मंत्री ने पत्रकारों के सम्मेलन में निकाली बीते हुए लम्हों की कसक
-उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि मीडिया ने उनके बारे में झूठी खबरें प्रकाशित-प्रसारित की थीं
-कुछ पत्रकारों के नाम लेकर उलाहना दिया- बताओ, मेरे खिलाफ झूठ था या नहीं ?
-दी नसीहत- व्यूज से न्यूज नहीं बनानी चाहिए
आगरा: राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप चलते रहते हैं। लेकिन, कभी-कभी शब्दबाण इतने विषैले लगते हैं कि दिल को छलनी कर देते हैं। प्रत्यारोप के दौर शुरू हो जाते हैं। शनै:-शनै टॉपिक बंद हो जाता है, कही हुई बातें भुला दी जाती हैं। परंतु शब्दों के घाव इतने गहरे हो जाते हैं कि तमाम उदारतापूर्ण मरहम-पटटी करने और कराने के बाद भी निशान छोड़ ही देते हैं। योगी सरकार के एक कैबिनेट मंत्री की कसक भी यही है। एक प्रकरण में उनका नाम उछालने को लेकर उनका गिला अभी भी मिटा नहीं है लेकिन शिकवा भी है उन खबरनवीसों से जिन्होंने झूठ(उनके कहे अनुसार) को प्रकाशित और प्रसारित किया।
शनिवार को विश्वविदयालय के खंदारी परिसर स्थित जेपी सभागार में नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स ऑफ इंडिया (एनयूजेआई) के पत्रकार सम्मेलन में बतौर अतिथि प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय अपना संबोधन कर रहे थे। कुछ औपचारिक संबोधन के बाद उन्होंने अपने मन की बात कही। बोले, खबर को सत्यापित करके ही प्रकाशित और प्रसारित करना चाहिए। मेरे खिलाफ भी खूब झूठ प्रकाशित किया गया। किसी के व्यूज को न्यूज बनाकर छापा गया। उन्होंने एक-दो पत्रकारों के नाम लेकर इंगित किया और सवाल किया कि बताओ, हमारे खिलाफ झूठ था या नहीं? वे ये भी बोले, हम जानते हैं कि ये कौन करवा रहा था ? व्यूज किसी के थे और उसकी ही न्यूज बनाई गई। उन्होंने पत्रकारों को नसीहत भी दी। कहा कि व्यूज को न्यूज नहीं बनाना चाहिए। इसकी सत्यता परखनी चाहिए। खैर, इसके बाद मंत्री ने पत्रकार और पत्रकारिता पर सारगर्भित संबोधन दिया। नारद जी से लेकर वर्तमान के परिवेश और परिदृश्य पर प्रकाश डाला। पत्रकार साथियों को आश्वस्त किया कि किसी भी तरह की जरूरत पड़ने पर वे हमेशा सहयोग के लिए तत्पर हैं।
उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने किसी प्रकरण का नाम तो नहीं लिया लेकिन उनके कहने के लहजे से ही अनुमान लगा लिया गया कि वे जगदीशपुरा भूमि प्रकरण पर बात कर रहे हैं। बोदला क्षेत्र में बैनारा फैक्ट्री के पास भूमि पर कब्जे को लेकर दो साल पहले एक मामला गरमाया था। इसमें सांसद राजकुमार चाहर ने पूरे मामले की जांच को लेकर उच्चाधिकारियों को पत्र लिखे थे। इसमें उच्च शिक्षा मंत्री का नाम भी घसीटा गया था। इसको लेकर काफी समय तक राजनीतिक हलचल मची रही थी। अब इस प्रकरण में सीबीसीआईडी जांच हो चुकी है। कुछ आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई भी हो चुकी है।
पार्क पर अतिक्रमण की फाइल भी बंद
शुक्रवार को पर्यावरण दिवस पर फतेहाबाद में वृक्षारोपण का आयोजन किया गया। इसमें सांसद राजकुमार चाहर बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित थे। पूर्व मंत्री रामसकल गुर्जर सहित अन्य वरिष्ठ भाजपा नेता भी मौजूद थे। चाहर और गुर्जर की एक साथ मौजूदगी देखने वालों में एक पुराने मामले की चर्चा होने लगी। सांसद चाहर ने पूर्व मंत्री के आगरा स्थित आवास पर पार्क पर अतिक्रमण की लिखित शिकायत कमिश्नर को की थी। अतिक्रमण हटाने का आग्रह किया था। तब ये मामला कई दिनों तक राजनीतिक सुर्खियां बना था। अब ये दूरियां मिट चुकी हैं। पार्क पर अतिक्रमण् की फाइल भी बंद हो चुकी है। इस संधि के पीछे एक पूर्व विधायक की भूमिका बताई जा रही है। फतेहाबाद क्षेत्र में विधायकी की टिकट से लेकर जिला पंचायत अध्यक्षी के लिए शतरंजी बिसातें बिछनी शुरू हो गई हैं। तुम विधायक तो हम जिला पंचायत अध्यक्ष के फार्मूले सुलह-समझौते हो रहे हैं।
@राजेश मिश्रा









