लूटेरा अस्पताल और मौत का खेल, BMFNEWS

*लूटेरा अस्पताल और मौत का खेल*

आपने “गब्बर” अक्षय कुमार की मूवी देखी होगी।

इसका जीवंत उदाहरण है–लखनऊ का *मेदांता अस्पताल* अफसोस कि यह सरोजिनी नगर में स्थित है।

*मेदांता जैसा लुटेरा हॉस्पिटल किसने बनाया है* ?जिसका भी यह अस्पताल है वाकई प्रतिदिन हजारों लोगों की बद्दुआ इस प्रकार लगेगी तो बहुत बुरी दुर्गत होगी इन लोगों की।

हम लखनऊ वाले जानते हैं कि जिस पेशेंट को मृत्यु के पास भेजना हो उसे ही मेदांता ले जाएं और घर वालों को बर्बाद करना है तो इससे अच्छा रास्ता कोई नहीं। लेकिन बाहर वाले बेचारे बड़ा नाम सुनकर उनके जाल में फंस जातेहैं। मुर्दे को भी कई दिनों तक अस्पताल में रखकर बिल बनते जाते हैं और बाद में लाखों रुपए लेकर के हंड्रे बॉडी वापस कर देते हैं।

एक शिक्षा मित्र के दस वर्ष बेटे को 6 अप्रैल को ब्रेन हेमरेज हो गया था जो की मऊ के रहने वाले हैं बच्चा अच्छा खासा था शाम को 7:00 बजे सर में दर्द हुआ और दर्द इतना बड़ा की बच्चा बेहोश होकर गिर गया , परिवार वाले आनंद-पन्न लेकर भागे,वहां पर डॉक्टरों ने एक-दो दिन रखा परंतु जवाब दे दिया।अगल-बगल के अस्पतालों ने नहीं लिया तो किसी ने बताया लखनऊ चले जाओ मेदांता में अच्छा इलाज हो जाएगा बच्चा बच जाएगा।

बेचारे पेशेंट को लेकर के लखनऊ पहुंचे,6 अप्रैल से बच्चा वेंटीलेटर में है स्थिति में कोई सुधार नहीं जब पिता थक हार गए तो उन्होंने कहा कि हमारा पेशेंट छोड़ दीजिए हम वापस ले जाना चाहते हैं अभी तक 40 लाख का बिल दे चुके हैं और बच्चे की स्थिति में भी कोई सुधार नहीं ब्रेन हेमरेज और बेहोशी वैसे ही।

उनके चाचा शिक्षक हैं और पिता शिक्षा मित्र मेरे पास सुबह फोन आया सुबह से परेशान है कि यह लोग रिलीफ भी नहीं कर रहे और बिल बढ़ता जा रहा है लगभग ढाई लाख पेशेंट का और 6 लाख मेडिकल का और मांग रहे हैं।

कई जगह से प्रयास किया गया की छूट मिल जाए परंतु कुछ नहीं हुआ बड़े स्तर पर कहलाने पर डाक्टर राजेश कपूर ने 47000 कम किया और कहा कि इससे ज्यादा कि मेरी अथॉरिटी नहीं है पूरे पैसे देने ही होंगे तभी पेशेंट को ले जा सकते हैं।

पेशेंट कहना भी गलत होगा, डेड बॉडी, बेहोश बच्चों के बेड सोर इतने हो गए हैं कि नीचे का पोर्शन पूरा सड़ने लगा है। मेरी हिम्मत नहीं हुई कि जाकर के पेशेंट या परिवार वालों से मिल सकूं।

लखनऊ के केंद्र में स्थित मेदांता हॉस्पिटल को वैसे बंद कर देना चाहिए चाहे बड़ी हस्ती हो या छोटी कई बार मैंने देखा कि वहां से सिर्फ मृत शरीर ही हाथ आता है और लोगों का धन लूट लिया जाता है सो अलग।

निश्चित रूप से ऐसे अस्पताल जब बांटे होंगे तब सरकार से चिकित्सा में गरीब लोगों के इलाज के नाम पर लाखों रुपए की जमीन में छूट पाए होंगे। अस्पताल बन जाने के बाद इन्हें सिर्फ धन की लूट दिखती है गरीबी नहीं, बेबसी नहीं ,मानवतानहीं।

मैंने कई बार कहा कि कंप्लेंट करिए मुख्यमंत्री जी के नाम ताकि ऐसे अस्पतालों की जांच हो और इन्हें बंद किया जा सके परंतु परिवार इतना परेशान है कि वह अपने बच्चों को देखे , मां को संभाले की एप्लीकेशन लिखे उन लोगों का रो रो कर के बुरा हाल है।

इसीलिए शिक्षा और चिकित्सा को प्राइवेट नहीं होना चाहिए । आज भी उत्तर प्रदेश जैसे गरीब देश में आवश्यक सुविधाओं में शामिल होने चाहिए ,पता नहीं किन लोगों ने गलत नीतियां बनाकर शिक्षा और चिकित्सा का प्राइवेटाइजेशन कर दिया आज आम आदमी शिक्षा और चिकित्सा दोनों के अभाव में परेशानहै। प्रतिदिन हजारों लोग गलत इलाज और इन बड़े अस्पतालों की चंगुल में फंसकर मर रहे हैं।

 

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