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लोकतंत्र का गला घोंटने की साजिश: भू-माफिया और पुलिस गठजोड़ के खिलाफ उठी बुलंद आवाज इस झूठे मुकदमे को प्रायोजित करने वाले तथा इसमें संलिप्त लोगों का नार्को टेस्ट कराया जाना चाहिए, ताकि पर्दे के पीछे छिपे असली गुनाहगारों और भू-माफियाओं के चेहरे बेनकाब हो सकें। स्वतंत्र पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता विजेंद्र बहादुर सिंह को फर्जी मुकदमे में फंसाने का गंभीर मामला; भारतीय मीडिया फाउंडेशन द्वारा आंदोलन की चेतावनी।।

लोकतंत्र का गला घोंटने की साजिश: भू-माफिया और पुलिस गठजोड़ के खिलाफ उठी बुलंद आवाज
इस झूठे मुकदमे को प्रायोजित करने वाले तथा इसमें संलिप्त लोगों का नार्को टेस्ट कराया जाना चाहिए, ताकि पर्दे के पीछे छिपे असली गुनाहगारों और भू-माफियाओं के चेहरे बेनकाब हो सकें।
स्वतंत्र पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता विजेंद्र बहादुर सिंह को फर्जी मुकदमे में फंसाने का गंभीर मामला; भारतीय मीडिया फाउंडेशन द्वारा आंदोलन की चेतावनी।।


अदलहाट / चुनार (मिर्जापुर)
जनपद मिर्जापुर के थाना अदलहाट क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पौनी (पोस्ट-भुडकुडा) के निवासी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं प्रख्यात स्वतंत्र पत्रकार विजेंद्र बहादुर सिंह (पुत्र स्वर्गीय रामफल सिंह) ने भू-माफियाओं और स्थानीय पुलिस प्रशासन पर गंभीर मिलीभगत का आरोप लगाया है। उनका स्पष्ट आरोप है कि भ्रष्ट तत्वों और पुलिस ने आपसी साठगांठ कर उन्हें एक सुनियोजित साजिश के तहत फर्जी मुकदमे में फंसा दिया है।
प्राप्त आधिकारिक जानकारियों के अनुसार, दिनांक 2 नवंबर 2026 को जनपद मिर्जापुर न्यायालय से एक सम्मन जारी हुआ, जिसके तहत सामाजिक कार्यकर्ता विजेंद्र बहादुर सिंह के विरुद्ध विभिन्न गंभीर धाराओं के साथ-साथ एससी-एसटी एक्ट (SC/ST Act) के तहत मुकदमा पंजीकृत दिखाया गया है।
इस घटनाक्रम के सामने आने के बाद से ही क्षेत्र के पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों में भारी आक्रोश व्याप्त है। इसे स्वतंत्र पत्रकारिता और लोकतंत्र की आवाज को दबाने की एक घिनौनी साजिश करार दिया जा रहा है।
: घटना का विवरण और न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल
विजेंद्र बहादुर सिंह ने इस संपूर्ण कार्रवाई को “लोकतंत्र की हत्या” की संज्ञा दी है। उनका कहना है कि जिस कथित घटना का उल्लेख मुकदमे में किया गया है, उस दिन और समय पर वह घटनास्थल पर दूर-दूर तक मौजूद नहीं थे।
विवेचना के दौरान सामने आए थे चौकाने वाले तथ्य:
जब मामले के उप निरीक्षक अभय कुमार द्वारा इस प्रकरण की विवेचना की जा रही थी, तब स्वयं आवेदिका पप्पू देवी बनवासी ने अपने बयानों में यह स्पष्ट रूप से स्वीकार किया था कि उनकी तरफ से ऐसा कोई प्रार्थना पत्र या शिकायत दी ही नहीं गई है।
मौके के चश्मदीद गवाह: उस समय जब पुलिस जांच कर रही थी, तब मौके पर वर्तमान ग्राम प्रधान रमेश बनवासी सहित बस्ती के तमाम आदिवासी एवं ग्रामीण लोग मौजूद थे। इन सभी ने इस बात की गवाही दी है कि विजेंद्र बहादुर सिंह का इस पूरे मामले से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है।
सामाजिक कार्यकर्ता के तीखे सवाल:
विजेंद्र बहादुर सिंह ने पुलिस प्रशासन के समक्ष कुछ चुभते हुए सवाल खड़े किए हैं:
जब वह घटना के समय मौके पर मौजूद ही नहीं थे, तो पुलिस ने किस आधार पर और किन अज्ञात गवाहों के बयानों के आधार पर उनके ऊपर एससी-एसटी जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर दिया?
बिना किसी धरातलीय सत्यता और निष्पक्ष प्राथमिक जांच के आनन-फानन में यह कार्रवाई किसके इशारे पर की गई?
