SRN अस्पताल का नाम ‘अमर हुतात्मा ठाकुर रोशन सिंह’ के नाम पर रखने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरना छठवें दिन भी जारी, रिपोर्ट शंकर देव तिवारी

*SRN अस्पताल का नाम ‘अमर हुतात्मा ठाकुर रोशन सिंह’ के नाम पर रखने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरना छठवें दिन भी जारी*

 

*प्रयागराज, 10 अगस्त 2026:* मोतीलाल नेहरू राजकीय मेडिकल कॉलेज से संबद्ध मण्डलीय चिकित्सालय ‘स्वरूप रानी नेहरू’ का नाम बदलकर ‘अमर हुतात्मा ठाकुर रोशन सिंह’ के नाम पर रखने की मांग को लेकर महुआ डाबर संग्रहालय परिवार के तत्वावधान में चल रहा अनिश्चितकालीन धरना सोमवार को छठवें दिन भी जारी रहा। आंदोलन को समर्थन देने वाले संगठनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसी क्रम में *अपराजिता न्याय समिति और प्रयागराज की सांस्कृतिक संस्था ‘नया परिमल’ ने भी इस मांग का समर्थन करते हुए सरकार से अस्पताल का नाम अमर हुतात्मा ठाकुर रोशन सिंह के नाम पर करने की मांग की है।*

 

अपराजिता न्याय समिति के प्रबंधक अतुल सिंह ने मांग को समर्थन देते हुए सूबे के मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन भेजा है। इसके साथ ही प्रयागराज की सांस्कृतिक संस्था ‘नया परिमल’ के राष्ट्रीय सचिव डॉ. विनम्र सेन सिंह ने भी सरकार को इस बाबत ज्ञापन भेजा है। दोनों संस्थाओं की ओर से भेजे गए ज्ञापनों में अस्पताल का नाम अमर हुतात्मा ठाकुर रोशन सिंह के नाम पर किए जाने की मांग का समर्थन किया गया है। इसी क्रम में आज इन दोनों पत्रों को धरना स्थल पर उपस्थित लोगों को पढ़कर सुनाया गया।

 

धरने को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष करते हुए महान क्रांतिकारी काकोरी केस के महानायक ठाकुर रोशन सिंह का रक्त प्रयागराज की कुख्यात मलाका जेल की इसी माटी पर गिरा था। आज उसी ऐतिहासिक बलिदान स्थल पर स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय स्थापित कर पर्दा डाल दिया गया। जबकि उस समय होना यह चाहिए था कि अस्पताल का नाम अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह के नाम पर समर्पित कर दिया जाता, लेकिन एक साजिश के तहत इसका नाम SRN अस्पताल रखा गया। आजाद भारत में हालत यह हुई कि महान क्रांतियोद्धा के जन्मदिवस और बलिदान दिवस पर प्रयागराज के साथ पूरे देश के लोग इस स्थान को भूल गए। सवाल यह उठता है कि अगर हम इसी तरह से ही भूलने पर आमादा रहे तो भला याद क्या रखेंगे?

 

जबकि काकोरी क्रांति नायकों पंडित रामप्रसाद ‘बिस्मिल’, राजेंद्रनाथ लाहिड़ी और अशफाक उल्ला खां के बलिदान स्थलों गोरखपुर, गोंडा और अयोध्या में शहीदों के बलिदान दिवस पर विशाल आयोजन की परंपरा आज तक जीवित है।

 

धरने में प्रमुख रूप से डॉ. अवनीश सिंह, डॉ. सर्वेश सिंह, डॉ. शाह आलम राना, निशांत मोदनवाल, रणविजय सिंह, अग्निवेश तिवारी, शिवांग त्रिपाठी, हिमांशु सिंह, योगेश तिवारी, मनु सिंह, प्रभात कुमार, शुभम सिंह, शोभित सिंह, भूपेश चौधरी, एम. के. चौरसिया, रतन तिवारी, जैक तिवारी, राम मिश्रा सहित बड़ी संख्या में छात्र, युवा एवं नागरिक मौजूद रहे।

 

धरनार्थियों ने संकल्प लिया कि जब तक सरकारें इस वाजिब मांग को नहीं मानतीं, अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह की गौरवशाली विरासत को बचाने का संघर्ष जारी रहेगा।

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