*भारतीय मीडिया फाउंडेशन (नेशनल): राष्ट्रीय ‘महा-संकल्प’ पत्र (2026)*
*लोकतंत्र के सजग प्रहरियों का 12-सूत्रीय अधिकार, सम्मान एवं सुरक्षा घोषणापत्र*
*प्रस्तावना:*
लोकतंत्र के चार स्तंभों में ‘चौथा स्तंभ’ (पत्रकारिता) और जन-चेतना का आधार (सामाजिक कार्यकर्ता) आज अभूतपूर्व संकट से जूझ रहे हैं। यह ‘महा-संकल्प’ केवल हमारी मांगें नहीं, बल्कि भारत के लोकतांत्रिक स्वास्थ्य की रक्षा हेतु अनिवार्य शर्तें हैं। हम, भारतीय मीडिया फाउंडेशन (नेशनल कोर कमेटी), के केंद्रीय पॉलिसी मेकिंग सुप्रीम कमेटी के केंद्रीय अध्यक्ष करन छौकर, केंद्रीय मैनेजमेंट अफेयर्स कमेटी के केंद्रीय अध्यक्ष रविकांत साहू , कोर कमेटी के राष्ट्रीय चेयरमैन संजय कुमार मौर्य, कोर कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित बालकृष्ण तिवारी, केंद्रीय सलाहकार परिषद के केंद्रीय अध्यक्ष कृष्ण माधव मिश्रा, केंद्रीय अनुशासन समिति के केंद्रीय अध्यक्ष राम आसरे, एवं समस्त कार्यकारिणी के सानिध्य में संगठन के संस्थापक मीडिया सरकार एके बिंदुसार ने
राष्ट्र के प्रति अपनी जवाबदेही को सर्वोपरि मानते हुए निम्नलिखित 12-सूत्रीय एजेंडे को लागू करने का संकल्प लेते हुए संकल्प पत्र जारी किया एवं समस्त राष्ट्रीय डिप्टी चेयरमैन, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष गण, राष्ट्रीय महासचिव गण, राष्ट्रीय सचिव एवं राष्ट्रीय संगठन सचिव गण , राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं राष्ट्रीय सलाहकार गण एवं समस्त विभागीय कमेटी के मीडिया अधिकारी एवं पदाधिकारी एवं प्रदेश कमेटी के मीडिया अधिकारी एवं पदाधिकारी गणों के कंधे से कंधा मिलाकर इस संकल्प को पूरा करने का संकल्प दोहराया।
*विस्तृत संकल्प*
*1. ‘मीडिया पालिका’ का संवैधानिक गठन (Media Commission):*
न्यायपालिका और निर्वाचन आयोग की भांति मीडिया के लिए एक संवैधानिक दर्जा प्राप्त ‘मीडिया पालिका’ का गठन हो। यह निकाय कॉरपोरेट और राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त रहकर पत्रकारों की स्वतंत्रता की रक्षा करेगा और मीडिया संस्थानों के कामकाज की निगरानी एक स्वतंत्र प्रहरी के रूप में करेगा।
*2. विधायी निकायों (राज्यसभा/विधान परिषद) में आरक्षित कोटा:*
लोकतंत्र के प्रहरियों की जमीनी आवाज सीधे नीति-निर्माण के गलियारों तक पहुंचे, इसके लिए देश की उच्च सदन (राज्यसभा) और राज्यों की विधान परिषदों में पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए सीटों का एक निश्चित कोटा आरक्षित किया जाए।
*3. राज्य-स्तरीय ‘कल्याण बोर्ड’ की स्थापना:*
प्रत्येक राज्य में ‘पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता कल्याण बोर्ड’ का गठन अनिवार्य हो। इस बोर्ड के पास स्वास्थ्य सुरक्षा, शिक्षा, आपातकालीन सुरक्षा और कानूनी सहायता हेतु एक पृथक ‘लोकतंत्र निधि’ (Democracy Fund) हो, जिसका संचालन निर्वाचित प्रतिनिधियों एवं वरिष्ठ पत्रकारों की संयुक्त समिति करे।
*4. सशक्त ‘पत्रकार सुरक्षा कानून’:*
