*कचहरी पर नगर पालिका ने कराई पेय जल की व्यवस्था , लोगों को याद आ रही पुरानी व्यवस्था*
एटा नगर पालिका परिषद ने कचहरी पर पं० शिवदत्त उद्यान के पास जनता के लिए पेयजल की व्यवस्था कराई है , लेकिन स्थानीय लोगों को इस व्यवस्था के सापेक्ष पुरानी व्यवस्था अधिक याद आ रही है l
*कैसी थी पेयजल की पुरानी व्यवस्था, कब हुई थी शुरू*
एटा नगरपालिका परिषद की पूर्व अध्यक्ष *श्रीमती मीरा गाँधी* के कार्यकाल में कचहरी में शुरू हुई ठंडे शीतल पेयजल की व्यवस्था लोगों को अब याद आ रही है l
उस समय कचहरी पर नगर पालिका के नलकूप से जनता को पीने के लिए ठंडा शीतल जल मिलता था, जो अब नहीं मिल रहा है l
गर्मी के समय में ठंडे शीतल जल का मिलना अपने आप में किसी वरदान जैसा होता है जिससे प्यास तो बुझती ही है आत्मा भी तृप्त हो जाती है l
जनता को यहां से ठंडा शीतल जल मिलता था जिससे वह अपनी प्यास तो बुझाते ही थे और आसपास के लोग उस ठंडे शीतल जल को पीने के लिए बर्तनों में भरकर अपने घरों में भी ले जाते थे l जनता उस पुरानी व्यवस्था को बार – बार याद कर रही है l
*कौन सी व्यवस्था है बेहतर, सामान्य जल या शीतल जल ? क्या बोले स्थानीय लोग*
इस मुद्दे पर स्थानीय लोगों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी, नाम न छापने की शर्त पर एक दुकानदार ने बताया कि सामान्य जल की अपेक्षा शीतल जल मिलना अधिक सुखद है, हमें अब पीने के लिए ठंडे पानी का केम्पर मांगना पड़ता है, अगर यहाँ पूर्व की तरह ठंडा पानी निकलता तो हमारा यह केम्पर का खर्चा बचता l
*कौन है जिम्मेदार ?*
इस व्यवस्था का जिम्मेदार कौन है सब लोग जानते हैं लेकिन कानूनी पचड़े में पड़ने की बात सोचकर कोई भी कुछ खुलकर बोलने को तैयार नहीं है l लेकिन इतना तो तय है कि सामान्य जल की अपेक्षा अगर जनता को पीने के लिए ठंडा शीतल जल मिले तो उसका केम्पर का खर्चा भी कम हो जाएगा और गर्मी में अधिक राहत भी मिलेगी l
इतना तो कोई भी समझ सकता है कि गर्मी के समय में सामान्य जल की अपेक्षा ठंडा शीतल जल अधिक सुखद है, विशेषकर उन लोगों के लिए जिनकी जेब पर ठंडे पानी का केम्पर बोझ बनता






