“शिक्षा और शिक्षा का उद्देश्य ”
शिक्षा केवल क ख ग घ अथवा ए बी सी डी को समझने का माध्यम ही नहीं बल्कि यह एक ऐसी कल्पना है जो किसी गहन अन्धकार में भी रोशनी की किरण खोजने की क्षमता को विकसित करती है। जहां दुनिया की हर चीज फेल हो जाती है वहां केवल ज्ञान और विवेक ही काम आता है।
यदि हम प्राचीन काल के तकनीकी विकास की ओर ध्यान केंद्रित करें तो पहला विज्ञान आज से हजारों गुना अधिक विकसित था उस ज्ञान की गहराई को छूने में भी हमें हजारों साल लग जाएंगे जिस विकास को हम बहुत पहले खो चुके हैं।
सबसे बड़ी आश्चर्यजनक बात यह है कि जितनी भी बड़ी से बड़ी विदेशी कम्पनियां हैं अधिकांश कम्पनियों के शीर्ष पदों पर उन कम्पनियों का संचालन अधिकांशतः भारतीय ही करते आ रहे हैं।वही कम्पनियां पूरी दुनिया में भारी मुनाफा कमा रही है।
लेकिन यदि उसी परिपेक्ष्य में यदि हम स्वदेशी कंपनियों के विकास पर ध्यान केंद्रित करने की कोशिश करें तो आपसी खींचतान में वह प्रोगेस हमारी स्वदेशी कम्पनियों में नहीं दिखाई देती जितना लाभ विदेशी कम्पनियां हमसे उठा रही हैं।
यह कहने में भी कोई गुरेज नहीं कि आज दूषित और नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव हमारे समाज में इतने बड़े व्यापक स्तर पर देखने को मिल रहा है आज का युवा आन्दोलन जीवी अधिक रिसर्च और शिक्षा के नाम पर शून्यता की पराकाष्ठा को छूता चला जा रहा है।
सोशल मीडिया ने एक जैनेटिक दुनिया का विकास तो तेजी से कर लिया है जिसे हम आज जेन जी के नाम से जानते पहचानते हैं लेकिन जेन जी का सही मायने में यदि इन्हीं लोगों से भावार्थ पूछा जाये तो इनमें से शायद कोई नहीं बता पायेगा।
जिस संविधान की किताब को कुछ राजनेता हाथों में लिए हुए घूमते हैं वे इसी संविधान की कितनी परवाह कर रहे हैं यह भी आज का सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न बन चुका है।आज की घटिया और प्रदूषित राजनीति ने आज के युवा वर्ग के भविष्य पर कुठाराघात किया है यह भी आज की राजनीति पर एक बहुत बड़ा प्रश्न चिन्ह बन चुका है।
आज जिस तरह पूरे देश में विदेशी कम्पनियों का मकड़जाल बिछता चला जा रहा है यह कोई ग़लत बात नहीं है कि विदेशी कम्पनियों का निवेश न हो लेकिन सबसे बड़ी बात है कि स्वदेशी कंपनियों के उत्थान के लिए भी एक मार्ग सुनिश्चित होना चाहिए जिससे रोजगार के संसाधनों में व्यापक वृद्धि दर्ज की जा सके।
आरक्षण जैसी परिस्थितियों से निजी क्षेत्र और सार्वजनिक क्षेत्रों को पूर्णतः मुक्त किया जाए। सबसे बड़ी बात है कि प्रतिभाओं का लगातार पलायन आज देश की सबसे बड़ी चिंता और चुनौती का विषय है यदि हमने इस गहन समस्या पर ध्यान नहीं दिया तो आने वाले समय में इसका व्यापक परिणाम भी देखने को मिलेगा।
सबसे बड़ी बात है कि छोटे स्तर पर बड़े औद्योगिक क्षेत्र के विकास के साथ लघु अति लघु उद्योग पर भी ध्यान केंद्रित किया जाये तो सबसे अधिक रोजगार के संसाधन लघु और अति लघु उद्योग ही अधिक जुटा सकते हैं।
यदि चीन ने लघु और अति लघु एवं कुटीर उद्योग पर ध्यान नहीं दिया होता तो चीन जैसे देश को भी इतनी बड़ी जनसंख्या का भार उठाना मुश्किल पड़ सकता था। उसके आर्थिक विकास की सबसे मजबूत रीढ़ छोटे और मंझले उधोग धंधे ही है। जिस पर सरकार को गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।
अपनी महत्वपूर्ण आवश्यकता की खोज हमें आज घरेलू स्तर पर ही खोजने की आवश्यकता है जिससे लगातार विदेशी रहमो-करम की ओर हमें आज ही नहीं बल्कि भविष्य में भी कभी ताकना न पड़े।
आज अपनी तकनीकी ताक़त को पूर्णतः विकसित किए जाने की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
सुपर पावर बनने के लिए हमें आज बहुत सी कमियों को खोजकर उन्हें पूर्णतः समाप्त करने की आवश्यकता है। यदि उन गहन मुद्दों पर गहराई से मंथन किया जाये जो वास्तव में राष्ट्रीय विकास में बाधक बने हुए हैं और उनका पूर्णतः समाधान खोज लिया जाये तो आने वाले समय में हम संसार की सबसे बड़ी शक्तियों में पहले पायदान पर होंगे इसमें कोई संदेह नहीं है।
बशर्ते पूर्ण ईमानदारी से उन मुद्दों पर अत्यंत गंभीरता से विचार करके मूल समस्याओं को पूर्णतया समाप्त करने का संकल्प लिया जाये तभी यह सबकुछ संभव है अन्यथा दूर के ढोल सुहावने होते हैं।
जय हिन्द जय भारत वंदेमातरम
चन्द्र शेखर मार्कंडेय
पत्रकार एवं साहित्यकार
जिला अमरोहा उत्तर प्रदेश