: संगठित ब्लैकमेलिंग गैंग और भू-माफियाओं का पर्दाफाश
पत्रकार विजेंद्र बहादुर सिंह ने आरोप लगाया है कि इस पूरे षड्यंत्र के पीछे कोई छुटपुट मामला नहीं, बल्कि एक संगठित गैंग सक्रिय रूप से काम कर रहा है। उन्होंने इस आपराधिक सिंडिकेट की सरगना के रूप में कांति देवी का नाम उजागर किया है।
स्थानीय निवासियों के बयान और चौंकाने वाले खुलासे:
पप्पू देवी की वास्तविकता: विजेंद्र बहादुर सिंह का कहना है कि जिस महिला (पप्पू देवी बनवासी) के नाम पर यह पूरा फर्जीवाड़ा रचा गया है, वह उनके गांव की स्थायी निवासी तक नहीं है। वह इस गांव की बेटी हैं और उनकी शादी कहीं अन्यत्र हुई है। वह साल में बमुश्किल दो-चार या छह महीने में एक आध बार ही गांव आती हैं।
ब्लैकमेलिंग का धंधा: यह पूरा एक सुनियोजित गैंग है, जिसका मुख्य उद्देश्य भोले-भाले लोगों को झूठे मुकदमों में उलझाना, उन्हें डराना और फिर अवैध धन उगाही (ब्लैकमेलिंग) करना है। भू-माफियाओं के इशारे पर यह गैंग उन तमाम लोगों को निशाना बनाता है जो इनके अवैध कृत्यों के खिलाफ आवाज उठाते हैं।
: भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी की सख्त चेतावनी और आंदोलन का शंखनाद
इस गंभीर प्रकरण ने राष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ लिया है। भारतीय मीडिया फाउंडेशन (National Core Committee) ने इस पूरे मामले को बेहद गंभीरता से लिया है और इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला बताया है।
राष्ट्रीय नेतृत्व का कड़ा रुख:
भारतीय मीडिया फाउंडेशन कोर कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित बालकृष्ण तिवारी एवं संस्थापक एके बिंदुसार ने इस अन्याय के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार करते हुए चेतावनी दी है कि यदि इस मामले की पारदर्शी जांच नहीं हुई, तो संगठन चुप नहीं बैठेगा।
नार्को टेस्ट की मांग: यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने यह मांग की है कि इस झूठे मुकदमे को प्रायोजित करने वाले तथा इसमें संलिप्त लोगों का नार्को टेस्ट कराया जाना चाहिए, ताकि पर्दे के पीछे छिपे असली गुनाहगारों और भू-माफियाओं के चेहरे बेनकाब हो सकें।
आंदोलन की चेतावनी: संगठन ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि प्रशासन ने जल्द से जल्द इस फर्जी मुकदमे को वापस लेने की दिशा में कदम नहीं उठाया, तो भारतीय मीडिया फाउंडेशन सड़कों पर उतरकर एक उग्र राष्ट्रव्यापी/प्रांतीय आंदोलन का शंखनाद करेगा।
: सीबीआई जांच की मांग, लोकतंत्र की रक्षा और
विजेंद्र बहादुर सिंह वर्तमान में भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी की डिजिटल मीडिया सेल के राष्ट्रीय अध्यक्ष के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं। एक जिम्मेदार पत्रकार और मुखर सामाजिक कार्यकर्ता होने के नाते वह पिछले लंबे समय से क्षेत्र के भू-माफियाओं, सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों और विभिन्न भ्रष्टाचारों के खिलाफ लगातार आवाज उठाते रहे हैं।
क्यों बनाया जा रहा है निशाना?
पत्रकारिता के जरिए सच को उजागर करना ही आज उनके लिए अभिशाप बन गया है। भ्रष्ट तंत्र और भू-माफियाओं के अवैध साम्राज्य को जब विजेंद्र बहादुर सिंह की रिपोर्टिंग से खतरा महसूस हुआ, तो उन्होंने पुलिस प्रशासन के साथ मिलकर उन्हें झूठे मुकदमों में उलझाने की यह नीच साजिश रची।
शासन-प्रशासन से पुरजोर मांग:
इस पूरे प्रकरण के अंत में विजेंद्र बहादुर सिंह और उनके समर्थकों ने शासन और उच्च प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच: इस फर्जी मुकदमे की स्वतंत्र एजेंसी या सीबीआई (CBI) से जांच कराई जाए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
न्याय की गुहार: इस मामले में संलिप्त भ्रष्ट अधिकारियों और भू-माफियाओं के इस संगठित गिरोह के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि निर्दोष को न्याय मिल सके।
पत्रकारिता की सुरक्षा: यदि इस प्रकार के षड्यंत्रकारियों को खुली छूट दी गई, तो इससे ईमानदार पत्रकारों और जमीनी सामाजिक कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटेगा, जो अंततः स्वस्थ लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक साबित होगा।
> “सत्य को डराया जा सकता है, लेकिन झुकाया नहीं जा सकता। भू-माफियाओं और भ्रष्ट तंत्र की यह साजिश लोकतंत्र की नींव को हिलाने में नाकाम साबित होगी।” — विजेंद्र बहादुर सिंह, राष्ट्रीय अध्यक्ष (डिजिटल मीडिया सेल, भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी)
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