*भारतीय मीडिया फाउंडेशन (नेशनल )का मिशन 2027: उत्तर प्रदेश में नई कार्यकारिणी के साथ पत्रकारिता जगत में आएगा क्रांतिकारी बदलाव!*
*कमल कुमार मिश्रा राज्य चेयरमैन एवं सुरेश राजभर बने प्रदेश अध्यक्ष*।
रिपोर्ट: सिम्मी भट्टी, नेशनल ऑफिस चीफ सेक्रेटरी।
नई दिल्ली: लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को मजबूती प्रदान करने और देश भर में ‘पत्रकार सुरक्षा’ एवं ‘मीडिया कर्मियों के कल्याण’ के लिए निरंतर संघर्षरत ‘भारतीय मीडिया फाउंडेशन’ (BMF) नेशनल द्वारा उत्तर प्रदेश में एक व्यापक संगठनात्मक पुनर्गठन की घोषणा की है। संगठन की नेशनल कोर कमेटी द्वारा घोषित यह नई प्रदेश कार्यकारिणी केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि सत्र 2027 के महा-लक्ष्यों को प्राप्त करने का एक ऐतिहासिक संकल्प है।
नए नेतृत्व का आगमन: एक दूरदर्शी कार्ययोजना की नींव
संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित बालकृष्ण तिवारी के कुशल नेतृत्व में, यह निर्णय लिया गया है कि उत्तर प्रदेश, जो कि देश की राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों का केंद्र है, वहाँ से एक ऐसा संदेश दिया जाएगा जो पूरे भारत में पत्रकारिता के प्रति दृष्टिकोण बदल देगा। पंडित बालकृष्ण तिवारी ने स्पष्ट किया कि नवनियुक्त पदाधिकारियों का चयन उनकी कार्यकुशलता, निष्ठा और सामाजिक कार्यों के प्रति उनके समर्पण को ध्यान में रखकर किया गया है।
उत्तर प्रदेश की नई कमान: रणनीतिक नियुक्तियाँ एवं व्यक्तित्व का विश्लेषण
संगठन ने प्रदेश के विभिन्न अंचलों से ऐसे ऊर्जावान चेहरों को आगे किया है, जो जमीनी स्तर पर पत्रकारिता की चुनौतियों को गहराई से समझते हैं:
1. कमल कुमार मिश्रा (राष्ट्रीय पार्षद एवं राज्य चेयरमैन – उत्तर प्रदेश)
प्रयागराज से ताल्लुक रखने वाले श्री मिश्रा का व्यक्तित्व एक कुशल रणनीतिकार का है। ‘राष्ट्रीय पार्षद एवं राज्य चेयरमैन’ के रूप में उनकी नियुक्ति यह सुनिश्चित करेगी कि उत्तर प्रदेश में संगठन के नीतिगत निर्णय और संवैधानिक गतिविधियाँ सही दिशा में आगे बढ़ें। उनका दृष्टिकोण है कि जब तक मीडिया की नीति-निर्धारण में अनुभवी लोग शामिल नहीं होंगे, तब तक पत्रकार सुरक्षा का प्रश्न अधूरा रहेगा।
2. सुरेश कुमार राजभर (कार्यकारिणी प्रदेश अध्यक्ष – उत्तर प्रदेश)
वाराणसी की धरा से आने वाले श्री राजभर को प्रदेश अध्यक्ष की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपकर संगठन ने स्पष्ट किया है कि वे संगठन के विस्तार और कार्यकर्ताओं के बीच आपसी सामंजस्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहे हैं। उनका मानना है कि एक संगठित प्रदेश अध्यक्ष ही हर जिले में संगठन की आवाज को बुलंद कर सकता है। उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की हर इकाई को नई ऊर्जा मिलेगी।
3. अपर्णा भव पाठक (प्रदेश उपाध्यक्ष – उत्तर प्रदेश)
मिर्जापुर निवासी पाठक जी का संगठन में प्रदेश उपाध्यक्ष के रूप में आना पूर्वांचल के मीडिया सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है। उनका विचार अत्यंत स्पष्ट है—मीडिया के माध्यम से समाज की कुरीतियों और प्रशासनिक अव्यवस्थाओं को चुनौती देना। उनका जुड़ाव संगठन को एक संवेदनशील और धारदार चेहरा प्रदान करेगा।
