*एटा में फ्री बस यात्रा: आदेश आया, बस नहीं आई*
_*फ्री रोडबेज सेवा के नाम पर महिलाओं के साथ भद्दा मजाक*_
*तुर्रम सिंह राजपूत✍️*
एटा। सूबे के सख़्त संत सीएम ने रक्षाबंधन पर महिलाओं को फ्री बस यात्रा का वरदान दिया। एटा में वह वरदान कागज पर ही रह गया। मैदान में न बस दिखी, न व्यवस्था, सिर्फ भीड़ दिखी।शहर के शिकोहाबाद अड्डा, अलीगंज चुंगी, ठंडी सड़क, जनता मंदिर और रोडवेज बस अड्डे पर सुबह से महिलाओं और बच्चों की कतारें ऐसी जमीं जैसे कोई मुफ्त का लड्डू बांटने वाला हो, बस लड्डू वाला ही न हो। घंटों इंतजार में आंखें पथरा गईं, गर्मी ने बाकी काम पूरा कर दिया। जो बच गए, उन्होंने निजी वाहनों का सहारा लिया और कहा—भाई, मुफ्त यात्रा अच्छी है, लेकिन यात्रा तो हो भी। परिवहन निगम की व्यवस्था इतनी फेल हुई कि लगता था आदेश आया है बस चलाने का नहीं, बसें *छिपाने* का। जगह-जगह यात्रियों की भीड़ देखकर यही लगता था कि मुख्यमंत्री का निर्देश आया जरूर, लेकिन निगम ने उसे पढ़ने के बजाय *फ्रेम* में टांग दिया। रक्षाबंधन पर भाई-बहन का त्योहार था। एटा में बहनें सड़क पर खड़ी रहीं, भाई वाले बसें कहीं और मना रही थीं।
नतीजा साफ था— *फ्री यात्रा का ऐलान हो गया, सफर प्राइवेट में हुआ। आदेश सख़्त संत वाला था, अमल एटा वाला।*













