भगवान् जगन्नाथ जी अभी मानौरा गये हैं, रिपोर्ट किरन भट्ट

द्वितीय जगन्नाथ पुरी मानौरा धाम विदिशा

सोचिए, वह क्षण कितना अलौकिक एवं गौरवमयी होता होगा, जब पुरी धाम में कहा जाता है – भगवान अभी मानौरा गए हैं।

जब जगन्नाथ पुरी में रथ के पहिये अपने आप थम जाते हैं🙏 तब वहाँ घोषणा की जाती है कि भगवान् जगन्नाथ जी अभी मानौरा गये हैं🙏

 

उस समय मानौरा केवल एक गाँव नहीं रहता, वह स्वयं पुरी का विस्तार बन जाता है।

 

जिन महाप्रभु के दर्शन के लिए करोड़ों भक्त पुरी धाम की ओर निहारते हैं, वही प्रभु स्वयं अपने भक्तों के बीच मानौरा पधारते हैं।

 

यह केवल एक घोषणा नहीं, बल्कि उस भूमि के सौभाग्य की उद्घोषणा है, जिसे स्वयं जगत के नाथ ने अपने चरणों से पवित्र किया है।

 

हम कितने सौभाग्यशाली हैं कि उस पावन रज में निवास करते हैं, जहाँ स्वयं प्रभु के चरण पड़ते हैं। जिस भूमि को स्पर्श करने के लिए भक्त दूर-दूर से आते हैं, वह हमारे लिए मातृभूमि है। यह केवल मिट्टी नहीं, बल्कि महाप्रभु की असीम कृपा का प्रसाद है। यह उस अखंड भक्ति, तपस्या और समर्पण का भी प्रतिफल है, जिसे पूज्य मानिकचंद जी ने अपने जीवन से साकार किया। उनके तप, उनकी साधना और भगवान के प्रति उनके निष्काम प्रेम के बशीभूत होकर भगवान् ने मानौरा आने का बरदान दिया है। और उन्होंने इस भूमि को दिव्यता से आलोकित किया है।

 

हम केवल इस भूमि पर निवास नहीं करते, बल्कि उस सौभाग्य को जीते हैं, जिसे अनगिनत भक्त अपने जीवन की सबसे बड़ी प्राप्ति मानते हैं।

 

जय हो मानौरा(विदिशा) धाम की

 

जय हो महाप्रभु जगन्नाथ स्वामी की

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