4. पप्पू सिंह (प्रदेश महासचिव एवं प्रभारी जिला लखीमपुर खीरी)
लखीमपुर खीरी के निवासी श्री पप्पू सिंह को प्रदेश महासचिव के साथ-साथ जिले का दोहरा दायित्व देकर संगठन ने उनके जमीनी जुड़ाव पर भरोसा जताया है। उनका प्रशासनिक कौशल और संकट प्रबंधन क्षमता संगठन को कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी आगे ले जाने में सक्षम है।
सत्र 2027 का रोडमैप: ‘पत्रकार सुरक्षा’ और ‘अधिकार’ हमारा मूल मंत्र
भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी ने आने वाले सत्र के लिए जो रूपरेखा तैयार की है, वह निम्नलिखित स्तंभों पर आधारित है:
पत्रकार सुरक्षा अधिनियम: प्रदेश कार्यकारिणी का पहला और प्रमुख कार्य राज्य स्तर पर ‘पत्रकार सुरक्षा कानून’ को लागू करवाने के लिए सरकार के समक्ष शक्ति प्रदर्शन और जन-अभियान चलाना होगा।
मीडिया कल्याण बोर्ड: पत्रकारों के स्वास्थ्य, बीमा और सामाजिक सुरक्षा के लिए ‘मीडिया कल्याण बोर्ड’ के गठन की मांग को धरातल पर उतारना।
नागरिक पत्रकारिता (Citizen Journalism): संगठन का लक्ष्य केवल पत्रकारों को जोड़ना नहीं, बल्कि हर जागरूक नागरिक को ‘डिजिटल पत्रकार’ के रूप में तैयार करना है ताकि प्रशासनिक भ्रष्टाचार पर लगाम कसी जा सके।
आर.टी.आई. का व्यापक उपयोग: धारा 4 और 26 के तहत सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए हर जिले में आर.टी.आई. सेल को सक्रिय करना।
आगामी भव्य शपथ ग्रहण समारोह: शक्ति प्रदर्शन और एकता का संदेश
राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित बालकृष्ण तिवारी ने घोषणा की है कि आगामी रविवार को एक वर्चुअल भव्य शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यक्रम केवल औपचारिकता नहीं होगा, बल्कि उत्तर प्रदेश में भारतीय मीडिया फाउंडेशन की बढ़ती हुई ताकत का प्रतीक होगा।
सत्र 2027 के लिए कार्य-प्रणाली (SOP) का सार्वजनिक विमोचन किया जाएगा।
शीर्ष नेतृत्व द्वारा पत्रकारों को संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक करने हेतु विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित होगा।
एक नए युग की शुरुआत
संगठन के भीतर इन नियुक्तियों को एक ‘बड़े सकारात्मक बदलाव’ के रूप में देखा जा रहा है। पत्रकारिता जगत के जानकारों का मानना है कि यदि यह नई टीम अपनी पूरी क्षमता से कार्य करती है, तो उत्तर प्रदेश में पत्रकारों के प्रति होने वाले अत्याचारों में कमी आएगी और वे निडर होकर अपना दायित्व निभा सकेंगे।
नवनियुक्त पदाधिकारियों ने संगठन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि, “हमें जो जिम्मेदारी दी गई है, वह एक पद नहीं, बल्कि एक कठिन तपस्या है। हम पत्रकारिता को मिशन मानकर काम करेंगे और अपने साथियों के मान-सम्मान की रक्षा के लिए अंत तक लड़ेंगे।”
निश्चित रूप से, भारतीय मीडिया फाउंडेशन का यह कदम पत्रकारिता के भविष्य के लिए अत्यंत निर्णायक साबित होगा। पूरे प्रदेश के पत्रकार समाज की निगाहें अब इस नई कार्यकारिणी की आगामी सक्रियता पर टिकी हुई हैं।









