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बाह को कैसे मिले पुल और सड़कें  मोक्ष धाम बटेश्वर का तो खंडहर हो गया शंकर देव तिवारी 

अपनी बात

बाह को कैसे मिले पुल और सड़कें

मोक्ष धाम बटेश्वर का तो खंडहर हो गया

शंकर देव तिवारी

बाह। वन बढे न घटे योजना के तहत जो मामला सुप्रीम कोर्ट जाकर रिजर्व फ़ारेस्ट घोषित करने के साथ थमा था अब वो गले की हड्डी बन चुका है। मगर राज्य सरकार है कि दर्जनों योजनाएं बनकर तैयार हैं मगर रिजर्व फॉरेस्ट के हिस्से बिना एन ओ सी के पूर्ण नहीं हो पा रही हैं।

ऐसी ही एक योजना अटेर पुल है। इसके अलावा हूसेत् पुल, अधडरजं भर गाँव की सड़कें बटेश्वर मोक्ष धाम तक बिना रास्ते बन कर खंडहर हो गए हैं।

 

चंबल पर पुल मध्य प्रदेश सरकार बना रही है और उसमें रोड़ा हमारी सरकार बनी हुई है और बहम में थे कि ट्रिपल इंजन की सरकार की वजह से जल्द पुल बन जाएगा!

सांसद जी एक साल से ज्यादा हो गया जब आप इसका मुआयना करने आए थे तब से ही हमारी साइड काम बंद है कृपया इस मामले में संज्ञान लीजिए!!

विधायक महोदय आपके भी अटेर किला पर आना जाना चालू हो जाएगा आप भी कोशिश करो कि वन विभाग परमिशन दे दे!

बाकी सांसद विधायक समर्थक बहुत है हमारी फ्रेंड लिस्ट में इस बात को पहुंचाए!!

 

एक नहीं बाह की दर्जनों योजनाएं इसी वजह से पेंडिंग हैं। नाम वन विभाग का है जबकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर वन विभाग चल रहा है। राज्य सरकार को इस मामले को लेकर कोर्ट जाना होगा। मगर हमारे अपने प्रतिनिधि कितने होशियार हैं ये आप उनकी गतिविधियों से ही पता चला सकते हैं। उन्होंने कुछ दिनों पहले जिलाधिकारी से एक आदेश करा स्थानीय लोगों को भृमित कर दिया था। बिना धारा चार के ही प्रचार हो गया था रास्ता आहरित हो गया। अभी ताजी मामले में एक योजना इस लिए लौट गई जिसके लिए प्नहुँच मार्ग नहीं था। अब उसी जमीन का पुनः निरिक्षणं कराया गया तथा यह प्रचार हुआ जहाँ स्टेट यानी लोक निर्माण विभाग की नहीं मनरेगा की सड़क से काम चलेगा। मगर नियम विरुद्ध कुछ भी नहीं होगा बस चुनावी साल पकड़ लेंगे। और हूसेत् अटेर के पुल की तरह बीरबल की खिचड़ी पकती रहेगी।

अटेर पुल के लिए तो एक ही पार्टी के लोग आमने सामने हैं। नरेंद्र भारतीय केसाथ राहुल वशिष्ठ ने खूब लिखा है।

हूसेत् पुल पर तो राजीव गांंधी का नाम जुड़ा है फिर भी नहीं शुरू हो पाया है।

बटेश्वर का मोक्ष धाम बन गया मगर रास्ते के न बनने से वो खत्म होने की कगार पर है।

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