियों को इससे सीख लेनी चाहिए कि किसी भी वरिष्ठ अधिकारी के गलत आदेश का आंख मूंदकर पालन करने के बजाय कानून, संविधान और अपने विवेक के अनुसार कार्य करें, ताकि बाद में किसी को शर्मिंदगी का सामना न करना पड़े।













