मिर्जापुर: ग्राम पंचायत कुशहा में प्राचीन कब्रिस्तान की भूमि पर भू-माफियाओं की नजर, ग्राम प्रधान ने शासन से लगाई गुहार।
रिपोर्ट – एके बिंदुसार – संस्थापक भारतीय मीडिया फाउंडेशन ( नेशनल) नई दिल्ली।
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मिर्जापुर (उत्तर प्रदेश):
जनपद के तहसील चुनार अंतर्गत ग्राम पंचायत कुशहा में एक अत्यंत संवेदनशील मामला सामने आया है। यहाँ सौ वर्षों से अधिक समय से उपयोग में लाई जा रही एक प्राचीन कब्रिस्तान की भूमि को भू-माफियाओं द्वारा कथित रूप से हड़पने और उसका अस्तित्व मिटाने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्राम प्रधान श्रीमती विद्यावती ने उप जिलाधिकारी चुनार को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप और उचित कार्रवाई की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?
ग्राम प्रधान द्वारा प्रेषित प्रार्थना पत्र के अनुसार, ग्राम कुशहा की उक्त भूमि ऐतिहासिक रूप से कब्रिस्तान के रूप में दर्ज रही है और राजस्व अभिलेखों (खतौनी/खसरा) में भी इसे कब्रिस्तान के रूप में ही मान्यता प्राप्त थी। इस भूमि के निकट ही सोने ‘शहीद बाबा’ का मज़ार स्थित है, जहाँ लंबे समय से धार्मिक कार्यक्रम और कव्वाली का आयोजन होता आया है।
दस्तावेजों में उल्लेख है कि वर्ष 2013-2014 तक यहाँ शवों को दफनाने की प्रक्रिया निरंतर जारी थी। आरोप है कि इसके पश्चात कुछ स्थानीय लोगों और एक विशेष वर्ग ने मिलकर मिलीभगत की और प्रशासनिक हेरफेर के जरिए इस कब्रिस्तान की भूमि को राजस्व अभिलेखों से हटाकर ‘बंजर’ घोषित करवा दिया।
तनाव और अशांति का माहौल
वर्तमान में, उक्त भूमि पर अवैध कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र में भारी तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। ग्राम प्रधान ने स्पष्ट किया है कि एक तरफ भू-माफिया भूमि पर अवैध कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ ग्रामीण अपनी पैतृक और धार्मिक संपत्ति को बचाने के लिए संघर्षरत हैं। इस टकराव के कारण कभी भी बड़े विवाद या कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न हो सकती है, जिससे ग्राम कुशहा में शांति व्यवस्था पर संकट मंडरा रहा है।
ग्राम प्रधान की शासन से प्रमुख मांगें
ग्राम पंचायत कुशहा की ओर से श्रीमती विद्यावती ने उप जिलाधिकारी को निम्नलिखित बिंदुओं पर तत्काल कार्रवाई के लिए निवेदन किया है:
निष्पक्ष जाँच: उक्त भूमि के रिकॉर्ड में किए गए फर्जीवाड़े और उसे बंजर घोषित करने की पूरी प्रक्रिया की उच्च स्तरीय जाँच कराई जाए।
अतिक्रमण से मुक्ति: कब्रिस्तान की भूमि को पुनः बहाल करते हुए अवैध कब्जेदार को तत्काल बेदखल किया जाए।
बाउंड्री वॉल का निर्माण: भविष्य में किसी भी प्रकार के विवाद को रोकने और स्थल की पवित्रता बनाए रखने के लिए उक्त भूमि की चारों ओर से पक्की चारदीवारी (बाउंड्री वॉल) का निर्माण कराया जाए।
यह मामला सीधे तौर पर धार्मिक स्थल की सुरक्षा और भू-माफियाओं के बढ़ते हौसलों का है। ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधि का प्रशासन से यही आग्रह है कि सरकारी अभिलेखों के साथ हुई इस छेड़छाड़ को सुधारते हुए कब्रिस्तान को पुनः बहाल किया जाए, ताकि सामाजिक सद्भाव बना रहे और प्राचीन धार्मिक धरोहर का अस्तित्व सुरक्षित रह सके।










