काशी की धार्मिक गरिमा, गंगा संरक्षण एवं समग्र विकास हेतु प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के नाम जिलाधिकारी वाराणसी के माध्यम से सौंपा गया मांग, रिपोर्ट राम असरे

 

 

काशी की धार्मिक गरिमा, गंगा संरक्षण एवं समग्र विकास हेतु प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के नाम जिलाधिकारी वाराणसी के माध्यम से सौंपा गया मांग-पत्र

 

वाराणसी, 25 जून 2026।

 

काशी की धार्मिक पवित्रता, माँ गंगा की अविरल एवं निर्मल धारा के संरक्षण तथा काशी को उसकी आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक गरिमा के अनुरूप विकसित किए जाने की मांग को लेकर माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी एवं माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी महाराज को संबोधित एक विस्तृत मांग-पत्र जिलाधिकारी, वाराणसी के माध्यम से प्रेषित किया गया।

 

इस अवसर पर शशांक शेखर त्रिपाठी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष – दी बनारस बार एसोसिएशन एवं संयोजक – भारतीय जनता पार्टी, विधि प्रकोष्ठ, काशी क्षेत्र, जितेंद्र तिवारी एडवोकेट , महामंत्री – संरक्षक राजस्व बार एसोसिएशन तथा राजेश त्रिवेदी एडवोकेट , भारतीय जनता पार्टी लघु उद्योग प्रकोष्ठ के प्रदेश सहसंयोजक के साथ काफी संख्या में अधिवक्तागण उपस्थित रहे।

 

मांग-पत्र में काशी की धार्मिक एवं सांस्कृतिक गरिमा को अक्षुण्ण बनाए रखने, माँ गंगा की स्वच्छता एवं संरक्षण सुनिश्चित करने तथा घाटों एवं प्रमुख धार्मिक स्थलों पर अनुशासित एवं मर्यादित वातावरण बनाए रखने के लिए प्रभावी नीतिगत एवं प्रशासनिक कदम उठाने का अनुरोध किया गया है।

 

मांग-पत्र में प्रमुख रूप से काशी के प्रमुख धार्मिक क्षेत्रों को विशेष धार्मिक-सांस्कृतिक संरक्षित क्षेत्र घोषित करने, गंगा घाटों पर प्रभावी आचार-संहिता लागू करने, धार्मिक स्थलों की सुरक्षा एवं निगरानी व्यवस्था सुदृढ़ करने, गंगा में प्रदूषण फैलाने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने, धार्मिक मर्यादा के विपरीत गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण तथा व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने जैसी महत्वपूर्ण मांगें शामिल हैं।

 

शशांक शेखर त्रिपाठीएडवोकेट , जितेंद्र तिवारी एडवोकेट एवं राजेश त्रिवेदी एडवोकेट ने संयुक्त वक्तव्य जारी करते हुए कहा कि काशी केवल एक नगर नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक चेतना का केंद्र है। माँ गंगा भारतीय सभ्यता, संस्कृति एवं सनातन आस्था की जीवनरेखा हैं। गंगा एवं काशी की धार्मिक मर्यादा का संरक्षण प्रत्येक नागरिक तथा शासन-प्रशासन का नैतिक एवं संवैधानिक दायित्व है।

 

उन्होंने कहा कि माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय भी समय-समय पर अपने विभिन्न निर्णयों एवं टिप्पणियों में माँ गंगा की पवित्रता, संरक्षण तथा गंगा घाटों पर धार्मिक मर्यादा बनाए रखने की आवश्यकता पर गंभीर चिंता व्यक्त कर चुका है। न्यायालय ने गंगा को केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति एवं करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक मानते हुए उसके संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर बल दिया है।

 

संयुक्त वक्तव्य में कहा गया कि यदि इस मांग-पत्र में उल्लिखित सुझावों को सरकार द्वारा नीतिगत रूप से लागू किया जाता है, तो यह काशी के समग्र विकास के लिए एक मील का पत्थर सिद्ध होगा तथा गंगा घाटों एवं धार्मिक स्थलों पर धर्म एवं भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं के विरुद्ध होने वाली गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा। इससे काशी की वैश्विक प्रतिष्ठा, धार्मिक पर्यटन, स्वच्छता एवं सांस्कृतिक संरक्षण को भी नई दिशा मिलेगी।

 

प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी वाराणसी से अनुरोध किया कि उक्त मांग-पत्र को अपनी संस्तुति सहित शीघ्र माननीय प्रधानमंत्री एवं माननीय मुख्यमंत्री के समक्ष प्रेषित किया जाए, ताकि काशी एवं माँ गंगा के संरक्षण के लिए आवश्यक नीतिगत निर्णय लिए जा सकें।

 

इस अवसर पर काफी संख्या में अधिवक्तागण एवं अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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