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समय रहते शिकायत पर कार्रवाई होती तो शायद बच सकती थी कशिश की जान! BMFNEWS

समय रहते शिकायत पर कार्रवाई होती तो शायद बच सकती थी कशिश की जान!

 

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत राजकीय मेडिकल कॉलेज में हुई छात्रा कशिश पटेल की हत्या ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। यह घटना केवल एक आपराधिक वारदात नहीं, बल्कि शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था, शिकायतों के निस्तारण और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।

 

मृतका कशिश पटेल, बरेली जिले के केसरपुर गांव की रहने वाली थीं और पीलीभीत मेडिकल कॉलेज में सीटी स्कैन टेक्नीशियन का प्रशिक्षण ले रही थीं। वहीं आरोपी सागर सिंह, मेड़ुआ (अरौल), कानपुर देहात का निवासी है और उसी संस्थान में एक्स-रे टेक्नीशियन प्रथम वर्ष का छात्र था। पुलिस के अनुसार आरोपी को घटना के तुरंत बाद मेडिकल कॉलेज के सुरक्षा कर्मियों ने पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया।

 

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी कशिश से एकतरफा लगाव रखता था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार कशिश ने पहले भी आरोपी की कथित हरकतों की शिकायत कॉलेज प्रशासन से की थी। यही तथ्य इस पूरे मामले को और गंभीर बना देता है। यदि शिकायत पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई होती, जोखिम का आकलन किया जाता और दोनों छात्रों के बीच आवश्यक दूरी तथा सुरक्षा सुनिश्चित की जाती, तो संभव है कि इस दुखद घटना को रोका जा सकता था। हालांकि यह जांच का विषय है कि शिकायत के बाद प्रशासन ने क्या कदम उठाए थे और क्या वे पर्याप्त थे।

 

घटना के दिन अस्पताल परिसर के सीटी स्कैन विभाग के पास दोनों के बीच विवाद हुआ, जिसके बाद आरोपी ने धारदार हथियार से हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल कशिश को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी। बीच-बचाव करने आई एक महिला कर्मचारी भी घायल हुईं।

 

इस घटना के बाद मेडिकल कॉलेज के छात्रों ने सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए विरोध प्रदर्शन किया। परिजनों ने आरोपी के खिलाफ कठोर कार्रवाई और मामले की त्वरित सुनवाई की मांग की है। वहीं पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और कॉलेज प्रशासन ने भी आंतरिक जांच शुरू कर दी है।

 

यह घटना केवल एक परिवार का दुख नहीं है, बल्कि हर शैक्षणिक संस्थान के लिए एक चेतावनी है। किसी भी छात्र या छात्रा की शिकायत को औपचारिक कागज समझकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। समय पर कार्रवाई, प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था और संवेदनशील शिकायतों के प्रति गंभीरता भविष्य में ऐसी घटनाओं की आशंका को कम कर सकती है। अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा, लेकिन इतना तय है कि हर शिकायत को गंभीरता से लेना अब पहले से कहीं अधिक आवश्यक है।

 

 

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