संपादक एके बिन्दुसार की खास रिपोर्ट
- हिटलर शाही फरमान की भारतीय मीडिया फाउंडेशन ने किया जोरदार विरोध
सिंगरौली। मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले से एक ऐसा फरमान सामने आया है जिसने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) द्वारा जारी एक आदेश में पत्रकारों और आम नागरिकों के सरकारी स्कूलों में प्रवेश और निरीक्षण पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। आदेश में ‘छात्र सुरक्षा’ का तर्क दिया गया है, लेकिन असलियत यह है कि यह फरमान शिक्षा माफियाओं के लिए एक ढाल बनकर उभरा है।
पारदर्शिता पर ताला, भ्रष्टाचार को बढ़ावा
भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी ने इस तानाशाही फरमान का कड़ा विरोध किया है। यदि विद्यालयों में सब कुछ ठीक है, तो प्रशासन को निरीक्षण से डर क्यों लग रहा है? पत्रकारों और जन-प्रतिनिधियों की मौजूदगी ही वह कड़ी होती है जो शिक्षा विभाग के भ्रष्टाचार और स्कूल प्रबंधन की धांधली पर लगाम लगाती है। स्कूलों में प्रवेश वर्जित करने का मतलब साफ है—”शिक्षा के मंदिरों में चल रहे खेल को पर्दे के पीछे रखना।”
माफियाओं की सुरक्षा की रणनीति
यह आदेश कोई सामान्य निर्देश नहीं है, बल्कि उन शिक्षा माफियाओं की सुरक्षा की सुनियोजित रणनीति है, जो सरकारी संसाधनों का बंदरबांट कर रहे हैं। बिना सक्षम अनुमति के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाकर विभाग यह सुनिश्चित करना चाहता है कि कोई भी पत्रकार उन स्कूलों की हकीकत न देख सके, जहाँ अव्यवस्थाओं का अंबार लगा है। यह आदेश सूचना के अधिकार (RTI) और लोकतंत्र की बुनियादी स्वतंत्रता का सीधा उल्लंघन है।
यूनियन के संस्थापक एके बिंदुसार का आह्वान: “तेज करो कलम की धार”
भारतीय मीडिया फाउंडेशन (BMF) नेशनल के संस्थापक ए.के. बिंदुसार ने इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए समस्त पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से अपील की है:
“शिक्षा विभाग का यह हिटलर शाही फरमान लोकतंत्र के लिए शर्मनाक है। जब प्रशासन सच छुपाने की कोशिश करे, तो पत्रकारों का कर्तव्य है कि वे सच को और अधिक मजबूती से उजागर करें। मैं प्रदेश के हर पत्रकार और सामाजिक योद्धा से आह्वान करता हूँ कि शिक्षा माफियाओं के खिलाफ अपनी कलम की धार तेज करें। अब हमें खामोश नहीं रहना है, बल्कि सोशल मीडिया के हर मंच पर, हर दिन इनके भ्रष्टाचार की पोल खोलनी है। जब तक यह जनविरोधी आदेश वापस नहीं होता, हमारा संघर्ष जारी रहेगा।”
शिक्षा माफियाओं के पसीने छुड़ाने का समय
अब समय आ गया है कि सोशल मीडिया की ताकत को पहचाना जाए। सिंगरौली के हर जागरूक नागरिक और पत्रकार को अब स्कूलों की अनियमितताओं को सीधे जनता के सामने लाना होगा। आपकी एक पोस्ट, एक वीडियो और एक सवाल शिक्षा माफियाओं के पसीने छुड़ाने के लिए पर्याप्त है।
हमारा संकल्प: न दबेगा सच, न रुकेगी कलम। शिक्षा के अधिकार की सुरक्षा के लिए, हम हर उस दीवार को तोड़ेंगे जो पारदर्शिता के रास्ते में खड़ी होगी।
[मीडिया नेटवर्क /Bhartiya Media Foundation]
लोकतंत्र की प्रहरी – जन-जन की आवाज
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