WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.49 P
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.49 PM
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.48 PM
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.51 P
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.51 PM
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.50
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.50 PM

वरिष्ठ समाजसेवी कृष्ण कुमार सिंह ने विभाग के दावों की पोल खोली

सह संपादक मिथिलेश कुमार मौर्य की खास रिपोर्ट।

 

“वरिष्ठ समाजसेवी कृष्ण कुमार सिंह ने विभाग के दावों की पोल खोली। विभाग का कहना है कि अतिक्रमणकारियों को सितंबर 2023 और जनवरी 2025 में नोटिस। फिर भी अतिक्रमण बरकरार।

 

मिर्जापुर से एक चौंकाने वाली खबर , जहाँ लोक निर्माण विभाग की सुस्ती ने एक सरकारी भूमि को ‘अतिक्रमण का अड्डा’ बना दिया है। जी हाँ, नरायनपुर में सरकारी सड़क की पटरी और प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक कंपोजिट विद्यालय की जमीन एवं बाउंड्री के पास अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। हैरान करने वाली बात यह है कि यह कोई नई समस्या नहीं, बल्कि तीन साल से फाइलों में दबी हुई एक बड़ी लापरवाही है।”

 

 

“वरिष्ठ समाजसेवी कृष्ण कुमार सिंह ने विभाग के दावों की पोल खोल दी है। विभाग का कहना है कि अतिक्रमणकारियों को सितंबर 2023 और जनवरी 2025 में नोटिस जारी किए गए थे। सवाल यह है कि तीन साल तक नोटिस जारी करने के बाद भी ढरकारों का अतिक्रमण बरकरार क्यों है? क्या विभाग की कार्रवाई केवल कागजों तक ही सीमित है? विभाग ने खुद अपनी रिपोर्ट में माना है कि सड़क किनारे कच्ची झोपड़ियाँ बनी हुई हैं, लेकिन इन्हें हटाने के बजाय वे खामोश बैठे हैं।

 

“इस मामले का सबसे विवादास्पद पहलू है – ‘आश्वासन का खेल’। विभाग ने ग्राम प्रधान के एक ‘मौखिक आश्वासन’ को आधार बनाकर मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया है। प्रार्थी का आरोप है कि सरकारी जमीन को केवल मौखिक वादों के भरोसे छोड़ा जा रहा है। सवाल यह है कि क्या सरकारी जमीनों का प्रबंधन अब मौखिक आश्वासनों से होगा”

 

“समाजसेवी कृष्ण कुमार सिंह का तर्क बिल्कुल स्पष्ट और मानवीय है। यदि अतिक्रमणकर्ता वास्तव में भूमिहीन हैं, तो उन्हें ‘पीएम आवास’ या ‘मुख्यमंत्री आवास योजना’ का लाभ देकर कानूनी रूप से पुनर्वासित क्यों नहीं किया जा रहा? सड़क की पटरी या विद्यालय की जमीन पर कब्जा करना किसी भी सूरत में लोकहित नहीं हो सकता।”

 

“अब प्रार्थी ने मांग की है कि जब तक मौके से अतिक्रमण पूरी तरह साफ न हो जाए, तब तक शिकायत को बंद न किया जाए। साथ ही, जिला प्रशासन और पुलिस बल की मदद से जल्द से जल्द कार्रवाई की मांग उठी है। अब देखना यह है कि क्या प्रशासन कागजी खानापूर्ति को छोड़कर धरातल पर कोई ठोस कदम उठाएगा या जनता की यह शिकायत भी फाइलों में ही दम तोड़ देगी? मिर्जापुर के जागरूक नागरिक इस फैसले का इंतजार कर रहे हैं। फिलहाल, नरायनपुर के इस मामले पर हमारी नजर बनी रहेगी।”

Leave a Comment