पत्रकारों पर होने वाले हमलों और फर्जी मुकदमों को ‘गैर-जमानती’ (Non-bailable) अपराध की श्रेणी में रखा जाए। इन मामलों के त्वरित निपटारे के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों का गठन हो।
*5. स्वतंत्र ‘सामाजिक कार्यकर्ता सुरक्षा आयोग’:*
सामाजिक कार्यकर्ताओं के विरुद्ध दमनकारी कार्रवाई, शारीरिक हिंसा एवं राज्य तंत्र द्वारा किए जाने वाले शोषण की निष्पक्ष जांच के लिए एक स्वतंत्र एवं संवैधानिक ‘सामाजिक कार्यकर्ता सुरक्षा आयोग’ का गठन किया जाए।
*6. ‘स्लैप’ (SLAPP) मुकदमों पर प्रतिबंध:*
कॉरपोरेट घरानों द्वारा पत्रकारों की आवाज दबाने के लिए दायर किए जाने वाले रणनीतिक मुकदमों (Strategic Lawsuits Against Public Participation) को अवैध घोषित किया जाए। ऐसे झूठे मुकदमों में याचिकाकर्ता पर भारी आर्थिक दंड का प्रावधान हो।
*7. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का संरक्षण:*
सरकारी एजेंसियों (ED, CBI, IT) का उपयोग कर मीडिया संस्थानों की वित्तीय घेराबंदी, कार्यालयों को ‘फ्रीज’ करने और डिजिटल सेंसरशिप पर पूर्ण प्रतिबंध लगे। असहमति को राष्ट्रद्रोह से जोड़ना बंद किया जाए।
*8. विज्ञापन नीति में पारदर्शिता एवं श्रम कानूनों का पालन:*
सरकारी विज्ञापन केवल उन मीडिया संस्थानों को मिलें जो ‘श्रमजीवी पत्रकार अधिनियम’ का अक्षरशः पालन करते हों। वेतन न देने या पत्रकारों का शोषण करने वाले संस्थानों के संचालकों के विरुद्ध आपराधिक मामला दर्ज हो।
*9. मानहानि (Defamation) का अपराधीकरण समाप्त:*
मानहानि को ‘आपराधिक’ दायरे से बाहर निकाल कर केवल ‘दीवानी’ (Civil) मामला बनाया जाए, ताकि इसका उपयोग असहमति को दबाने के लिए एक हथियार के रूप में न हो सके।
*10. सूचना के अधिकार (RTI) की मजबूती:*
RTI कार्यकर्ताओं को विशेष सुरक्षा कवच प्रदान किया जाए। सूचना आयोगों में रिक्त पड़े पदों को विशेषज्ञों से तुरंत भरा जाए ताकि पारदर्शिता का अधिकार सुनिश्चित रहे।
*11. मीडिया स्वामित्व में पारदर्शिता एवं एकाधिकार पर रोक:*
कॉरपोरेट द्वारा मीडिया के एकाधिकार (Cross-ownership) को विनियमित किया जाए। यह सुनिश्चित हो कि सूचना का लोकतंत्रीकरण हो और मीडिया ‘प्रचार-तंत्र’ (Propaganda machine) न बने।
*12. डिजिटल मीडिया को मान्यता एवं ‘जवाबदेह भारत कल्याण कोष’:*
डिजिटल पत्रकारों, फ्रीलांसरों और स्वतंत्र पोर्टल्स को मुख्यधारा के पत्रकारों के समान ‘सरकारी मान्यता’ (Accreditation) मिले। साथ ही, आर्थिक तंगी झेल रहे साथियों के लिए ‘जवाबदेह भारत कल्याण कोष’ का गठन किया जाए।
*हमारा अंतिम संकल्प*
लोकतंत्र का ‘चौथा स्तंभ’ आज दरक रहा है। यह दस्तावेज केवल मांग नहीं, बल्कि राष्ट्र को बचाने का हमारा प्रण है। यदि शासन-प्रशासन इन मांगों के प्रति उदासीन रहता है, तो भारतीय मीडिया फाउंडेशन अपने संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण हेतु व्यापक राष्ट्रव्यापी आंदोलन के लिए बाध्य होगा।
एके बिंदुसार
संस्थापक
*नेशनल कोर कमेटी,*
*भारतीय मीडिया फाउंडेशन (BMF) नेशनल*









