‘चाय पर साहित्य की चर्चा’ गोष्ठी के अंतर्गत जनपद के गौरव वरिष्ठ कवि राघवेन्द्र ‘विकल’ के व्यक्तित्व एवं साहित्यिक कृतित्व पर होटल देव सागर, आगरा रोड, एटा में एक गरिमामय साहित्यिक आयोजन संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ माता सरस्वती के पूजन एवं श्री राघवेंद्र विकल के चित्र पर पुष्प अर्चन के साथ आरंभ हुआ। डॉ सुधीर पालीवाल ने भावपूर्ण सरस्वती वंदना प्रस्तुत की।कार्यक्रम के अध्यक्ष आचार्य डॉ. प्रेमी राम मिश्र ,मुख्य अतिथि रवीन्द्र शर्मा एडवोकेट एवं विशिष्ट अतिथि पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष अशरफ हुसैन का कार्यक्रम संयोजक नवनीत शर्मा ने पटका पहना कर एवं उनकी धर्मपत्नी प्रीति शर्मा ने चंदन तिलक लगाकर स्वागत किया।
गोष्ठी में स्व. राघवेन्द्र ‘विकल’ के व्यक्तित्व की सरलता, सहजता, मानवीय सरोकारों तथा साहित्य के प्रति उनकी समर्पित साधना पर वक्ताओं ने विस्तार से प्रकाश डाला। साथ ही साहित्यिक अवदान की चर्चा करते हुए उनकी चर्चित कृतियों “प्यास ने कहा”, “मिली मोरपंखी चुभन”, “हाशिए प्रतीक्षा में”, “दूसरा किनारा”, “शायद कोई अपना मिले” तथा “लव-कुश कांड” का साहित्यिक मूल्यांकन प्रस्तुत किया ।
विशिष्ट वक्ताओं में डॉ. ओम ऋषि भारद्वाज, डॉ. सुधीर पालीवाल, श्री संजय सिंह लफ्ज, दिनेश प्रताप सिंह चौहान, संजय शर्मा, वरिष्ठ कवि बलराम सरस , निशाकांत शर्मा एडवोकेट तथा अच्युतम् केशवम् ने विस्तार पूर्वक विचार व्यक्त करते हुए विकल जी की रचनाओं में निहित सामाजिक चेतना, मानवीय संवेदना और जीवन-दर्शन को रेखांकित किया।
अन्य वक्ताओं में प्रीति शर्मा, विवेक शर्मा, आस्था शर्मा, एकांश शर्मा ने पारिवारिक मूल्यों का स्मरण कराते हुए अपने संस्मरण प्रस्तुत किए। डॉ ओम ऋषि भारद्वाज ने पिता का सम्मान पूर्वक स्मरण कराने वाले पुत्र नवनीत शर्मा की सराहना करते हुए कहा कि यह भारतीय संस्कृति के उस आदर्श को चरितार्थ कर रहा है जिसमें माता पिता को देव तुल्य बताया गया है।
अध्यक्षीय उद्बोधन में आचार्य प्रेमी राम मिश्र ने जनपद के दिवंगत साहित्यकारों का स्मरण करने का प्रयोजन बताते हुए कहा कि अपने पूर्वजों के सद् गुणों को विस्मृत कर देने वाला समाज कभी अपराध बोध से मुक्त नहीं हो सकता। उन्होंने प्रमाण सहित बताया कि कविवर राघवेंद्र विकल की सत्य ,शील और संवेदनशीलता की मानसिकता साहित्य में ही नहीं व्यवहार में भी समान भाव से बनी रही ।
इस अवसर पर सर्वेश बाबू दीक्षित , अध्यक्ष सरस्वती शिशु मंदिर एटा, योगेश सक्सैना एडवोकेट, राजीव कुलश्रेष्ठ, अब्दुल तारिक, संजय गुप्ता, खुशीराम, ‘पीयूष’, रज्जी भैया, विभव कुमार शर्मा श्रीमती रुक्मिणी शर्मा रश्मि शर्मा, आस्था शर्मा आदि की गरिमामयी उपस्थिति रही।
संयोजक श्री नवनीत शर्मा ने अपने पिता की स्मृति में प्रतिवर्ष एक भव्य समारोह में एटा जनपद के किसी विशिष्ट रचनाकार को ₹21000/ की धनराशि पुरस्कार स्वरूप प्रदान करने की घोषणा भी की।
कार्यक्रम के अंत में कविवर बलराम ‘सरस’ ने सभी उपस्थित साहित्यकारों, अतिथियों एवं श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। गोष्ठी का समापन स्व. राघवेन्द्र ‘विकल’ के साहित्यिक अवदान को नमन करते हुए किया गया। कार्यक्रम के मध्य में संयोजक नवनीत शर्मा ने सभी का चंदन तिलक लगाकर, पटका पहना कर एवं इंडोर प्लांट का सुंदर गमला भेंट किया।कार्यक्रम का स्मरणीय संचालन कर मुकेश मिश्र पूर्व अध्यक्ष संस्कार भारती ब्रज प्रांत ने उसे और भी अधिक उल्लेखनीय बना दिया । । अंत में सभी आगंतुक सुमधुर रात्रि भोज का आनंद प्राप्त कर विदा हुए।









