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ऐतिहासिक हुंकार: भारतीय मीडिया फाउंडेशन ने फूंका ‘निर्णायक जंग’ का शंखनाद, पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ताओं की एकजुटता से थर्राएंगे तथाकथित भ्रष्टाचारी!

*ऐतिहासिक हुंकार: भारतीय मीडिया फाउंडेशन ने फूंका ‘निर्णायक जंग’ का शंखनाद, पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ताओं की एकजुटता से थर्राएंगे तथाकथित भ्रष्टाचारी!*

 

 

रिपोर्ट – करन छौकर

संस्थापक सदस्य एवं केंद्रीय अध्यक्ष केंद्रीय पॉलिसी मेकिंग सुप्रीम कमेटी भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी नई दिल्ली।

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नई दिल्ली:

देश के लोकतांत्रिक ढांचे के दो सबसे मजबूत स्तंभों—पत्रकारिता और सामाजिक सरोकार—को कमजोर करने वाली ताकतों के खिलाफ अब एक महासंग्राम छिड़ गया है। भारतीय मीडिया फाउंडेशन (BMF) नेशनल कोर कमेटी ने 18 अप्रैल 2026 को ऐतिहासिक और बेहद महत्वपूर्ण वर्चुअल मीटिंग में देश भर के पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को एक मंच पर संगठित करने की न केवल मजबूत रणनीति बनाई है, बल्कि उनके ‘अधिकार, सम्मान और सुरक्षा’ के लिए आर-पार की ‘निर्णायक जंग’ का ऐलान कर दिया है।

यह बैठक महज़ एक औपचारिक विमर्श नहीं थी, बल्कि यह स्वतंत्र साख और सामाजिक न्याय की रक्षा के लिए उठाई गई एक वैचारिक संकल्पित विचार थी। सत्ता और व्यवस्था की बेरुखी से त्रस्त मीडिया जगत और सामाजिक क्षेत्र के योद्धाओं के लिए यह एक आशा की नई किरण बनकर उभरी है।

विचारधारा का केंद्र: “एकजुटता ही हमारी शक्ति, संघर्ष ही हमारा मार्ग”

भारतीय मीडिया फाउंडेशन की विचारधारा अत्यंत स्पष्ट है: जब तक लोकतंत्र के प्रहरी (पत्रकार) और समाज के सजग प्रहरी (सामाजिक कार्यकर्ता) सुरक्षित और सम्मानित नहीं होंगे, तब तक एक स्वस्थ राष्ट्र की कल्पना बेमानी है। वर्तमान समय में, जहाँ सच बोलने पर पाबंदियां और समाज सेवा की राह में कांटे बोए जा रहे हैं, भारतीय मीडिया फाउंडेशन (नेशनल )ने एक ऐसी ‘मजबूत विचारधारा’ का बीजारोपण किया है, जो भयमुक्त पत्रकारिता और शोषणमुक्त समाज की स्थापना के लिए प्रतिबद्ध है।

बैठक में यह संदेश पुरजोर तरीके से दिया गया कि अब याचना नहीं, रण होगा। संघर्ष बड़ा भीषण होगा! पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता अब बिखरे हुए नहीं रहेंगे, बल्कि एक मुट्ठी बनकर अपनी जायज़ मांगों को मनवाएंगे।

रणनीति और शंखनाद: यूनियन संस्थापक एवं वरिष्ठ पत्रकार एके बिंदुसार ने उठाई “क्रांतिकारी” मांगे,

 

यूनियन के संस्थापक और प्रखर नेतृत्वकर्ता श्री एके बिंदुसार ने बैठक को संबोधित करते हुए देश की मौजूदा व्यवस्था पर तीखे सवाल दागे और उन बुनियादी मुद्दों को पटल पर रखा, जिन्हें अब तक सरकारों ने ठंडे बस्ते में डाल रखा था। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मांगे कोई भीख नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में लगे योद्धाओं का हक है।

श्री बिंदुसार ने एक सुव्यवस्थित कार्ययोजना प्रस्तुत की, जिसमें तात्कालिक राहत से लेकर दूरगामी संवैधानिक सुधारों तक का रोडमैप शामिल था।

प्रमुख मांगे और विस्तृत रोड मैप: देश में हलचल,

बैठक में पारित प्रस्तावों के तहत निम्नलिखित प्रमुख मांगे सरकार के समक्ष मजबूती से रखी गई हैं:

1. राष्ट्रीय जनगणना में विशेष स्थान:

यूनियन के संस्थापक एके बिंदुसार ने सबसे पहले देश के सभी कार्यरत पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की विधिवत जनगणना कराने की मांग उठाई। यह डेटाबेस न केवल उनकी सही संख्या बताएगा, बल्कि सरकार को उनके कल्याण के लिए योजनाएं बनाने में भी मदद करेगा।

2. कठोर ‘पत्रकार एवं सामाजिक सुरक्षा कानून’ लागू हो:

पूरे देश में पत्रकारों पर बढ़ते हमलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न को देखते हुए,Indian media Foundation ने मांग की है कि एक सख्त और प्रभावी ‘पत्रकार एवं सामाजिक सुरक्षा कानून’ तत्काल प्रभाव से पूरे देश में सख्ती से लागू किया जाए। इस कानून में दोषियों के लिए कड़े दंड का प्रावधान होना चाहिए।

3. मीडिया एवं सामाजिक कार्यकर्ता कल्याण बोर्ड का गठन:

सभी राज्यों में तत्काल प्रभाव से ‘मीडिया एवं सामाजिक कार्यकर्ता कल्याण बोर्ड’ का गठन हो। इस बोर्ड की स्वायत्तता सुनिश्चित करने के लिए इसमें पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता और सभी प्रमुख पत्रकार संगठनों के पैनल से 10-10 सदस्यों को शामिल किया जाए। यह बोर्ड उनकी आर्थिक, चिकित्सीय और सामाजिक सुरक्षा का ध्यान रखेगा।

4. टोल टैक्स से पूर्ण मुक्ति (टोल फ्री):

समाचार संकलन और सामाजिक कार्यों के लिए दिन-रात यात्रा करने वाले पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए देश के सभी टोल प्लाजा पर टोल टैक्स पूरी तरह से फ्री किया जाए। यह उनकी कर्तव्यनिष्ठा का सम्मान होगा।

5. आपातकालीन टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर:

सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिया जाए कि वे पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की समस्याओं के तत्काल समाधान के लिए एक विशेष टोल-फ्री नंबर (Helpline) जारी करें, जिस पर वे अपनी सुरक्षा या कार्य में बाधा से जुड़ी शिकायतें दर्ज करा सकें।

6. वैधानिक संस्थाओं में प्रतिनिधित्व (कोटा):

एक क्रांतिकारी मांग उठाते हुए, Indian media Foundation ने कहा कि जिस तरह स्नातक एवं शिक्षक विधायकों के लिए कोटा निर्धारित है, उसी तर्ज पर विधान परिषद (Legislative Council) और राज्यसभा (Rajya Sabha) में भी पत्रकारों का कोटा फिक्स किया जाए और उनके लिए चुनाव कराने की प्रक्रिया बनाई जाए, ताकि वे कानून बनाने की प्रक्रिया में सीधे भाग ले सकें।

प्रशासनिक समन्वय और थाना स्तर पर सशक्तिकरण की अभिनव पहल,

बैठक में केवल मांगे ही नहीं रखी गईं, बल्कि कार्यप्रणाली में सुधार के लिए ठोस सुझाव भी दिए गए:

राज्य एवं जिला स्तरीय समन्वय समितियां: पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता और प्रशासनिक अधिकारियों (पुलिस , प्रशासन एवं पत्रकार तथा जनता जनार्दन) के बीच सीधा संवाद स्थापित करने और टकराव को टालने के लिए राज्य और जिला स्तर पर ‘समन्वय समितियां’ गठित की जाएं।

थाना लेवल पर मीडिया सेंटर की स्थापना: यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहल है। थाना स्तर पर सक्रिय प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल मीडिया ,खोजी (Investigative) और स्वतंत्र पत्रकारों की सूची तैयार कर क्षेत्रीय थाने में पत्रकारों के बैठने, समाचार कवरेज करने और आम जनता से सीधे संवाद करने के लिए एक सर्वसुविधायुक्त ‘मीडिया सेंटर’ स्थापित किया जाए। यह पुलिस-पब्लिक-प्रेस के बीच विश्वास का पुल बनेगा।

सामाजिक सरोकार: सशक्त मीडिया समृद्ध भारत के लिए “तूफानी दौरा”

अपनी सामाजिक जिम्मेदारी को समझते हुए, भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी ने भ्रष्टाचार के बढ़ते प्रचलन के खिलाफ एक देशव्यापी अभियान चलाने का निर्णय लिया है। पूरे देश में पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ताओं को इस गंभीर मुद्दे पर जागरूक करने और उन्हें इस अभियान से जोड़ने के लिए विभिन्न राज्यों के ‘तूफानी दौरे’ की रणनीति बनाई गई है। संगठन का मानना है कि एक स्वस्थ समाज ही एक मजबूत लोकतंत्र की आधारशिला है।

एक मजबूत संदेश: सत्ता और समाज के लिए,

भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी की बैठक ने स्पष्ट कर दिया है कि देश का

पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता अब चुप नहीं बैठेगा।

उन्होंने नागरिकों एवं प्रशासन एवं सरकारों से अपील की है कि वे अब लोकतंत्र के प्रहरी को कमजोर समझने की भूल न करें। उनकी सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है। यदि मांगे नहीं मानी गईं, तो यह संघर्ष सड़कों से लेकर संसद तक गूंजेगा।

पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं को संदेश: यह समय एकजुट होने का है। अपनी व्यक्तिगत पहचान से ऊपर उठकर संगठन की विचारधारा से जुड़ें। जब हम एक मंच पर होंगे, तभी हमारी आवाज इतनी बुलन्द होगी कि उसे अनसुना नहीं किया जा सकेगा।

निष्कर्ष: एक नए युग की शुरुआत

भारतीय मीडिया फाउंडेशन की यह पहल देश की पत्रकारिता और सामाजिक सक्रियता के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगी। संस्थापक एके बिंदुसार के नेतृत्व में जो ‘निर्णायक जंग’ शुरू हुई है, वह केवल अधिकारों की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र की आत्मा को बचाने का महायज्ञ है। इस शंखनाद के साथ ही, एक ऐसे भविष्य की नींव रख दी गई है, जहाँ पत्रकार निडर होकर कलम चलाएगा और सामाजिक कार्यकर्ता बिना किसी भय के समाज की सेवा कर सकेगा।

युद्ध स्तर पर तैयारी शुरू हो चुकी है, रणनीति बन चुकी है, और संदेश साफ़ है— “अधिकार, सम्मान और सुरक्षा” से कोई समझौता नहीं।

सौफा्

समर्थन में एकजुट: भारतीय मीडिया फाउंडेशन (BMF) नेशनल कोर कमेटी।

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