“कार्यकर्ता ही संगठन की रीढ़ की हड्डी की तरह होता है”-अरविन्द चौहान
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एटा 14 जून।विश्व हिन्दू परिषद ब्रज प्रान्त के प्रान्त सह विशेष सम्पर्क प्रमुख अरविन्द सिंह चौहान ने कहाँ कि विश्व हिन्दू परिषद की स्थापना सन् 1964 मे मुम्बई के संदीपनी आश्रम में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के द्वितीय सरसंघचालक पूजनीय माधव राव सदाशिव राव गोलवकर जी जिन्हें श्रद्धा से गुरु जी कहाँ जाता है उन्होंने एक वार कहाँ था कि- “कार्यकर्ता की चिन्ता हम नहीं करेंगे तो कौन करेगा”। यह केवल वाक्य नहीं बल्कि संगठन के जीवन का मूल मंत्र है।किसी भी संगठन,समाज या राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसके कार्यकर्ता में निहित होती हैं।कार्यकर्ता ही वह आधार शिला होता है,जिस पर संगठन की सफलता और स्थायित्व टिका होता है।एक कार्यकर्ता अपना समय,श्रम ,ऊर्जा और कई वार अपने निजी सुखो को त्याग कर संगठन के उद्देश्यों को आगे बढ़ाता है।वह विना किसी स्वार्थ के समाज ओर राष्ट्हित मे कार्य करता है।ऐसे समर्पित कार्यकर्ताओं की चिन्ता करना तथा उनके सुख-दुख के साथ खड़ा होना तथा उनके सम्मान का ध्यान रखना नेतृत्व की सवसे बडी जिम्मेदारी होती है। जब संगठन अपने कार्यकर्ताओं को ‘काम करने वाला व्यक्ति’ नहीं बल्कि “परिवार का सदस्य'” मानता है,तभी संगठन मजबूत और जीवंत बनता है।
श्री चौहान ने कहाँ कि कार्यकर्ताओं का सम्मान अपनापन और सुरक्षा का भाव मिलता है तो उसका मनोबल कई गुना बढ़ जाता है। वह अधिक निष्ठा और उत्साह और समर्पण के साथ कार्य करता है। आज के समय में अक्सर देखा जाता है कि लोग परिणाम व उपलब्धियां पर अधिक ध्यान देते हैं लेकिन उन कार्यकर्ताओं को भूल जाते हैं जिनकी मेहनत से सफलता का मार्ग तैयार होता है।इसलिए ही कहाँ जाता है कि कार्यकर्त्ता ही संगठन की रीढ़ की हड्डी की तरह होता है,संगठन से सरकारें बनती है सरकार से संगठन नहीं बनते है।









