मौके से लेखन
भगवान् भी व्यक्ति के भेष में
एक शंकराचार्य भगवान् हैं जो वातानुकूलित वाहन में सो पचास लीगों की टीम के साथ उत्तर प्रदेश की प्रत्येक विधान सभा में जा जा कर गोरक्षा की, उसे माता घोषित करने की तथा जिनको वोट दे रहे हो गलत बता सामने मौजूद लोगों में से हाथ उठवा के अपने निर्णय को बदलने की हुंकार भरवा रहे हैं। उनके साथ विधान सभा वाइज एक क्षेत्रीय पार्टी के नेता और कुछ हथियार बंद लोग….
ये काफिला चयनित जगह पर तय समय से विलम्बित समय पर प्नहुँचता है
यात्रा गोरख पुर से शुरू होकर २४जुलाई को लखनऊ जाकर समाप्त होगी बताते हैं। गाय उनके लिए वह है जो देशी है। वह हिंदुस्तानी हैं तो और देशों की गायें गायें नहीं हैं। उनके अनुसार एक करोड़ गायें ही देश में हैं। वे गाय को दुर्लभ प्रजाति की होने का डर है। वे कहते हैं बात करते हैं और हाथ उठा त्रिवाचा भरवा दर्शाते हैं कि वे भागवान हैं। स्वयं आएं हैं तो बड़ी बात है।
इसी बीच अंतिम चरण के शुरू होते ही पांच छः अल्प संख्यक लोग गाय हमारी माता है की तख्ती दिखाते हुए प्रकट होते हैं। और उधर तभी प्रस्थान की हलचल और अव्यवस्था के लिए तय वाक्य सरकार के प्रति व्यक्त करने की आवाजें सुनाई पडती है।
इस सभा में आयोजक और भगवान् के लोगों को मिला लें तो भी सुनने वाले बराबर नहीं बैठेंगे।
मौजूद लोगों में पत्रकार, शिक्षक, वकील के साथ स्थानीय समाजवादी नेता गण…….









