क्या अमेरिका में ट्रंप युग को लग गया है बड़ा ब्रेक? मिडटर्म चुनावों के इस उलटफेर के पीछे आखिर क्या है असली कहानी?
अमेरिकी राजनीति में हाल ही में संपन्न हुए मध्यावधि (मिडटर्म) चुनावों ने अमेरिकी संसद (कांग्रेस) की तस्वीर पूरी तरह बदलकर रख दी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी को इन चुनावों में जोरदार झटका लगा है और विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) और सीनेट दोनों सदनों पर अपना नियंत्रण हासिल कर लिया है।
आइए सिलसिलेवार तरीके से समझते हैं कि इस बड़े राजनीतिक भूचाल और उलटफेर के पीछे कौन-से बड़े कारण थे और इसका दुनिया और अमेरिका पर क्या असर पड़ेगा:
1. क्या डोनाल्ड ट्रंप के मनमाने फैसलों, नीतियों और विदेशी वर्कर्स पर सख्ती से जनता नाराज थी?
हाँ, यही इस चुनाव का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।
* आर्थिक दबाव और डॉलर संकट: ट्रंप प्रशासन की आक्रामक टैरिफ नीतियां और घरेलू स्तर पर बढ़ती महंगाई आम जनता की जेब पर भारी पड़ रही थी। डॉलर के वर्चस्व और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच अमेरिकी मिडिल क्लास महंगाई से त्रस्त था।
* विदेशी वर्कर्स की छंटनी और वर्कफोर्स का संकट: ट्रंप की सख्त आव्रजन (immigration) नीतियों के चलते विदेशों से अमेरिका में काम करने आए हुनरमंद युवाओं और वर्कर्स को बड़े पैमाने पर बाहर का रास्ता दिखाया गया था या वीजा नियमों को बेहद कठिन बना दिया गया था।
* अमेरिकी अर्थव्यवस्था को हुआ भारी नुकसान: टेक, हेल्थकेयर और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टरों में इन विदेशी कामगारों की अचानक कमी से कंपनियों के काम समय पर पूरे नहीं हो पा रहे थे, प्रोजेक्ट्स लेट हो रहे थे और अमेरिकी अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था। जनता और व्यापारी वर्ग इस बात से बेहद नाराज थे कि इन नीतियों ने देश की विकास गति को धीमा कर दिया है।
2. क्या वैश्विक स्थिति (जैसे वर्ल्ड वॉर 3 का खतरा या मध्य पूर्व के संघर्ष) का असर पड़ा?
बिलकुल, विदेश नीति और वैश्विक तनावों ने भी इसमें बड़ी भूमिका निभाई।
* ट्रंप प्रशासन के दौरान ईरान और मध्य पूर्व के मोर्चे पर जो सैन्य टकराव बढ़े थे, उससे अमेरिकी नागरिकों में तीसरे विश्व युद्ध (World War 3) या एक लंबे, महंगे युद्ध में फंसने का डर पैदा हो गया था।
* जनता और विपक्षी दलों ने इन सैन्य खर्चों पर कड़े सवाल उठाए। डेमोक्रेट्स ने इसे जोर-शोर से उठाया कि ट्रंप के पास वैश्विक कूटनीति का कोई स्थिर और शांतिपूर्ण रोडमैप नहीं है।
3. क्या डेमोक्रेटिक पार्टी इस बार ज्यादा मजबूत इरादों के साथ उतरी थी?
हाँ। इस बार डेमोक्रेट्स ने सिर्फ विरोध करने के बजाय महंगाई, विदेशी कामगारों की नीतियों से ठप पड़े कामकाज, और कामकाजी वर्ग के मुद्दों को अपनी कैंपेन का मुख्य आधार बनाया। इसके अलावा, अमेरिका के कई अहम राज्यों और स्विंग स्टेट्स में जमीनी स्तर पर मजबूत और नए चेहरों को उतारकर उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी को कड़ी टक्कर दी, जिसका परिणाम यह हुआ कि जनता ने ट्रंप के खिलाफ एक मजबूत विकल्प चुना।
4. अब अमेरिका और दुनिया पर इसका क्या असर पड़ेगा?
* क्या डोनाल्ड ट्रंप अब अपनी मनमानी कर पाएंगे?
अब यह लगभग नामुमकिन होगा। चूंकि संसद के दोनों सदनों (हाउस और सीनेट) पर अब डेमोक्रेट्स का नियंत्रण आ गया है, इसलिए ट्रंप के लिए अपने मनचाहे कानून पास कराना, बजट आवंटन करना या मनमाने कार्यकारी फैसले लेना बेहद मुश्किल हो जाएगा।
* कड़े विधेयकों और नीतियों पर रोक: संसद अब ट्रंप प्रशासन के हर कदम, खासकर रक्षा बजट, विदेश नीति और आव्रजन से जुड़े विवादास्पद फैसलों की बारीक जाँच करेगी।
* विदेशी वर्कर्स की वापसी की उम्मीद: संसद में डेमोक्रेट्स के मजबूत होने से इस बात की प्रबल संभावना है कि विदेशी कामगारों और युवाओं से जुड़ी नीतियों में नरमी लाई जाए, ताकि अमेरिका में काम के लेट हो रहे प्रोजेक्ट्स को फिर से गति मिल सके और लेबर क्राइसिस से उबरा जा सके।
* वैश्विक कूटनीति पर असर: अमेरिका के भीतर राजनीतिक शक्ति संतुलन बदलने से दुनिया भर के देशों (विशेषकर मध्य पूर्व और ईरान जैसे देशों के साथ चल रहे तनाव) को राहत या एक नया कूटनीतिक संतुलन मिल सकता है, क्योंकि व्हाइट हाउस को अब हर बड़े फैसले से पहले संसद की कड़ी आपत्तियों का सामना करना पड़ेगा।
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